रविवार, 27 मई 2012

अखिल भारतीय मिथिला संघक तत्वावधानमे आयोजित मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह २०१२ / २० मई २०१२ क प्रस्ताव (रिपोर्ट- अमरनाथ झा)



अखिल भारतीय मिथिला संघक तत्वावधान मे आयोजित मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह - २०१२ के सफल बनेबाक हेतू कोटि - कोटि धन्यवाद...कार्यक्रम अत्यंत सफल रहल. श्रीमति शीला दीक्षित, मुख्यमंत्री दिल्ली, श्री प्रभात झा, राज्य सभा सांसद, श्री महाबळ मिश्र सांसद दिल्ली, श्री गौरी शंकर राजहंस, पूर्व सांसद, डॉक्टर एस सी एल गुप्ता, विधायक , श्री अनिल कुमार शर्मा सी एम डी आम्रपाली समूह, श्रीमति पूनम झा आजाद, डॉक्टर संजीव मिश्र आदिक गरिमामयी उपस्थिति रहल. स्वागताध्यक्ष डॉक्टर संजीव मिश्र के मिथिला वर्णन आ मिथिला शब्द विन्यास के अर्थ वास्तव मे अतुलनीय, रोचक आ ज्ञान वर्धक छल... 
 मुख्य मंत्री बजलीह जे मिथिला के लोकक कारण स दिल्ली बेसी सुंदर आ संवारल लागैत छैक. ओ ईहो बजलीह जे हुनको मैथिली भाषा बड्ड निक लागैत छैन....श्री प्रभात बाबू गाम स जुरल राह्बा पार जोर देलाह आ संगही हुनका स प्रेरणा भेटल जे एकटा सामान्य व्यक्ति केना अप्पन योग्यता आ नीक विचार के बल पर कतौ अप्पन स्थान बना सकैत अछि, हमरा सभ मैथिलक लेल प्रेरणा श्रोत अछि. 
श्री अनिल कुमार शर्मा जी आम्रपाली समूह के सी एम् डी, कहलाह जे मिथिला भवन के निर्माण में अप्पन पूरा सहयोग देताह, डॉ एस सी एल गुप्ता विधायक संगम विहार सेहो विश्वास दियेलाह जे ओ श्री अनिल कुमार शर्मा जीक संग मिथिला भवनक निर्माण में सहयोग करताह. श्री गौरी शंकर राजहंस जी, श्री राम कुमार झा एवं श्रीमति पूनम झा आज़ाद के संबोधन सेहो अनुकरणीय छल. 

मिथिला के किछु गणमान्य व्यक्तित्व के मिथिला विभूति सम्मान स' सम्मानित कयल गेल. आ नव निर्वाचित मैथिल पार्षद के सेहो सम्मानित कयल गेल.  
सभ अतिथि के मखान, पाग, दुपट्टा, पुष्प-हार आदि स स्वागत कयल गेलनि.  
अतिथि सभक संबोधन में विलम्ब होयबाक कारण स रंगारंग कायर्क्रम सेहो विलम्ब स प्रारम्भ भेल परिणामस्वरूप कतेको कलाकार अप्पन प्रस्तुति देबा स वंचित रहलाह परन्तु ३ घंटा के लगभग जे कार्यक्रम चलल से झम्कौआ छल. बहुत श्रोता लोकनि के चल गेला तक कार्यक्रम चलैत रहल आ बादक से कार्यक्रम छल से वास्तव में सुने आ देखे वाला छल. मुख्य कलाकार में छलाह/छलीह : श्री विपिन मिश्र, श्री पवन नारायण झा, श्री अमोध झा, श्री मिथिलेश झा, श्री सुनील पवनजी, श्रीमती रश्मिरानी, कुमारी अंशुमाला, कुमारी जुली झा, श्री सुधानंद झा आदि...  
कुल मिला क अपने सबहक सयहोग आ आशीर्वाद स कार्यक्रम सफल रहल. अपने सबहक अहिना समर्थन रहत त अप्पन मिथिला आ मैथिली के दशा आ दिशा भेटत जाहि सा अप्पन सबहक पहचान विशिष्ट होयत.  
सतत एही अभिलाषाक संग अपनेक  

अखिल भारतीय मिथिला संघ
चित्र श्री अमरनाथ झा
























Amarnath Jha with arvind paswanji and roshan ji...
























