गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

आउ बनाऊ दहेज़ मुक्त मिथिला

बंधुगण! अगहन सँ शुद्ध शुरु होवयवाला अछि, बहुत कुटमैती के निराकरण जोर पर अछि। यैह उचित समय थीक जाहिमें दहेज मुक्त मिथिला के सक्रियता के जोर पर राखैय जाउ। जतय कोनो कुटमैती टाका-पैसा माँग कैल जा रहल अछि, ताहि ऊपर प्रहार जरुरी छैक। प्रहार के मतलब इ नहि जे मारपीट होइक, बस तथ्यांक संकलन करैत समाचार पत्र के मार्फत सरकारी सहयोग सऽ प्रकाशित करायल जायत आ एहि तरहें लोक में एक प्रकार के जागृति बलजोरी सेहो प्र...वेश करतैक। एहि हेतु अपने लोकनि सँ निवेदन जे कोनो कुटमैती दहेज लेन-देन करैत जे निर्धारित भऽ रहल छैक ताहि के तथ्याँक प्रकाशित करू आ बाकी एक प्रतिनिधि मंडल द्वारा पटना में मंत्री जी संग नवम्बर-दिसम्बरमें भेंटघाँट कार्यक्रम रखबाक छैक - तऽ आवश्यक सूचना प्रकाशित करैत एहेन समाजिक अपराधमें संलिप्त लोक के उघार करब अत्यन्त जरुरी छैक। से अपने लोकनि इ सूचना फेशबुक पर संकलित करी से आग्रह अछि।

