मंगलवार, 12 अप्रैल 2011

जखन गामक याद आबय ये ते अहाँ की करय छि......

जखन गामक याद आबय ये ते अहाँ की करय छि...?

शहर की भीड़-भाड़, आ शोर शराबा में
जतय सुस्ताबै के फुर्सत नै भेटय ये,
पैसा के हाय-हाय नै ते बाय-बाय ये
ओतय गामक चौपाल याद आबय ये ते अहाँ की करय छि।

बंद कमरा के ए.सी. जतय तन के ते शुकून दए ये
मुदा मोन के नै,
ओतय पिपरक ठंढा छाँव याद आबय ते अहाँ की करय छि?

पंखा के हवा में जतय घुटन महसूस होए ये
घड़ी के टिक-टिक में जतय शोर सुनाय दए ये,
ओतय गामक पुरबाई याद आबय ये ते अहाँ की करय छि?

बाथरुम के बाथ-टब आ स्वीमिंग पूल के पानि
तन के ते भींगाबै छैक मुदा मोन के नै,
छीन लै ये हवा जतय मोनक चैन
ओतय पोखरी के डुबकी याद आबय ते अहाँ की करय छि?

भेपर लाइट के रौशनी से जतय रातियों दिन बुझाबै छैक
भक्क-भक्क रौशनी जतय आंखि नै सोहाबै छैक
ओतय चाँद के देखबाक लेल अहाँ की करय छि?
जो गाम के याद आबाय ते अहाँ की करय छि....???

सोमवार, 11 अप्रैल 2011

आय छि फणीश्वर नाथ रेनू के पुण्यतिथि...

पश्चिमी सभ्यता के रंग में रंगल आय हम भारतवासी आय हम बिसैरी गेलों की आजुके दिन हम हिंदी साहित्य के ओ महान विभूति कए जिनकर योगदान सों आय सोंसे बिहार ही नै सोंसे भारत नेहाल ये जी हाँ हम गोप कए रहल छि मिथिला के शान,बिहार के मान,आर देश के जान फणीश्वर नाथ रेणु के जिनकर साहित्य में अमूल्य योगदान के हम कहियो नै बिसैर सकब, एता हम पाठक के लेल हुनकर संक्षिप्त जीवनी डे रहल छि... 

नाम-  फणीश्वर नाथ रेणुजन्म : ४ मार्च, १९२१।
जन्म-स्थान : औराही हिंगना, जिला पूर्णिया, बिहार, भारत।

हिन्दी कथा-साहित्य के महान रचनाकार अछि। राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभोलक। १९४२ के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एकटा प्रमुख सेनानी की भूमिका निभोलक। १९५० में नेपाली जनता कए राणाशाही के दमन आऔर अत्याचार सों मुक्ति दिलाबै के लेल ओतोका सशत्र क्रांति आ राजनीती में जिवंत योगदान देलक।
१९५२-५३ में दीर्घकालीन रोग ग्रस्तता के बाद साहित्य की ओर हुनकर अधिक झुकाव भेल आ १९५४ में पहिल उपन्यास 'मैला आँचल' प्रकाशित आ  बहुचर्चित भेल।  कथा साहित्य के अलावा संस्मरण, रेखाचित्र और रिपोर्ताज आदि विधाओं में भी ओ लिखलखिन। जीवन के संध्याकाल में राजनीतिक आंदोलन से पुन: लगाव भेल आ पुलिस दमन का शिकार आ जेलों गेल। सत्ता के दमन चक्र के विरोध में पद्मश्री तक के उपाधि के त्याग कए देलखिन।
ई महान रचनाकार के निधन ११ अप्रैल १९७७ के भए गेल हुनकर गेला से सोंसे साहित्य जगत अन्हार भए गेल।
प्रमुख कृतियाँ -
उपन्यास :- मैला आँचल, परती परिकथा, कलंक-मुक्ति, जुलूस, कितने चौराहे, पल्टू बाबू रोड।
कहानी संग्रह :- ठुमरी, अग्निख़ोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप, अच्छे आदमी।
संस्मरण :- ऋणजल-धनजल, वन तुलसी की गन्ध, श्रुत अश्रुत पूर्व।
रिपोर्ताज :- नेपाली क्रांन्ति कथा।

अजब-गजब ये बिहार के पंचायत चुनाव...

