गुरुवार, 19 जून 2014

DAHEJ MUKT MITHILA SMARIKA -2014

स्मारिका विमोचन समारोह संपन्न- 
   महादेव केर असीम अनुकम्पा सँ 'दहेज मुक्त मिथिला - स्मारिका २०१४केर विमोचन समारोह भव्यतापूर्वक सम्पन्न भेल। प्रमुख अतिथि मिथिला-मैथिली केर सर्वश्रेष्ठ पुरोधा सम्माननीय डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजु द्वारा स्मारिकाकेर विमोचन कैल गेल। 
समय सँ शुरु भेल कार्यक्रम केर अध्यक्षता संस्थाक संरक्षक पं. धर्मानन्द झा द्वारा कैल गेल आ तहिना सौराठ सभागाछी मे संरक्षक डा. शेखर चन्द्र मिश्र द्वारा स्वागत संबोधन कैल गेल। संस्थाक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पंकज झा स्वयं मंच संचालन केलैन। संस्थाक महाराष्ट्र अध्यक्ष दहेज मुक्त मिथिला अभियान पर प्रकाश दैत भविष्य योजना केँ सभामे प्रस्तुत कयलनि। सुप्रसिद्ध गायक श्री पवन नारायण द्वारा गोसाउनि गीत सँ प्रारम्भ भेल सभा केर बीच-बीच मे मिथिला-महिमा-गान सहित किसलय कृष्ण द्वारा अस्मिता-बोध जागृति हेतु कविता पाठ कैल गेल। 
संस्थाक उद्देश्य प्रति पूर्ण समर्पण आ १०८ टा दहेज मुक्त विवाह करेबाक संकल्पित व्यक्तित्व पत्रकार श्री राजेश मिश्र द्वारा दहेज मुक्त मिथिला केर अभियान संचालन तथा ओहि सऽ प्रेरणा लेबाक बात सभा मे राखल गेल। संगहि ओ आह्वान करैत कहलनि जे कलमजीवी पत्रकार पर बड पैघ जिम्मा होइत छैकओ सब चाहता तऽ कूरीति जरुर भागत। बस हिम्मत करैत दहेजखोर सबहक विरोध करैत कानून-प्रशासन केँ संविधान अनुसार चलबाक लेल बाध्य केनाय छैक। 
समारोह मे विशेष उपस्थिति भारतीय काँग्रेस केर वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता श्री ज्योति रमण झामधुबनी जिला परिषद् केर उपाध्यक्ष श्री भरत भूषणजिला पार्षद श्री सिंह जीसाहित्यकार श्री सदरे आलममैथिली दर्पण केर संपादक श्री कृष्ण कुमार झा 'अन्वेषक', मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री श्याम सुन्दर झाकान्तिपुर दैनिक नेपाल केर विशेष संवाददाता तथा अतिथि श्री अवधेश झाउज्यालो दैनिक नेपाल केर विशेष सहयोगी संवाददाता व अतिथि श्री जितेन्द्र ठाकुरदहेज मुक्त मिथिला अभियान केर प्रथमहि दिन सँ सहयोग कयनिहार भास्कर झा (नेपाल)महाराष्ट्र दमुमिसँ आयल श्री सुभाष मिश्रश्री राजेश रायश्री सुबोध ठाकुरदिल्ली सँ कौशल कुमारसाहित्यकार कवि पंकज सत्यम्बिठौली सँ सुभाष रायजटाशंकर राययुवा मैथिल अभियानी अंकित राय सहित विभिन्न हस्ती लोकनि एहि समारोह मे भाग लेला। स्थानीय वक्ता-विद्वान केर सेहो सहभागिता नीक रहल। देल्ही सं  मदन कुमार ठाकुर  जी  सेहो बहुत शारारिक योगदान  देला , सुरुवात सं  जे  लागला फोटो खिचाय आ वीडियो  रिकॉर्ड  कराइ  में पूर्ण रूपे अपन  कर्तब्य निभेला | ,