विनीत:
दहेज मुक्त मिथिला परिवार

आब डीजीसीए लगेलक अडंगा

  1. हर डेग पर फाइल रुकला स भ रहल अछि विमान सेवा मे देरी
  2. केवल पटना जमशेदपुर नहि, चारिटा शहर स शुरू होएत सेवा
  3. सुरक्षा जांचक जिम्‍मेदारी पर नहि भ सकल अछि कोनो फैसला
  4. अनुमतिपत्र भेटलाक दोसर दिन शुरू होएत सेवा
  5. अगिला सप्‍ताह जारी भ सकैत अछि किराया क सूची
दरभंगा/पटना/ नई दिल्‍ली । दरभंगा, पूर्णिया, गया आ पटनाक बीच हवाई सेवा मे डीजीसीए अडंगा लगा देलक अछि। इ सेवा कए एहि मास शुरू करबाक योजना छल, मुदा स्प्रिट एयरलाइंस स प्राप्‍त भेल आधिकारिक जानकारीक अनुसार जीडीसीए एहि सेवा लेल एखन धरि अनुमतिपत्र नहि देलक अछि। स्प्रिट एयरलाइंस क पटना एयरपोर्ट मैनेजर सुरेश प्रसाद इसमाद स एहि संबंध मे पूछला पर साफ तौर पर कहला जे डीजीसीए द्वारा अडंगा लगेबाक कारण इ सेवा एखन धरि शुरू नहि भ सकल अछि जखन कि कंपनी जरूरी कागजात बहुत दिन पहिने डीजीसीए लग पठा चुकल अछि। ओ कहला जे कंपनी दिस स सबटा पेपरवर्क भेल चुकल अछि ओकर बावजूद डीजीसीए दिस स अफ्रूवल देबा मे देरी बुझबा मे नहि आबि रहल अछि, जखन कि एहि सेवा लेल जहाज तक आबि चुकल अछि। सेवा शुरू करबा संबंधि तिथि पर श्री प्रसाद क कहब छल जे कंपनी सब प्रकारस तैयार अछि जहिया जीडीसीए क अनुमति पत्र भेटत ओकर दोसर दिन हम अपन सेवा शुरू कए देब।
एकटा सवाल क उत्‍तर मे श्री प्रसाद कहला जे कंपनी केवल पटना आ जमशेदपुर क बीच सेवा नहि शुरू करत, बल्कि बिहारक तीनटा शहर स सेहो सेवा शुरू कैल जाएत, मुदा पटना, गया आ जमशेदपुर हवाईअडडा पर सुरक्षा जांच मे कोनो दिक्‍कत नहि अछि, मुदा दरभंगा आ पूर्णिया मे सुरक्षाक जिम्‍मा केकर होएत एहि पर एखन धरि सरकार संग तय नहि भ सकल अछि। एहि ठामक सुरक्षा राज्‍य सरकार क हाथ मे होएत या कंपनी अपन स्‍तर स व्‍यवस्‍था करत इ फैसला एखन हेबाक अछि। किया कि दरभंगा आ पूर्णिया दरअसल एयरबेस अछि एयरपोर्ट नहि। मुदा एहि समस्‍या क हल सेहो जल्‍द निकालि लेल जाएत। किराया सम्बन्धी सवाल पर श्री प्रसाद कहलथि जे एहि विषय पर जीडीसीए स अनुमति भेटलाक बाद किछु तय भ सकत, आशा करैत छी अगिला सप्‍ताह तक किराया संबंधी खाका लोक कए उपलब्‍ध भ जाएत। ज्ञात हुए जे इसमाद कहने छल जे इ सेवा अक्टूबर क अंत तक उपलब्‍ध भ जाएत।