बिहार के पंचायत चुनाव हमेशा से ही मिडिया आ लोगेन सबहक लेल अजब-गजब रहल ये. जै गाम जायब वहि गाम में अहाँ के दू चारि टा एहन प्रत्याशी देखईले भेट जायत जे अपना आप में अजूबा होयत अछि।हम सुपौल जिला किशन पुर प्रखंड के शिवपुरी पंचायत के बात कए रहल छि जतौका मुखिया पद के प्रत्याशी अपन गोर में अपन चुनाव चिन्ह के तख्ती लागोने आ हाथ में कनिया के उम्मीदवारी के परचा लेने घूमि-घूमि के वोट मांगि रहल ये आ अपन मंजिल के पाबय के लेल दिन राति एक केने ये। दोसर प्रत्याशी ये सुपौल जिला के सरायगढ़ के ई श्रीमान,लागय ये ई बेर जिला परिषद् पहुँचिये के दम लेत, चुनाव में खर्च जुटावै के लेल ई अपन जमीन बेच देलक ये। आ अपन नैया पार लगाबै के लेल गाम गाम में कोनो निषाद के खोजि रहल ये।
कियो पैसा के जोर पर ते कियो दारू के जोड़ पर जिनका देखियो वहि अपन गाय-माल,खेत-पथारी बेचीं के लागल ये कहुना के ई चुनावी रूपी नैया के पार लगाबै में। ओ बुझै ये की एक बेर जुनी मुखिया बनि जायब ते सोंसे राज-पाट हमरे ये। आ मतदाता के भी कम नै बुझू ओ भी शुसाशन के सरकार में बहुत तेज भए गेल ये, हुनकर कहनाय ये की हम पांच वर्ष तक हिनका बरदास्त केना छि ते हुंकारे छिकार कियाक नै लेब। ओ सब भी जैम के मुखिया आ परिषद् जी के लुटी रहल ये। उदहारण ये सहरसा जिला के पंचायत सोनबरसा के एतोका मुखिया के प्रत्याशी जहिया से नोमिनेशन लेलक ये ओही दिन सों हुनकर द्वार पे मॉंस आ दारु के ते बुझियो भोज भए रहल छैक, आचार संहिता के ठेंगा देखाबई वाला ई प्रत्याशी मस्त भए के लागल ये की जीत ते हमरे होयत, मुदा ऐ प्रत्याशी सबहक ई नै बुझायल ये की आब जनता जागि गेल ये आब ओ दिन लैद गेल जखन नोट पर वोट बिकायत रहे.

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

महाकवि के निधन पर वीरान भेल मुजफ्फरपुर...

मुजफ्फरपुर सुनसान लागि रहल ये जिम्हर देखियो उम्हरे शोक आ शंताप के माहौल ये। अनाथ भए गेल सोंसे देश कियाकि महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शाश्त्री जी के निधन भए गेल। शुक्रवार के हुनकर सम्मान में शोकसभाएं आयोजित कए के श्रदांजलि दए वाला के ताँता लागल रहय।साथ ही साथ सरकार से ओ महाकवि के देशरत्ना से विभूषित करय के मांग जोर पकड़य लागल ये।'ऊपर-ऊपर पी जाते हैं, जो पीने वाले होतें हैं जेइसन अमर पंक्ति से समाज के वंचित लोगेन के प्रति अपन वेदना के उड़ेलइ वाला महाकवि के निधन से भारतीय साहित्य के बहुत पैघ क्षति पहुंचल ये। [055[4].jpg]हुनकर दिवंगत आत्मा के चिरशांति आ दुःख के ई घडी में हुनकर परिजन के धैर्य धारण करय के क्षमता प्रदान करय के लेल इश्वर से प्रार्थना करल गेल।महाकवि के आत्मा के शांति के लेल कैकटा विद्वान् आ नेता हुनकर घोर पहुंचल। महाकवि आचार्य जानकीवल्लभ शाश्त्री जी जन्म 5 जनवरी सन 1916 के औरंगाबाद के मैगरा गाम मे भेल छलन्हि. करीब सत्तर साल पहिने मुजफ्फरपुर अएला के बाद एहिठाम बसि गेलखिन्ह. एहिठाम रामदयालु सिंह कॉलेज,आरडीएस कॉलेज हिन्दी के विभागाध्यक्ष सेहो रहलखिन्ह। हुनकर निधन से सोंसे साहित्य जगत अनाथ भए गेल ये,मुदा उम्र के तकाजा कहियो आ होनी जिनकर बुलावा आबय छैक हुनका जाय से कियो नै रोकि सकय अछि। हिनकर रचना हिनकर प्रसिद्ध रचना मे मेघगीत,अवन्तिका,राधा,श्यामासंगीत,एक किरण:सौ झाइयां,दो तिनकों का घोंसला,इरावती,कालीदास,अशोक वन, सत्यकाम..आदि प्रसिद्ध अछि।
साहित्य जगत हुनकर निधन से अनाथ ते भए ही गेल ये साथ ही साथ हुनकर कमी के साहित्य जगत कहियो पूरा कए सकत की नै, ई एकटा सोचनिये विषय अछि।

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

हम 'पागल' छि...!!