  
  संपूर्ण कार्यक्रम मे एकमात्र निष्कर्ष 'सौराठ घोषणापत्रकेर निर्माण करय लेल सहायक भेल जे: 
    "
संपूर्ण मिथिला सँ एहि कूरीति केँ भगेबाक लेल जागृतिमूलक कार्य साविककाल सँ होइत रहल वैवाहिक सभास्थली पर एहि संस्था द्वारा क्रमश: आयोजन करैत गाम-गाम मे निगरानी समिति बनाओल जाय। दहेज मुक्त विवाह करनिहार केँ स्मारिका तथा विभिन्न मिडिया द्वारा यशगान करैत प्रोत्साहन कैल जाय। जेना सिया केर विवाह लेल शिवधनुष भंग करयवला दूलहा वरण करबाक कठोर संकल्प छलकिछु तहिना आजुक मैथिल ललना धिया सिया लेल सेहो 'बिन माँगरूपी दहेजक दूलहावरण करबाक संकल्प लेल जाय। शिक्षा व सुविधा बेटा तथा बेटी केँ एकसमान देल जाय। आपसी सहयोग बढबैत मिथिला समाज केँ परिष्कृत बनेबा मे दमुमि केर अभियान प्रति समर्पित सहयोग देल जाय।"
अध्यक्षीय भाषण मे पं. धर्मानन्द झा द्वारा अभियानक उत्कर्ष तथा एकर लाभ बारे निजी अनुभव केर बखानक संग सौराठ सभा स्थित माधवेश्वरनाथ महादेव मन्दिरक जीर्णोद्धार लेल सदिखन तैयार रहबाक बात कहल गेल। तदोपरान्त प्रवीण केर धिया-गान तथा पुन: पवन नारायण केर समदाउनि सँ कार्यक्रम केर समापन कैल गेल। 

        स्मारिकामे एहि बेर मूलत: आलेखमूलक संग्रहक संग ३ वर्ष यात्रा वृतान्त तथा भविष्य केर योजनाकेँ समेटल गेल अछि। बहुत कमहि समय मे प्रतिकूल परिस्थिति रहितो स्मारिका प्रकाशन केर कारण वैयाकरणिक अशुद्धि टाइपिंग-एरर सँ छूटि गेल अछि। बहुतो परिवारक विवरण अन्तिम समय मे समुचित फाइल मे प्राप्त नहि होयबाक कारणे एहि बेरुक स्मारिका मे स्थान देब छूटि गेलऐगला अंक मे वा एकर पुन:संस्करण मे सेहो समेटल जा सकैत अछि। मनवचन आ कर्म सँ एकता रखैत संकल्पित अभियानी बनि दहेज मुक्त मिथिला द्वारा आइ धरिक समस्त आयोजन कैल गेल अछि। समस्त सहयोगी प्रति आभार प्रकट करैत हम प्रधान संपादक प्रवीण सबकेँ फेर सँ धन्यवाद ज्ञापन करैत छी। आशा करैत छी जे भविष्य मे एहि तरहक ऐतिहासिक कार्य आरो भव्यता संग कैल जायत।
जय मैथिल जय मिथिला जय  जय दहेज़ मुक्त परिवार





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गुरुवार, 23 जनवरी 2014

मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय

          सब स पहिने दिल्ली कार्यक्रम के ले तमाम मिरानीसे सेनानी के हार्दिक शुभकामना, मिथिला राज्य के लेल प्रयास जाहि स्तर पर मिरानीसे द्वारा सम्भव अछि शायद कोनो दोसर मंच सा सम्भव नहीं अछि, पिछला एक दू साल में जे कोनो कार्यक्रम, जन जागरण और धरना प्रदर्शन वा नेतागण नेतागण संग भेट वार्ता काबिलेतारीफ छल।

      आई मिथिला नहीं सम्पूर्ण देश और विदेशो में भी अलग मिथिला राज्य के मांग (मिरानीसे) द्वारा जे उठाओल जा रहल अछि से चर्चित अछि, संगहि एक टा बात (जे गंभीर अछि) जन समर्थन, और एक आवाज पर इकठ्ठा भेनाई महत्वपूर्ण अछि (उदाहरण : - जाई जगह जगह पर अपन मिरनिसे कार्यकर्ता प्रदर्शन करबाक लेल इकठ्ठा भेल डेल्ही पुलिस द्वारा हटा देल गेल और देश के सब स महत्वपूर्ण जगह पर १४४ के बाबजूद दिल्ली c. m द्वारा अपन समर्थक संग दू दिन तक भांगरा के कार्यक्रम भेल से पूरा देश देखलक और संगहि पुलिस और तमाम केंद्र सरकार के मंत्रीगण सेहो सहभागी भेल, कारण - धरना कोनो पार्टी प्रायोजित छल ताई लेल केंद्र सरकार सेहो अपन वोट के खातिर उपयुक्त कार्यवाई करय में हमेशा बचय के कोशिश कयलक) मतलब साफ अछि जे अगर धरना प्रदर्शन राजनीतिक होयत त सरकारो गम्भीरता स एक्शन लई छै ओना अगर कोनो आम धरना होयत ता याद आबैत अछि (बाबा रामदेव के रामलीला). अलग मिथिला राज्यक मांग शायद ही कोनो पार्टी एखुनका परिदृश्य में पूर्ण रूपेण समर्थन करत।
            भाजपा सांसद कीर्ति झा जी द्वारा समर्थन स्वागत योग्य अछि, 