प्रसाद क अनुसार कंपनी भागलपुर लेल सेहो प्रयासरत छल मुदा राज्‍य सरकार भागलपुर मे विमान उतारबा लेल 63 हजार टका मांगि रहल अछि जखन कि दरभंगा आ पूर्णिया मे विमान उतारबा लेल भारतीय वायुसेना केवल नौ हजार टका ल रहल अछि। प्रसाद कहला जे दिल्‍ली आ कोलकाता एखन जोडब संभव नहि अछि मुदा बगलक राज्‍य झारखंडक दूटा शहर रांची आ जमशेदपुर सेहो एहि सेवा स जुडि जाएत।
ज्ञात हुए जे इ कंपनी पिछला साल सेहो एहन प्रयास केने छल मुदा तकनीकी कारण स सफल नहीं भ सकल। एकर बाद लोक एहि सेवा कए लकए नाउम्मीद भ चुकल छल। महाराज दरभंगा क दरभंगा एयरलाइंसक बाद इ पहिल मौका छल जखन कोनो निजी कंपनीक सेवा दरभंगा हवाई अड्डा स शुरू हुए जा रहल अछि।
देर आये दुरुस्त आये क कहावत कए चरितार्थ करैत स्प्रीट एयर लाइन यात्री क बढैत संख्‍या कए देखैत अपन तीन सीटर क स्‍थान पर दस सीटर विमान उतारि रहल अछि। नव सेवा कई मायने मे फायदेमंद साबित भ सकैत अछि। तीन क जगह 10 यात्री कए लकए उड़ान भरला स विमान किराया कम भ सकैत अछि, आ पटना क अलावा महानगर क लेल सेहो सेवा आरंभ हेबाक संभावना बढ़त। यात्री कए सामान लकए चलबा मे सेहो सहूलियत होएत। सुरेश प्रसाद कहलथि अछि जे एकरा लेल जर्मनी क एकटा कंपनी स भाड़ा पर विमान लेल गेल अछि, जे दिल्ली पहुंच चुकल अछि। प्रसाद कहला जे सरकार अगर मदद करए त भगलपुर आ मुजफ्फरपुर स सेहो इ सेवा शुरू भ सकैत अछि। हालांकि मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन क दिस स हवाई अड्डा कए उड़ान लायक बनेबा लेल आहूत बैठक बेर-बेर टलला स स्प्रीट एयर लाइन निराश अछि। पटना एयर पोर्ट मैनेजर श्री प्रसाद कहैत छथि जे अगर मुजफ्फरपुर क एयर पोर्ट दुरुस्त भ जाए त सीधा कोलकाता, मुंबई क लेल सेहो सेवा शुरू करबा क विचार भ अछि।
साभार - इसमाद.कॉम

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

हार पर विजय

हार गिरे तब धार करे
जब धार करे तब वार करे
जब वार करे संहार करे
हुंकार भरे हुँकार भरे
ग्लानी कुंठा को जगह नहीं अब
तज स्वाभिमान और आडम्बर को
कृतग्य भाव से अमूल्य समय का सत्कार करे
विविधा नहीं दुविधा नहीं
बाधाओं को आने दो
बन अंधकार के बादल मंडराने दो
प्रतिकार करे प्रतिकार करे
जो घात करे प्रतिघात करे
सहश्त्र भानु पर विजय करे
क्यों चंद्रकला को भ्रमित हो
श्रम हमारा रथ होगा धैर्य हमारी ढाल
द्रिढता को तलवार करे
अटल युद्ध पर अडिग हों
हर मुश्किल को हम पार करे
हार गिरे तब धार करे
जब धार करे तब वार करे
जब वार करे संहार करे
c.Jha