Shubh Narayan Jha











Delhi Chief Minister Shaeila Dikshit




























Add caption












































































१
अखिल भारतीय मिथिला संघक तत्वावधान मे आयोजित मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह - २०१२
कार्यक्रमक रूप रेखा 
२० मई २०१२, ४ बजे अपराह्न स' रात्रि १० बजे तक मावलंकर सभागार, रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली

४.०० बजे : मुख्य एवं विशिष्ट अतिथि सभक आगमन
 ४.०५ बजे : कार्यक्रम के प्रस्तावना
 ४.१० बजे : मंगलाचरण एवं भगवती वंदना (जय जय भैरवी.....)
४,१५ बजे : दीप प्रज्ज्वलन सभ अतिथि द्वारा
४.२१ बजे : कवि कोकिल विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण
 ४.३० बजे : स्वागताध्यक्ष द्वारा स्वागत भाषण
 ४.३५ बजे : महासचिवक प्रतिवेदन
४.४० बजे : भाषण- श्री हुक्र्मदेव नारायण यादव, सांसद
४.४५ बजे : भाषण- श्री कीर्ति झा आज़ाद, सांसद
 ४.५० बजे : भाषण - श्री महाबल मिश्र, सांसद
४.५५ बजे : भाषण - डॉ गौरी शंकर राजहंस, पूर्व सांसद एवं राजदूत
५.०० बजे : भाषण - श्रीमति मृदुला सिन्हा, पांचवां स्तम्भ
५.०५ बजे : भाषण - डॉ निशिकांत ठाकुर, दैनिक जागरण
५.१० बजे : भाषण - डॉ अनिल कुमार शर्मा, सी एम डी, आम्रपाली समूह
५.१५ बजे : भाषण - डॉ एस सी एल गुप्ता, विधायक, दिल्ली
 ५.२० बजे : भाषण - श्री अनिल झा, विधायक, दिल्ली
 ५.२५ बजे : उदघाटन भाषण - डॉ प्रभात झा, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश बीजेपी, एवं राज्य सभा सदस्य
 ५. ३५ बजे: सम्मान समारोह- श्रीमति शीला दीक्षित, मुख्यमंत्री दिल्ली
६.०० बजे स' : रंगारंग कार्यक्रम
१०.०० बजे: धन्यवाद ज्ञापन
१०.०५ बजे : कार्यक्रम के समाप्ति

२

अखिल भारतीय मिथिला संघक तत्वावधान मे आयोजित मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह - २०१२

२० मई २०१२ क प्रस्ताव
१. दिल्ली में मैथिली अकादमी के अलग/स्वतंत्र कायल जाय
२. मैथिली पत्र- पत्रिका द्वारा मिथिली साहित्यक विकास हो
३. दिल्ली विश्वविद्यालय एवं जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय मे मैथिली संभाग के स्थापना
४. बाबा नागार्जुन, स्व. भोला पासवान शास्त्री एवं अमर शहीद स्व. ललित नारायण मिश्र के नाम पर दिल्ली में सड़कक नामकरण
५. भारत सरकारक प्रत्येक मंत्रालय में मिथिली पत्र-पत्रिका के खरीद हेतु प्रावधान हो
६. दूरदर्शन एवं आकाशवाणी में मैथिली संभाग के गठन ७. भारतीय मुद्रा (करेंसी नोट) मिथिलाक्षर मे रूपया (टाका) लिखल जाय.
८. दिल्ली -जयनगर दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन चलोल जाय.
९. मिथिला के प्रत्येक रेलवे स्टेशन पर मिथिलाक्षर मे स्टेशन के नाम लिखल जाय.

३
आमंत्रण-पत्र



बुधवार, 18 अप्रैल 2012

बोधिसत्व क कविताक मैथिली अनुवाद

बहुचर्चित कवि बोधिसत्व क एही कविता एकटा ब्लॉग पर पढने छी ( नाम याद नै आबि रहल अछि), एतेक नीक लागल जे एकर मैथिली अनुवाद करय लेल विवश भए गेलहुं। अहूँ पढू किछु सोचय पर विवश के दैत एही कविता अहाँक.