एक टा सुझाव/निवेदन/जनाकांक्षा … जे किया नै मिरनिसे के एक राजनीतिक रूप देल जाय लगभग सब पदाधिकारी (मिरानीसे के) एक जन प्रतिनीधि के हिसाब सा कार्यरत छि और संगहि राजनीतिक परिवेश स छि ज्यादा तकलीफ नहि होयबाक चाही कारन राजनीतिक पार्टी के अपन एजेंडा होयबाक चाही जे मिरनिसे के जन्म एक महत्वपूर्ण विषय के पूरा करबाक लेल भेल अछि (अलग मिथिला राज्य) ई प्रमुख मुद्दा होयबाक चाही जन समर्थन जरूर जरूर भेटत। जमीनी स्तर पर हर मैथिल के अई संग्राम में सहभागिता लेल उत्साहित करबाक जरुरत अछि संगहि मिथिलांचल के हरेक गाव और शहर में सदस्यता अभियान चलेबाक जरुरत अछि.
         
           ओना बिना राजनीतिक भेने सेहो सफलता भेटइ छै मुदा शनैः शनैः (एक बात और अगर झारखण्ड, विदर्भ, तेलंगाना, पूर्वांचल या और कोनो राज्यक मांग गैर राजनीतिक होईत त शायद अहि पर कार्यवाई सम्भव नहीं छल, झारखण्ड, तेलंगाना बनी गेल शीघ्रहि विदर्भ और उ.प में सेहो छोट - छोट राज्य बनी जायत कियाक ता हर पार्टी अपन नफा नुकसान देखति कार्यवाई करैत अछि से त आहाँ सभ लोकनि ज्यादा समझदार/जानकार छी). 

अंत में - उपरोक्त विचार किछु ग्रामीण जनमानस और हमर अपन अछि हमर विचार स अगर किनको तकलीफ या ठेस पहुँचनि त हैम क्षमाप्रार्थी छी। — 

सोमवार, 20 जनवरी 2014

बस एक मात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य होई संबिधान में.

जय मिथिला 
जय मिरानिसे
        

बस एक मात्र संकल्प ध्यान में , मिथिला राज्य होई संबिधान में.

   मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित राष्ट्रिय संगोष्ठी में अपन उपस्थिति देनिहार हर मिथिला प्रेमी भाई बहिन के बहुत धन्यवाद। अपने सब के उपस्थिति इतिहास बनेलक। आगू और सक्रिय सहयोग के अपेक्षा मिरानिसे राखैत अछि।
कार्यक्रम के दू सत्र में नियोजित कैल गेल छल। प्रथम सत्र मिरानिसे के सांगठनिक संबोधन स सम्बंधित छल। 


मुंबई,गोहाटी,नेपाल और मिथिला क्षेत्र स आयल मिरानिसे के सदस्य अपन बात रखला। सब के केवल एक आवाज-हमरा चाही मिथिला राज। मिरानिसे स सहयोग केनिहार जे बहुत भाई किछु अपरिहार्य व्यस्तता के कारण नै आबि सकला हुनको आभासी उपस्थिति रहल।

   द्वितीय सत्र मिथिला राज्य के मुद्दा पर राजनीतिक एकीकरण लेल राखल गेल छल। दलगत भावना स ऊपर उठि के मिथिला राज्य लेल अपन प्रतिबद्धता सुनिश्चित करबाक समय मिरानिसे हर दल स सम्बद्ध राजिनितिग्य के देलक। इ कठोर सत्य अछि जे आमंत्रित वक्ता में स केवल बीजेपी के सांसद और विधायक गण न केवल अपन उपस्थिति दर्ज करेला बल्कि पुरजोर तरीका स मिथिला राज्य मांग के समर्थन केला। कांग्रेस ,राजद ,जेडीयू स गछ्ला बादो वक्ता नै आयला। निर्दलीय सदस्य पप्पू यादव सेहो सत्र के संबोधित केला। एहेन सांकेतिक घटना के बादो मिरानिसे अपन सूत्र वाक्य - समर्थन द रहल व्यक्ति के समर्थन आ विरोध क रहल व्यक्ति के विरोध - स एखन धरि सटल अछि।