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

ग़ज़ल

गामक इयाद पिया मोन पडाय ये।
बड़ रहलो शहर चलू घुरि चलू॥

शहरक इजोत नीक नै बुझाय ये।
लालटेन दिस आब चलू घुरि चलू॥

पिज्जा, कोला, बर्गर सों मोन अघाय ये।
मकई के रोटी लेल चलू घुरि चलू॥

हिप-होप, रैप, नै चित्त क सोहाय ये।
गामक ढोलीबा लग चलू घुरि चलू॥

दिल्ली सों आब सुनील मोन डराय ये।
गामक दिस लौट चलू, चलू घुरि चलू॥

सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

दहेज मुक्त मिथिलाके निर्माण एवं मिथिलाके धरोहरके संरक्षण--


मिले,
... श्रीमान्‌/श्रीमती/श्रीयुत्‌ ...........................................................
पता: ................................................................................
.......................................................................................
.......................................................................................

विषय: दहेज मुक्त मिथिलाके निर्माण एवं मिथिलाके धरोहरके संरक्षण

महोदय/महोदया,

उपरोक्त विषयमें अपने केँ सूचित करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि जे आजुक २१वीं शदीमें मिथिलाके युवा जनशक्ति जे आइ संसारके हर कोणमें पसरल छथि आ काफी प्रभावशाली योगदान दैत संसारके निर्माणमें व्यस्त छथि - हुनकहि जागृतिके इ सुखद परिणाम थीक जे ‘दहेज मुक्त मिथिला’ नामके एक संस्थाके निर्माण भेल अछि जेकर मुख्य उद्देश्य केवल एतेक जे मिथिलामें माँगरूपी दहेज के प्रथाके समाप्त कैल जाय - मिथिलाके बेटी ऊपर इ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दुनू रुपें अत्याचार थीक; प्रत्यक्ष एहि लेल जे संतान सभ बराबर होइछ, जहिना लोक बेटाके पढाबयलेल अग्रसर छथि, तहिना बेटीके लेल सेहो छथि - तखन दू रंगके व्यवहार जे बेटाके विवाहमें बेटीवाला के त्यागके कोनो गणना नहि करैत माँगरूपी दहेज के थोपल जैछ। अप्रत्यक्ष अत्याचार एहि लेल जे दहेज के व्यवहार के कारण बहुतो माता-पिता अपन कन्याके उच्च अध्ययन सऽ वञ्चित रखैत छथि आ एहि तरहें मिथिलामें प्रतिभा रहितो मैथिलपुत्री बहुत पछुवायल छथि। जतय आजुक महिला संसारके उच्चतम्‌ शिखर माउण्ट एवरेस्ट सऽ लऽ के, राष्ट्रकवच सेनामें एवं विज्ञानके युगमें प्रखर प्रदर्शन करैत संसारके आगू बढाबयमें हर क्षेत्रमें अगुआ भूमिका निर्वाह कय रहल छथि ततय मिथिलाके बेटीपर दहेज के एहेन प्रहार छैक जे एक निश्चित सीमा तक मात्र पढाइ करैत छथि। उच्च शिक्षाके लेल हतोत्साहित होइत छथि। केवल विवाह एवं वर हेतु चिन्तित रहैत दहेजके व्यवस्थामें लागल थाकल परेशान मैथिल असल ऐश्वर्यके, रिद्धि-सिद्धिके एवं समुचित विकासके बहुत पैघ बाधक बनल छथि। एहि प्रतिकूलताके विरुद्ध छेड़ल मौलिकताके लड़ाईमें अपनेक सहयोगकेर आकाँक्षा रखैत इ पत्र प्रेषित कय रहल छी जे हमरा लोकनिक कार्य-प्रणालीमें मिथिलाके धरोहर जे लगभग हर गाम - हर इलाका में कोनो ने कोनो रूपमें अवश्य मौजूद अछि ताहि ऊपर एकजूट बनैत संरक्षण के कार्य कैल जाय - एहि में अपनेक सहयोग के अपेक्षा रखैत छी।