दशरथ केर एकटा बेटी छलीह,
नाम छलीह शांता
लोग कहैत अछि
जहिया ओ जनमल छल
अयोध्या मे अकाल पडल
बारह बरख तक
धरती धुल भए गेल!

चिंतित राजा क सलाह देल गेल
की हुनकर बेटी अछि एही अकाल क कारण!

राजा दशरथ अकाल दूर करबाक लेल
श्रृंगी ऋषि क दान दए देलक अपन बेटी!

ओकर बाद शांता
कहियो नै आयल अयोध्या
लोग कहैत अछि
दशरथ डरैत रहे
हुनका बजाबै स!

बहुत दिन तलक सुन रहल अवध क आँगन
फेर ओही शांता क पति श्रृंगी ऋषि
दशरथ क करेलक पुत्रेष्टि यज्ञ!

दशरथ बनल चारि टा बेटा क बाप
संतति क अकाल मेटा गेल!

शांता बाट तकैत रहे
अपन भाई सबहक
मुदा कियो नै आयल हुनकर अंगना
नै हुनका आनय लेल
नै हुनकर हाल जानय लेल


मर्यादा पुरूषोत्तमो नाञ,
शायद ओ सेहो डरैत रहे
रामराज्य मे अकाल पड़य स
जबकि बन जाएत काल
राम
शान्ता क आश्रम से भए क गुजरल रहे
मुदा भेंट करय लेल नै गेल


शांता जखैन तक छलीह
बाट तकैत रहलीह अपन भाई क
की आयत राम-लखन
आयत भरत-शत्रुघ्न

बिना बुलावा क आबय लेल
ओ राजी नै छल
कियाकि सती क कथा ओ
ओ सुनि चुकल छल बचपन मे
दशरथ से!

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

निबंध प्रतियोगिता



निबंध प्रतियोगिता



दिल्ली सँ प्रकाशित मासिक मैथिलि पत्रिका मिथिलांचल पत्रिका के द्वारा कक्षा ८ सँ ल के बी.ए/बी.एस.सी/ बी.कॉम/इंजीनियरिंग /चिकित्सा विज्ञानं के छात्र हेतु एकटा निबंध प्रतियोगिता रखल गेल अछि .
निबंध के विषय :- "मातृभाषाक माध्यम सँ विज्ञानं एवं प्रोद्योगिकी के शिक्षा कतेक सार्थक अछि "
जाही में प्रतिभागी हेतु नियम :-
१. कक्षा ९ सँ - स्नातक तक के छात्र भाग लय सकैत छथि
२. उम्र सीमा - १२ वर्ष -२२ वर्ष
३.रचना मौलिक हेबाक चाही एवं स्व लिखित हेबाक चाही
४.आलेख मैथिलि भाषा में हेबाक चाही
५.रचना पठेबक अंतिम तिथि - २५ मार्च २०१२
६. प्रतिभागी लोकनि अप्पन आलेख mithilanchalpatrika@gmail.com
या B-2/333 Tara Nagar, Old Palam Road Sec-15 Dwarka New Delhi-110078. पर पठाबी
७. आलेखक संग अप्पन परिचय एवं पत्राचारक पता अबश्य पठाबी
८. विशेष जानकारी हेतु संपर्क करी Mob -9990065181  /  9312460150  / 09762126759.

निर्णयाक मण्डली में छैथि :- १.डॉ. कैलाश कुमार मिश्र २.डॉ. प्रेम मोहन मिश्र ३. श्री गजेन्द्र ठाकुर ४. डॉ. शशिधर कुमार
पुरस्कार :- निबंध प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागी के समुचित पुरस्कार राशी एवं प्रमाणपत्र पठौल जाएत

भबदीय
डॉ. किशन कारीगर
(संपादक ) मिथिलांचल पत्रिका

मंगलवार, 6 मार्च 2012

आयल होली

आयल होली
सजल टोली
बनल पुआ
छनल पूरी

भाँगक गोली
होलिबा टोली
फगुआ फाग
विरहा बोली

भीजल साडी
भीजल आँगी
रंगल धोती
भीजल चोली

हरका साड़ी
रंगल नारी
गाँजा आ भाँग
दारू आ ताड़ी

भैया आ भौजी
सखी सहेली
सब छै मस्त
जीजा आ साली

आयल होली
सजल टोली

गुरुवार, 1 मार्च 2012

चाय के चुस्की मुस्की के संग – अजय ठाकुर (मोहन जी)