   
 आदरणीय प्रभात झा जी आन्दोलन के लेल हर तरहक सहयोग देबाक वचन देला। भाई कीर्ति झा आज़ाद त मिथिला राज्य के लेल सदैव अपना स्तर स कार्य क रहला है। पुनः अपन जोशगर उदबोधन स नव उर्जा के संचरण केला। भाई गोपाल ठाकुर( विधायक बेनीपुर) ,भाई संजय सरावगी( विधायक दरभंगा शहरी) और भाई संजीव झा ( पूर्व विधायक सहरसा) सब तरहक सहयोग के वचन देला और कार्यक्रम के अंत तक रहि मिरानिसे के मान बढौला।

     

शेफालिका जी और कुमुद जी द्वारा सेहो मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के दौरान मैथिली पुस्तक प्रदर्शनी के सेहो व्यवस्था छल। मिरानिसे के नवीन वेबसाइट mrns.in के सेहो लोकार्पण भेल। मधुबनी जिला परिषद् सदस्य भारत भूषण जी, बिजय झा भोला भाई आ मो. कलीम भाई द्वारा मिथिला राज्य के समर्थन कैल गेल।
कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत जय जय भैरवि के सामूहिक गायन और समाप्ति वन्दे मातरम द्वारा कैल गेल।

पुनः सब के कोटिशः धन्यवाद। जय मिथिला जय मिरानिसे

बुधवार, 11 दिसंबर 2013

Mithila Against BIHAR

 बीते 100 सालोँ मे मिथिला के प्रति बिहार का रवैया :

1. बिहार मेँ दो एयरपोर्ट गया और पटना मेँ, पूर्णियामे नाम
मात्र का एयरपोर्ट। जब बिहार मे किसी जगह एयरपोर्ट
नहीँ था उस समय दरभंगा मे था पर आज ? पटना एयरपोर्ट
पर उतरने वाले अधिकतर यात्री उत्तरी मिथिला केँ होते हैँ पर
उत्तरी मिथिला मे एक भी एयरपोर्ट नही जहां से लोग
यात्रा कर सकेँ, क्योँ ?

2. बिहार के राज्य गीत और राज्य प्रार्थना मेँ
   मिथिला को कोइ जगह नहीँ क्या मिथिला,बिहार मेँ नहीँ है ?

3. बिहार के गया और मोतिहारी मेँ नये केद्रीय
विश्वविद्यालय बनेँगेँ, क्या पूर्णिया/ मुजफ्फरपुर इस लायक
नहीँ हैँ ?

4. बिहार सरकार ने आजतक भारत सरकार से मिथिला मे
बाढ़ की समस्या को नेपाल के समक्ष उठाने
को नही कहा है, क्योँ ? उत्तरी मिथिला मेँ बाढ़ का निदान
नहीँ हो सका है, क्योँ ?

5. आजतक कोशी पर डैम नहीँ बन सका है अगर ये डैम बन
जाता तो मिथिला बिहार को 24 घंटे बिजली उपलब्ध
कराता! क्या ये नहीँ बनना चाहिये ?

6. बिहार के पटना, गया और हाजीपुर मेँ लो फ्लोर बसेँ
चलेँगी क्या दरभंगा/ भागलपुर/कटिहार इस लायक नहीँ हैँ ?

7. मैथिली बिहार की प्रमुख भाषा है, मैथिली बिहार
की एकमात्र क्षेत्रीय भाषा है जो भारतीय संविधान
की अष्टम अनुसूचीमे शामिल है तो फिर आज तक इसे बिहार
की दूसरी राजभाषा का दर्जा क्योँ नहीँ ? यहां ये
बताना जरुरी है की मैथिली नेपाल की द्वितीय
राष्ट्रभाषा है!

8. बिहार सरकार भोजपुरी फिल्मोँ को कर मेँ छूट देती हैँ पर
मैथिली फिल्मोँ को नहीँ, क्योँ ?

9. मिथिला मेँ आजतक प्रारंभिक शिक्षा मैथिली मेँ
देनी नहीँ शुरु की गयी,क्योँ ?