वर्तमानमें हमरा लोकनि सौराठ सभाके पुनरुत्थान हेतु जन-जागरण अभियानमें अपनेक सहयोग के याचना करैत छी। एहि सभाके जे पौराणिक शुद्ध संस्करण छल ताहिके पुनर्जागरण करयमें, दहेज मुक्त विवाह हेतु एवं विद्वत्‌ सभा जाहिमें मिथिलाके विकास हेतु आम चर्चा-परिचर्चा सेहो होइ आ लोक एकताके सूत्रमें बँधैत नव-नव-निर्माणके कार्यमें संलिप्त होइथ - ताहि लेल सालमें एक बेर सौराठ सभागाछीके पुनः जगायल जाय। एकर जागृति लेल अपनेक सहभागिता के अपरिहार्य आवश्यकता बुझैछ। संगहि जे पौराणिक परंपरा वैवाहिक अधिकार निर्णय कराबय हेतु पंजिकार द्वारा विगत पुश्ताके बीच कोनो प्रकार के रक्त सम्बन्ध जाँच कराबैत कैल जैछ एकर परित्याग कदापि नहि करै जाइ। सिद्धान्त लिखाबैक परंपरा पर सेहो सभ मैथिल ब्राह्मण जाग्रत रहैथ।

जानकारी दी जे एहि बेर सौराठमें श्री श्री १०८ श्री माधवेश्वर नाथ महादेवके मन्दिर जेकर निर्माण दरभंगा राज द्वारा करायल गेल आ जे आइ अत्यंत उपेक्षित अबस्थामें अछि, एकर जीर्णोद्धार हेतु दहेज मुक्त मिथिला कटिबद्ध अछि। अपने लोकनि सँ निवेदन जे एहि शुभ कार्यमें अपन यथायोग्य सहयोग निम्न खातामें अवश्य पठाबी।

खाताधारकके नाम :-सौराठ सभा विकास समिति एवं दहेज मुक्त मिथिला
खाताधारक बैंकके पता :- रहिका, मधुबनी , बिहार
खाताधारक बैंकके नाम :- भारतीय स्टेट बैँक
खाता नं. :- 31742944456
आई. एफ. एस. सी. कोड:- SBIN0005897

धन्यवाद,

सदस्य,
दहेज मुक्त मिथिला, पंजी भवन,
सौराठ सभागाछी, मधुबनी।
फोन: 09661042056..09135462251 .09279343090

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

ग़ज़ल

एही दुनिया म अहाँक नै नोर पोछ्त कियो
काज जो निकैल जाएत नै घुरि देखत कियो

कुकर्मक इ राह पर लोग बढ़ि गेल एते
अहाँ कतबो घुरा लीअ नै घुरि सकत कियो

अपनहि आन स जे मान एता पाबय छैक
दोसरक मान अछि की नै बुझि सकत कियो

कलमक धार स त बहुतो लिखायत छैक
ज्ञनगर एही बात कए जुनी पढ़त कियो




शनिवार, 10 सितंबर 2011

अनंत चतुर्दशीक हार्दिक शुभकामना...

भाद्रपद मासक शुक्लपक्षक चतुर्दशी क अनंत चतुर्दशी कहल जाएत अछि। एही दिन अनंत भगवान् क पूजा कए के संकट स रक्षा करय बला अनंतसुत्र बान्हल जाएत अछि। शास्त्र क अनुसार एही व्रतक संकप आ पूजा नदी, सरोवर, वा तालाबक कात म करय क विधान अछि मुदा जो एहन संभव नै होए त घरक पूजा घर म सेहो अहन कए सकय छी। पूजा घर म जमीन पर कलश स्थापित करू आ कलश पर शेषनागक बिछौना पर लेटल भगवान् विष्णु क मूर्ति वा फोटो राखु। ओकर बाद चौदह गाँठ बला अनंतसूत्र राखु। एकर बाद 'ॐ अनंतायानमः' मंत्र स भगवान् विष्णु आ अनंतसुत्र क षोडशोपचार-विधि स  पूजा करू। पूजाक बाद अनंत सूत्र क मंत्र पढ़ी क पुरुष दाहिना हाथ आ स्त्री बामा हाथ म बाँध लीअ।