हम 'पागल' छि
ई हम नै लोग कहे ये
ओ समय...!!

जखन हम हास्य छि, कहकहा लगाय के
की खिल जाय ये फुलवारी के सबटा फूल,
आर जखन कानय छि,चीत्कार पारि के
की छलनी भए जाय ये धरती के करेज
ओ समय लोग कहय ये...!!

जखन हम चीकरैत छि,पूरा मोन से
की गुंजाय देब अपन शंखनाद से चारो और
आ जखन हम चुप होए छि
की जेना रुकि गेल होए सांस सगे धरा
ओ समय लोग कहय ये...!!

जखन दौड़ेत छि हम पूरा वेग से
की जीत लेब जिनगी के हरेक रेस
आर जखन थकि के बैस जाय छि
की जेना ख़तम भए गेल ये जिबय की ईक्षा
ओ समय लोग कहय ये...!!

जों गायब-गुनगुनायब
हसब-मुस्कुरायब
चीखब-चिल्लाय्ब 
,रुसल-मनायब
पागलपन ये, ते हम छि
जे लोग कहय ये...!!

गुरुवार, 7 अप्रैल 2011

नहाय खाय आय शुरू भए गेल ये छ्ठी के तैयारी ...

शुरू भए गेल ये छैठक तैयारी आय ये नहाय खाय।सब व्रती अपन-अपन तयारी में लायग गेल ये आस्था के ई महान पर्व के लेल। मिथिलाक संस्कृति में लोक आस्था के महापर्व छठ के बहुत पैघ स्थान अछि। ओना ते कार्तिक मास में होए वाला छठ में लोगेन सबहक खूब उत्साह देखल जाय ये  मुदा चैती छठ करय वाली व्रतियो के कोनो कमी नै ये,हुनको संख्या दिनक-दिन बढ़ल जाय अछि। नहाय-खाय से पहिलुक दिन बाजार में सूप-डगरा से लए के  नारियल आ भांति-भांति के पूजन सामग्री किनय के लेल उमड़ल व्रति के भीड़ एहि गोप बताय रहल रहें की लोग में श्रद्धा दिन प्रतिदिन बढ्लें जाय रहल ये। बांसक बनल डगरा साठ से नब्बे टका जोड़ा बिक रहल ते  सूप की कीमत तीस से पचास रुपये प्रति जोड़ा बिक रहल ये। आ दौरा के दाम ते ई बेर चोकां देलक ये एकर कीमत  एय बेर अस्सी से सौ रुपया पीस बिकी रहल ये। नवरात्र होये के बावजूद नारियल के दाम सामान्य ये मुदा नहाय-खाय के लेल कद्दू बीस से तीस रुपये किलो तक बिक रहल ये  लेकिन आस्था के लेल एकर कोनो महत्त्व नै ये।

बुधवार, 6 अप्रैल 2011

एक बेर फेर देश के लेल शहीद भेल मिथिला के लाल...

एक बेर फेर देश के लेल शहीद भेल मिथिला के लाल...
हम बात कए रहल छि असम के जतय सहरसा जिलाक  भरौली गाम के सीआरपीएफ के जवान  देवेन्द्र कुमार साह कार्यरत रहथीन। आ असम में  मुठभेड़ के सामना करय में सहीद भए गेलय। हुनकर नाम आब  मिथिला के ओ इतिहास में अमर भए गेल जे कर्तव्य के वेदी पर अपन जान के बलि देलक ये। एता हम अहन के बता दी सहरसा जिला मिथिला के वही जिला ये जतय रमण कुमार झा सेहों जनमल अछि जे  कारगिल युद्ध के दौरान देश के लेल अपन जान कुर्बान कए देलक रहें। मिथिला के धरती आय ओ नाम से भरल अछि जे देश हित के लिए अपन जान के बाजी लगाबय में पीछा नै रहय अछि।मुदा ई घटना के देख के ते हमार फणीश्वर नाथ रेनू के ओ कविता याद आयब गेल..."मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश नावाने जिस पथ जाते वीर अनेक".