10. बिहार सरकार उर्दू, बांग्ला के
शिक्षकोँ की नियुक्ति कर रहीँ पर मैथिली के
शिक्षकोँ की नहीँ, क्योँ ?

11.  जो IIIT दरभंगा के लिए था उसे नीतीश कुमार छीन कर
बिहटा स्थानांतरित कराये, क्योँ ? 

12. 2008 के कोसी पीड़ितोँ को आजतक न्याय नहीँ मिल
सका है, क्योँ ? 

13. मिथिला क्षेत्र मे नये उद्योग धंधे लगाने की बात
तो छोड़िये जितने भी पुराने जूट मिल, पेपर मिल, चीनी मिल
आदि थे वे सारे क्योँ बंद हो गये ?

14. नीतीश कुमार मिथिला क्षेत्र मेँ होने वाले हर इक
सभा मेँ ये कहते हैँ की मिथिला के विकास के बिना बिहार
का विकास नहीँ हो सकता तो फिर उन्होँने मिथिला के
विकास के लिए अब तक क्या किया ?

   कितने कारण गिनाऊ, बिहार के मिथिला के प्रति उदासीन
के ? अब तो बिहार पर विश्वास ही नहीँ है, बीते 100
सालोँ मे धोखा, धोखा और सिर्फ धोखा!

     अब आप बताइये बिहारी मित्रोँ क्योँ न करु पृथक
मिथिला राज्य की मांग ?"

सोमवार, 2 दिसंबर 2013

जन्तर-मन्तरपर ५ दिसम्बर अयबाक अपील सन्दर्भमे:   




मिथिला लेल प्राइवेट मेम्बरकेर बिल - संसदमे!

जाहि लेल ५ दिसम्बर बेसी संख्यामे जुटबाक अनुरोध कैल जा रहल अछि तेकर भूमिका स्पष्ट करब जरुरी बुझाइछ। 

सरकार द्वारा कानून बनेबाक लेल जे विधेयक बहस करबा लेल संसदमे राखल जाइछ तेकरा गवर्नमेन्ट बिल कहल जाइछ (वेस्टमिन्स्टर सिस्टम - जेकरा भारतीय संविधानसेहो अनुसरण करैछ) आ जे कैबिनेटसँ इतर सरकारक सहयोगी वा विरोधी पक्षक सदस्य द्वारा राखल जाइछ तेकरा प्राइवेट मेम्बर बिल मानल जाइछ। १९४७ केर तुरन्त बाद जखन मिथिला राज्यक माँग भारतीय संसदमे पास नहि भेल आ फेर राज्य गठन आयोग द्वारा सेहो १९५६ मे आरो-आरो नव राज्य गठन होयबा समय सेहो एकरा नकारल गेल तेकर बादसँ आधिकारिक बहस भारतीय संसदमे एहिपर नहि भेल अछि। ताहि लेल दरभंगासँ भाजपा संसद कीर्ति झा आजाद एहि विषयपर गंभीरतापूर्ण संज्ञान लैत बौद्धिकतासँ भरल ऐतिहासिकता आ उपलब्ध दस्तावेज सबकेँ समेटने अपना दिशिसँ मिथिलाक अस्मिताक रक्षा लेल डेग उठौलनि आ एहि क्रममे हुनका द्वारा प्रस्तुत बिल "बिहार झारखंड पुनर्संयोजन विधेयक २०१३" (The Bihar Jharkhand Reorganization Bill, 2013) संसदमे बहस लेल प्रस्तावित कैल गेल अछि। विधान अनुरूप कोनो बिलपर बहस लेल राष्ट्रपतिक मंजूरी आवश्यक रहनाय आ फेर समुचित तारीख दैत एहिपर बहस केनाय आ यदि सदन एकरा मंजूर करैत अछि तँ संविधानमे प्रविष्टि केनाय - यैह होइछ प्राइवेट मेम्बर बिल।