     
अनंन्तसागरमहासमुद्रेमग्नान्समभ्युद्धरवासुदेव। अनंतरूपेविनियोजितात्माह्यनन्तरूपायनमोनमस्ते॥ 
पूजाक बाद व्रत-कथा पढू आ सूनु। कथाक संक्षेप अछि - सतयुग म सुमन्तु नाम क एकटा मुनी छल। हुनका एकटा बेटी छल शीला जे अपन नामक अनुरूप बड़ सुशील रहे। सुमन्तु मुनी ओ कन्याक विवाह कौण्डिन्यमुनि स केलैथि। कौण्डिन्यमुनि अपन बेटीक लए क जखन सासुर स घर जा रहल रहे, तखन रस्ता म नदी कात म किछ स्त्रीगण भगवान् अनंतक पूजा करैत देखा पडल। ई देखि शीला ओता जाके अनंत-व्रत क कथा क सुनालक आ पूजन क बाद अनंतसुत्र बंधलक। एही कारण स हुनकर घर किछु दिन म ध्न्यधान स भरि गेल। एही सन्दर्भ म एकटा आर कथा अछि की जखन पांडव जुआ म अपन सब किछु हारी गेल रहे तखन भगवान् श्री कृष्ण क सलाह स ओ भगवान् अनंतक पूजा करलक आ हुनकर कृपा स किछु दिन बाद अपन राज पाट वापस पाबि लेलक। अनंतसूत्र बान्हले क बाद कोनो ब्रह्मण आ भोग देने क बाद सपरिवार प्रसाद ग्रहण करू।
हमरा तरफ स समस्त मिथिलावाशी क अनंत चतुर्दशीक हार्दिक शुभकामना। भगवान् विष्णु स अहाँक सुन्दर आ स्वस्थ शरीरक कामना करैत...जय मिथिला-जय मैथिली॥

सोमवार, 5 सितंबर 2011

कॉफ़ी हाउस में लागल मिथिलाक जमघट...

काल्हि साँझ क दिल्ली स्थित कनाट पैलेसक 'कॉफ़ी हाउस' म एहन लागि रहल रहे जेना मिथिला एते उतैर आयल अछि, जिम्हर देखियो मैथिल आ मैथिलीक आवाज सुना रहल रहे। मिथिलाक एहन जमघट बगैर कोनो सांस्कृतिक कर्यक्रमक हमरा पहिल बेर नज़र आयल, मौका रहे 'वोइस ऑफ़ मिथिला' क तरफ स मिथिला अ मैथिली क दशा आ दिशा पर परिचर्चा। पहिल बेर मैथिलक एहन भीड़ देखि अचके हमरा मोन पड़ा गेल ई पांति...
।मानि गेलोंउ जे मिथिला नै बांचल अछि भूगोल म।
।। बचा क रखना छी हम जकरा अपन मायक बोल म।।
। लगनी, झरनी, जट, जट्टिन आ साँझक सगोर राति म।
।। एक-एक मिथिला राज्य बसल छैक एक एक मैथिल छाति म।।
निश्चित मिथिला अखन भूगोल म नै अछि बाँटल तखनो जे मिथिलावासीक एही तरहक उत्साह आ जोश नजैर आयल, ओ अविस्मर्णीय रहे। मैथिलीक शंखनाद सोंसे कनाट पैलेस गुंजायमान भ रहल छले। कार्यक्रमक अध्यक्षता सर्वसम्मती स आदरणीय श्री संतोष जी क सौपल गेल आ अध्यक्ष पद क निर्वहण कोना करल जाय अछि ई हुनका स हम नीक जोंका सिखलों। परिचर्चाक शुरुआत म संतोष जी सर्वसम्मति एकटा ऐतिहासिक फैसला लेलैथि जे एही मंच क हम सब राजनैतिक मंच नै बनायब आ कुनू भी तरहक स्वार्थ आ राजनैतिक भावना स ऊपर उठ क एकरा चलायब आ मिथिला आ मैथिलीक लेल एकटा अनुकरणीय योगदान देब आ एकरा मैथिलीक इतिहास म अमर करायब। फेर परिचर्चाक आगाँ बढ़ल आ मैथिल आ मैथिलीक दशा आ दिशा पर विचार भेल। तय भेल ज मिथिलाक लेल अखन बहुत किछु काज करय क अछि मुदा कियो भी एक गोटा सभ काज नै कए सकत त, सार्वजनीक रूप स ई तय भेल की वोटिंग करायल जाओ आ जेहि काजक लेल बेसी मत पड़त ओही पर पहिने काज होएत। मुदा एकर मतलब ई नै जे हम दोसर बिंदु पर विचार नै करब,आ ओकरा बिसैर जायब एहन नै, एकटा काजक सफलताक बाद हम दोसर-दोसर बिंदु पर सेहो अपन काज करब आ विचार राखब। फेर सबहक विचार भेल आ पाँच टा जे मुख्य समस्या आयल मिथिला आ मैथिलीक ओ क्रमशः ऐना अछि -:शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, रोजगार,आ  दहेज़। सबहक विचार देखैत शिक्षा सबसे पैघ आ गंभीर समस्या लागल जे लगभग सभ समस्याक जड़ छल। फेर सर्वसम्मति स विचार करल गेल जे एकटा एहन विद्यालयक निर्माण करल गेल जाही म विद्यार्थी सबके 'सोफ्ट स्किल' क ट्रेनिग देल जाएत, संगे जाही म मिथिलाक्षर/तिरहुता एकटा अनिवार्य विषय रहत। जाही स हुनकर कम्युनिकेशन स्किल म सुधार होए संगे मैथिली लिखय क प्रति लोग बाग़ म जागरूकता सेहो आबय। दोसर बिंदु रहल मिथिलाक ओहन उपेक्षित लेखक क खोजल जाए जिनका म रचनाक शैली आ लेखनक कला त अछि मुदा अर्थाभाव म ओ अपन रचना क सही दिशा नै दए पाबि रहल अछि। ओहन लेखक क खोज करल जाए हुनकर रचना क प्रकाशित करायल जाए आ ओ प्रकाशित रचनाक रोयल्टी हुनका प्रदान करल जाए जाही स हुनकर आस्था आ विश्वास त मिथिलाक लेल बढ़बे करे संगे आन आन जे मैथिलीक लेखक आभाव या कोनो आन कारण स मैथिली म अपन भविष्य नै खोजि पाबि रहल अछि, हुनका जोश आबय आ मिथिला आ मैथिलीक लेल किछु करे।
परिचर्चाक अंत म आदरणीय कौशल जी समस्त आयल मैथिल क धन्यवाद ज्ञापन करलैथ आ परिचर्चा सम्पतिक घोषण एही सपथ क संग काएल गेल जे हम मिथिलाक लोग मिथिला आ मैथिली क लेल अपन समग्र योगदान देब। परिचर्चा म दिल्ली म रहनिहार रास-रास मैथिल पहुंचल रहे जाही म आनंद झा, जयनाथ झा, संतोष झा, कौशल जी, मुकेश मिश्रा, चित्रान्शु कर्ण, सितांशु जी, नीरज पाठक, सोनू मिश्रा, संगे अनेक गणमान्य आ विशिष्ठ लोग आयल छल।