सजनी अहाँ किया...

सजनी अहाँ किया तमसाय छि
हमर मोन के किया भरमाय छि,
घोरक गोप के चौबटिया पे आनि के
हमर दिल के किया तङपाय छि...!!
सजनी अहाँ किया...
कानक बाली काशी से
दुमका सा झुमका आनलों,
माँगक सितफूल ले सजनी
अहाँ किया गरमाय छि...!!
सजनी अहाँ किया...

सितफुल आनि देब
गजरा आनि देब
ठोरक लाली कजरा आनि देब
आनि देब नौलखा हार ये,
सजनी अहाँ नै तमसाबू
घुमsयो लाय जाब बाज़ार ये
आब ते एक बेर मुसकियो सजनी
हिरदय कियाs पथराय छि...!!
सजनी अहाँ किया...

सोमवार, 4 अप्रैल 2011

हिंदू नववर्ष विक्रम संवत २०६८, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की हार्दिक शुभ मंगलकामना...

समस्त मैथिल आ मिथिलांचल के मिथिला मंच के तरफ से हिंदी नव वर्ष के हार्दिक शुभकामना।साथ ही साथ नवरात्री के मंगलमय शुभकामना,हम मिथिलामंच के तरफ से समस्त मिथिलांचल, मैथिल आ देश विदेश में जतेक भी मैथिल बसल ये हुनकर स्वास्थ,सुख आ समृधि के माँ भगवती से कामना करैत छि। आशा ये की अहाँ सबहक़ जीवन में ई साल नबका उमंग भरे।

Hindu New Year

हिंदी नव वर्षक के अखनो धैर उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, बिहार, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा आओर महाराष्ट्र में मान्यता दैत अछि। मुदा हम सब ग्रोगेरियन यानी अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार अपन काज धंधा करैत छि। ई बेर हिंदी वर्ष २०६८ अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार दिनांक 4 अप्रैल, 2011 के पडल ये। ई दिन मूल रूप से चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, अमावस्या में चैत्र माह के बाद के दिन के मानल जाय ये। हिंदी नव वर्षक कलेंडर चंद्र-सौर प्रणाली के अनुसार काज करय ये। जाही कारन अखनो धैर हम सब सूर्योदय आ चंद्रोदय के सटीक भविष्यवाणी कs सकय छि।
चैत्रक नवरात्रि या बसंतक नवरात्रि, नव वर्ष के पहिल दिन से शुरू होयत ये. ई नवरात्रि श्री राम नवमी पे समाप्त होए ये. जकरा श्री राम नवरात्र के रूप में जाने जाय ये।

शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

चलू प्रियतम लौट चली अपन गाँव...

चलू प्रियतम लौट चली अपन गाम में
ओही पिपरक ठंडा छाँव में
जतय रोटी छोट होयत अछि
मुदा हिरदय बड़ पैघ.

रोटी के दुई टुकड़ा कए के
आधा-आधा खाइत
आ लोटा भैर पैन पी के
लैत रहिये तृप्त ढकार

जमीनक बिछौना आ आकाशक ओढना सों
जतय सुतय छलिये पैर पसार
आ भा जायत छलिये
मिठ्गर स्वप्न सों द्वि चार

चलू मीत अपन वैsह ठाम
जतय पहुनक आबे से पाहिले
घोरक टांट आ दलानक मचान पर
कौआ करैत छै कांव-कांव

चलू प्रियतम लौट चली अपन गाम...

आ एता शहर में...


रोटी ते पैघ भेटय छै
मुदा मन बड़ छोट
मनुख ऊपर से व्यवहारिक अछि
आ भीतर सा बड़ ओछ

पाय के हाय-हाय अछि
एते जरुरत पर भेट
नै ते बाय-बाय अछि

एते प्रेम नै व्यापर अछि
एते शिक्षा नै अत्यचार अछि
सभ्य झलकैत छै सब
मुदा संस्कार नै अछि

चलू फेर ओही चोपाल में
हसी ठिठोली से जतय मिल के
गीत गबैत भजन गबैत
आ घंटो घोप हाँकैत

जतय देखे नै पडैत अछि
तुरते तुरत घड़ी
समय रुक जायत अछि जतय
सुख-दुःख बांटेईत भाव में

स्वर्गो के नज़ारा फीका अछि

जतय गामक मिठका पोखैर में
आबू सैर करब दुनू गोंटा
मिलकए ओतय नाव में

चलू प्रियतम लौट चली अपन गाँव...