जेना ई बुझल अछि जे मिथिला राज्यक माँग भारतक स्वतंत्रता व ताहू सँ पूर्वहिसँ कैल जा रहल अछि - कारण बस एकटा जे "मिथिला अपना-आपमे परिपूर्ण इतिहास, भूगोल, संस्कृति, भाषा, साहित्य, संसाधन, समाजिकता आ सब आधारपर राज्य बनबाक लेल औचित्यपूर्ण अछि" आ भारतीय गणतंत्रमे राज्य बनबाक जे आधार छैक तेकरा पूरा करैत अछि.... दुर्भाग्यवश अंग्रेजक समयमे प्रान्त गठन करबा समय मिथिला लेल पूरा अध्ययनक बावजूद बस किछेक खयाली कल्पनासँ एकरा मिश्रितरूपमे 'बिहार' राज्य संग राखि देल गेल छल, मुदा बिहारसँ पहिले उडीसाक मुक्ति (१९३६) आ फेर झारखंडक मुक्ति (२०००) मे कैल गेल यद्यपि मिथिलाक माँग ताहू सबसँ पुरान रहितो एहिठामक लोकसंस्कृतिक संपन्नता आ लोकमानसक सहिष्णुताकेँ कमजोरी मानि बस सब दिन संग रहबाक लेल अनुशंसा कैल गेल... परञ्च जे विकास करबाक चाही से नहि कैल गेल, जे पोषण करबाक चाही सेहो नहि कैल गेल... उल्टा जेहो पूर्वाधार एहिठाम विकसित छल तेकरो धीरे-धीरे मटियामेट कय देल गेल। बिहारक शासनमे सब दिन मिथिला क्षेत्र उपेक्षित रहि गेल। एक तऽ प्रकृतिक प्रकोप जे बाढिक संग-संग सूखाक दंश, ऊपरसँ कोनो वैज्ञानिक वा विकसित प्रबंधन नहि कय बस दमन आ उपेक्षाक चाप थोपि मिथिलाक लोकमानसकेँ आन-आन राज्य जाय सस्ता मजदूरी आ चाकरीसँ जीवन-यापन करबाक लेल बाध्य कैल गेल। परिणामस्वरूप एहि ठामक विकसित आ सुसभ्य परंपरा सब सेहो ध्वस्त भेल, लोकसंस्कृतिक मृत्यु होमय लागल आ आब मिथिला मात्र रामायणक पन्नामे नहि रहि जाय से डर बौद्धिक स्तरपर स्पष्ट होमय लागल। तखन तऽ जे विधायक (जनप्रतिनिधि) एहिठामसँ चुनाइत छथि आ केन्द्र व राज्यमे जाइत छथि हुनकहि पर भार रहल जे मिथिलाकेँ कोना संरक्षित राखि सकता - लेकिन जाहि तरहक नीतिसँ मिथिलाकेँ विकास लेल सोचल गेल ताहिसँ उपेक्षा आ पिछडापण नित्यदिन बढिते गेल। हालत बेकाबू अछि, लोकपलायन चरमपर अछि, शिक्षा, उद्योग, कृषि, प्रशासन सब किछु चौपट देखाइत अछि। बिना राज्य बनने कोनो तरहक सुधारक गुंजाइश न्यून बुझाइछ।

हलाँकि भारतमे लगभग ३०० सँ ऊपर प्राइवेट मेम्बर बिल आइ धरि आयल, ताहिमे सँ बिना बहस केने कतेक रास गट्टरमे फेका गेल तऽ लगभग १४ टा विधानक रूपमे सेहो स्वीकृति पौलक। एहि बिलक भविष्य जे किछु होउ से फलदाता बुझैथ, लेकिन एक सशक्त-जागरुक चेतनशील मैथिलक ई कर्तब्य बुझापछ जे अपन राजनैतिक अधिकार लेल एना हाथ-पर-हाथ धेने नहि बैसैथ आ अपन अधिकार लेल आवाज धरि जरुर उठबैथ। यदि भारतीय गणतंत्रमे मिथिलाक मृत्यु तय छैक तऽ भारतक भविष्यनिर्माता सब जानैथ, लेकिन एक "मैथिल" लेल अपन भागक कर्तब्य निर्वाह करबाक जरुरत देखैत अपील कैल जा रहल अछि जे जरुर बेसी सऽ बेसी संख्यामे जन्तर-मन्तरपर ओहि बिलकेर समर्थन लेल राजनैतिक समर्थन जुटेबाक उद्देश्यसँ आ मिथिला राज्य संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा राखल गेल धरनामे सद्भाव-सौहार्द्रसंग सहभागिता लेल सेहो हम सब पहुँची। अपन अधिकार लेल संघर्ष करहे टा पडैत छैक, बैसल कतहु सँ कोनो सम्मान वा स्वाभिमान प्राप्त नहि भऽ सकैत छैक, ई आत्मसात करैत हम सब एकजुटता प्रदर्शन करी।

याद रहय - ५ दिसम्बर, २०१३, स्थान जन्तर-मन्तर, समय दिनक १० बजेसँ।