बुधवार, 31 अगस्त 2011

मिथिलाक लोक पावनि चौरचन : कलंकित चान देखबाक परंपरा

एक सितंबर कए मिथिलाक लोकपावनि चौरचन (चौठ चान) अछि। सामान्‍यत: एहि दिन भारत वर्ष मे चंद्रमा क दर्शन नहि कैल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे एहि दिन चंद्रमाक दर्शन स अनेरे कलंक लगैत अछि। मुदा मिथिला मे चद्रमा देखबाक प्रचलन अछि। हाथ मे कोनो फल लेने लोग चान क बाट तकैत अछि आ ओकर दर्शनक बाद अन्‍न ग्रहण करैत अछि। एकर पाछु दू तीनटा लोक कथा अछि। कियो एहि दिन कए अहल्‍या स जोडैत अछि त किनको कहब अछि जे एहि दिन मिथिला नरेश कलंक स मुक्‍त भेल छथि। कारण जे हो मुदा मिथिला मे एहि दिन चान देखबाक परंपरा पुरान अछि। प्रस्‍तुत अछि एहि पावनि पर पवन कुमार मिश्रक इ आलेख।
- समदिया

समस्त विज्ञजन केँ विदित अछि जे समग्र विश्‍व मे भारत ज्ञान विज्ञान सँ महान तथा जगत्‌ गुरु कऽ उपाधि सँ मण्डित अछि । एतवे टा नहि भारत पूर्व काल मे “सोनाक चिड़िया” मानल जाइत छल एवं ब्रह्माण्डक परम शक्‍ति छल । भूलोकक कोन कथा अन्तरिक्ष लोक मे एतौका राजा शान्ति स्थापित करऽ लेल अपन भुज शक्‍तिक उपयोग करैत छलाह । एकर साक्ष्य अपन पौराणिक कथा ऐतिह्‌य प्रमाणक रुप मे स्थापित अछि ।
हमर पूर्वज जे आई ऋषि महर्षि नाम सँ जानल जायत छथि हुनक अनुसंधानपरक वेदान्त (उपनिषद्‍) एखनो अकाट्‍य अछि । हुनक कहब छनि काल (समय) एक अछि, अखण्ड अछि, व्यापक (सब ठाम व्याप्त) अछि । महाकवि कालिदास अभिज्ञान शकुन्तलाक मंगलाचरण मे “ये द्वे कालं विधतः” एहि वाक्य द्वारा ऋषि मत केँ स्थापित करैत छथि । जकर भाव अछि व्यवहारिक जगत्‌ मे समयक विभाग सूर्य आओर चन्द्रमा सँ होइछ ।
‘प्रश्नोपनिषद्‍’ मे ऋषिक मतानुसार परम सूक्ष्म तत्त्व “आत्मा” सूर्य छथि तथा सूक्ष्म गन्धादि स्थूल पृथ्वी आदि प्रकृति चन्द्र छथि । एहि दूनूक संयोग सँ जड़ चेतन केँ उत्पत्ति पालन आओर संहार होइछ ।
आत्यिमिक बौद्धिक उन्‍नति हेतु सूर्यक उपासना कैल जाइछ । जाहि सँ ज्ञान प्राप्त होइछ । ज्ञान छोट ओ पैघ नहि होइछ अपितु सब काल मे समान रहैछ एवं सतत ओ पूर्णताक बोध करवैछ । मुक्‍तिक साधन ज्ञान, आओर मुक्‍त पुरुष केँ साध्यो ज्ञाने अछि । सूर्य सदा सर्वदा एक समान रहैछ । ठीक एकरे विपरीत चन्द्र घटैत बढ़ैत रहैछ । ओ एक कलाक वृद्धि करैत शुक्ल पक्ष मे पूर्ण आओर एक-एक कलाक ह्रास करैत कृष्ण पक्ष मे विलीन भऽ जाय्त छाथि । सम्पत्सर रुप (समय) जे परमेश्‍वर जिनक प्रकृति रुप जे प्रतीक चन्द्र हुनक शुक्ल पक्ष रुप जे विभाग ओ प्राण कहवैछ प्राणक अर्थ भोक्‍ता । कृष्ण पक्ष भोग्य (क्षरण शील वस्तु) ।
विश्‍वक समस्त ज्योतिषी लोकनि जातकक जन्मपत्री मे सूर्य आओर चन्द्र केँ वलावल केँ अनुसार जातक केर आत्मबल तथा धनधान्य समृद्धिक विचार करैत छथिन्ह । वैज्ञानिक लोकनि अपना शोध मे पओलैन जे चन्द्रमाक पूर्णता आओर ह्रास्क प्रभाव विक्षिप्त (पागल) क विशिष्टता पर पड़ैछ । भारतीय दार्शनिक मनीषी “कोकं कस्त्वं कुत आयातः, का मे जनजी को तात:” अर्थात्‌ हम के छी, अहाँ के छी हमर माता के छथि तथा हमर पिता के छथि इत्यादि प्रश्नक उत्तर मे प्रत्यक्ष सूर्य के पिता (पुरुष) आओर चन्द्रमा के माता (स्त्री) क कल्पना कऽ अनवस्था दोष सं बचैत छथि ।
अपना देश मे खास कऽ हिन्दू समाज मे जे अवतारवादक कल्पना अछि ताहि मे सूर्य आओर चन्द्रक पूर्णावतार मे वर्णन व्यास्क पिता महर्षि पराशर अपन प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘वृद्ध पराशर’ मे करैत छथि । “रामोऽवतारः सूर्यस्य चन्द्रस्य यदुनायकः” सृ. क्र. २६ अर्थात्‌ सूर्य राम रुप मे आओर चन्द्र कृष्ण रुप मे अवतार ग्रहण केलन्हि ।