विजय जी और रंजना के प्रेम बिवाह किछु माह पहीले भेल अछि ! दुरागमन सेहो संगे भऽ गेल किछु दिन के बाद विजय जिक कनियाँ रंजना कहलखिन, हमरा बिवाह के दु माश भ गेल और अखन तक आहा हमरा कतो घुमाव नहीं ल गेलो हन्!  
विजय जी किछु देर चुप रहला और फेर बजला हे हमरा जावेत धरी माँ और बाबुजी नहीं कहता तावेत तक हम आहा के कतो घुमाव नहीं ल जायब बुझलो ! रंजना के मोन कने उदाश भ गेल फेर दुनो गोटे अपन अपन कॉज में लागी गेला ! विजय जी फेर रंजना के समझा क ओ अपन बाबु जिक पास गेला और कहलखिन जे रंजना के इच्छा भ रहल छै जे कतो घुमे लेल जय के से जओ आहा के आज्ञा होय त हम दुनो गोटे घुमी आबि ! बाबु जी हाँ कही देलखिन !

विजय जी और रंजना यात्रा केरी तयारी शुरू क देला ! दुनो प्राणी माँ बाबुजी के आशीर्वाद लेलाह और घर सऽ निकैल गेला ! सकरी टीसन पर जा क टिकट कटेला ताबैत धरी शहीद एक्सप्रेस सेहो टीसन पर आबि गेल दुनो गोटे गाड़ी पर जाकऽ बैसी गेला ! आब गाड़ी के ड्राईवर बाबु सेहो पुक्की मारला पु....पु..पुपुपुपुपुपू....छु..क.. छुक..छुकछुक  छुक..., गाड़ी आगू बढ़ऽ लागल !

गाड़ी जहान पांच-छः टीसन आगा बरहल ताहि के बाद एकर लेन किलयर नहीं छल ताहि लक् गाड़ी के २-३ घंटा रोकी देलक ! ताबैत में ओमहर सऽ चाय वला गर्म चाय-गर्म चाय कहैत आयल रंजना अपन स्वामी के कहैत छथि एक कॉप चाह पीबी लिय आहा भोर में सेहो नहीं पिलो आब विजय जी दु कॉप चाह के पाई देलखिन और दुनो गोटे पिबऽ लगला ! रंजना दु घुट पीब क खिड़की स बाहर फेक देलक, विजय जी पुछलखिन कि भेल ? रंजना कहलखिन चाह में स्वाद नहीं लगाल !
विजय जी कहलखिन ठीक छै गाड़ी लेट या चलू उतरी क कोनो दोकान पर चाह पीबी लई छी, दरभँगा में ओनाहू जान-पहचान के बहुत दोकानदार अछि ! विजय जी और रंजना दोनों गोटे गाड़ी स उतरी क दोकान दिश बढला ! एक दोकान पर जा क दु टा चाह और दु टा सिंघारा के आर्डर देलखिन ! थोरबे देर में चाह और सिंघारा लक् आबि ग्लेन दुनो गोटे सिंघारा पावऽ लगला और चाह सऽ ठोड़ पकावऽ लगला ! रंजना चाह पीबी कने मुस्किया देलखिन आब दुनो गोटे अपना आप में टकटकी लगा क देखऽ लगला और बिशैर गेलखिन कि हमरा गाड़ी पकरबाक अछि!

लगभग आधा घंटा के बाद दोकानदार अपन कप लै आयल त देख क कह: लागल अऊ जी महराज लिय चाय के चुस्की मुस्की के संग, मगर हमर कप त छोरी दिय औरो ग्राहक चाय के लेल ठाढ या ! ई बात सुनी क रंजना और विजय के मोन लज्जा गेलैन और ओत् स परेलो बाट नहीं सुझलैन ! और ओ जे टीसन पर अयला त देखैत छथि जे ओ गाड़ी फुजी गेल छल आब दुनो गोटे अपना घर आबि गेला ! माँ और बाबुजी पुछलखिन कि आहा दुनो गेलिये नहीं, विजय जी बजला बाबुजी गाड़ी हमर छुइट गेल त हम दुनो गोटे सोचलो कि बाद में कहियो चली जायब ! बाबुजी बजला अत्ति उत्तम जे विचार हुये से करू !

रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)