ई दुनू युग पुरुष भारतीय संस्कृति-सभ्यता, आचार-विचार तथा जीवन दर्शनक मेरुद्ण्ड छथि आदर्श छथि । पौराणिक ग्रन्थ तथा काव्य ग्रन्थ केँ मान्य नायक छथि । कवि, कोविद, आलोचक, सभ्य विद्धत्‌ समाजक आदर्श छथि । सामान्यजन हुनका चरित केँ अपना जीवन मे उतारि ऐहिक जीवन के सुखी कऽ परलोक केँ सुन्दर बनाबऽ लेल प्रयत्‍नशील होईत छथि ।
एहि संसार मे दू प्रकारक मनुष्य वास करै छथि । एकटा प्रवृत्ति मार्गी (प्रेय मार्गी)- गृहस्थ दोसर निवृत्ति मार्गी योगी, सन्यासी । प्रवृत्ति मार्गी-गृहस्थ काञ्चन काया कामिनी चन्द्रमुखी प्रिया धर्मपत्‍नी सँ घर मे स्वर्ग सुख सँ उत्तम सुखक अनुभव करै छथि । ओहि मे कतहु बाधा होइत छनि तँ नरको सँ बदतर दुःख केँ अनुभव करै छथि ।
कर्मवादक सिद्धान्तक अनुसार सुख-दुःख सुकर्मक फल अछि ई भारतीय कर्मवादक सिद्धान्त विश्‍वक विद्धान स्वीकार करैत छथि । तकरा सँ छुटकाराक उपाय पूर्वज ऋषि-मुनि सुकर्म (पूजा-पाठ) भक्‍ति आओर ज्ञान सँ सम्वलित भऽ कऽ तदनुसार आचरणक आदेश करैत छथिन्ह ।
हम जे काज नहि केलहुँ ओकरो लेल यदि समाज हमरा दोष दिए, प्रत्यक्ष वा परोक्ष मे हमर निन्दा करय एहि दोष “लोक लाक्षना” क निवारण हेतु भादो शुक्ल पक्षक चतुर्थी चन्द्र के आओर ओहि काल मे गणेशक पूजाक उपदेश अछि ।
हिन्दू समाज मे श्री कृष्ण पूर्णावतार परम ब्रह्म परमेश्‍वर मानल छथि । महर्षि पराशर हुनका चन्द्रसँ अवतीर्ण मानैत छथिन्ह । हुनके सँ सम्बन्धित स्कन्दपुराण मे चन्द्रोपाख्यान शीर्षक सँ कथा वर्णित अछि जे निम्नलिखित अछि ।
नन्दिकेश्‍वर सनत्कुमार सँ कहैत छथिन्ह हे सनत कुमार ! यदि अहाँ अपन शुभक कामना करैत छी तऽ एकाग्रचित सँ चन्द्रोपाख्यान सुनू । पुरुष होथि वा नारी ओ भाद्र शुक्ल चतुर्थीक चन्द्र पूजा करथि । ताहि सँ हुनका मिथ्या कलंक तथा सब प्रकार केँ विघ्नक नाश हेतैन्ह । सनत्कुमार पुछलिन्ह हे ऋषिवर ! ई व्रत कोना पृथ्वी पर आएल से कहु । नन्दकेश्‍वर बजलाह-ई व्रत सर्व प्रथम जगत केर नाथ श्री कृष्ण पृथ्वी पर कैलाह । सनत्कुमार केँ आश्‍चर्य भेलैन्ह षड गुण ऐश्‍वर्य सं सम्पन्‍न सोलहो कला सँ पूर, सृष्टिक कर्त्ता धर्त्ता, ओ केना लोकनिन्दाक पात्र भेलाह । नन्दीकेश्‍वर कहैत छथिन्ह-हे सनत्कुमार । बलराम आओर कृष्ण वसुदेव क पुत्र भऽ पृथ्वी पर वास केलाह । ओ जरासन्धक भय सँ द्वारिका गेलाह ओतऽ विश्‍वकर्मा द्वारा अपन स्त्रीक लेल सोलह हजार तथा यादव सब केँ लेल छप्पन करोड़ घर केँ निर्माण कऽ वास केलाह । ओहि द्वारिका मे उग्र नाम केर यादव केँ दूटा बेटा छलैन्ह सतजित आओर प्रसेन । सतजित समुद्र तट पर जा अनन्य भक्‍ति सँ सूर्यक घोर तपस्या कऽ हुनका प्रसन्‍न केलाह । प्रसन्‍न सूर्य प्रगट भऽ वरदान माँगूऽ कहलथिन्ह सतजित हुनका सँ स्यमन्तक मणिक याचना कयलन्हि । सूर्य मणि दैत कहलथिन्ह हे सतजित ! एकरा पवित्रता पूर्वक धारण करव, अन्यथा अनिष्ट होएत । सतजित ओ मणि लऽ नगर मे प्रवेश करैत विचारऽ लगलाह ई मणि देखि कृष्ण मांगि नहि लेथि । ओ ई मणि अपन भाई प्रसेन के देलथिन्ह । एक दिन प्रंसेन श्री कृष्ण के संग शिकार खेलऽ लेल जंगल गेलाह । जंगल मे ओ पछुआ गेलाह । सिंह हुनका मारि मणि लऽ क चलल तऽ ओकरा जाम्बवान्‌ भालू मारि देलथिन्ह । जाम्बवान्‌ ओ लऽ अपना वील मे प्रवेश कऽ खेलऽ लेल अपना पुत्र केऽ देलथिन्ह ।
एम्हर कृष्ण अपना संगी साथीक संग द्वारिका ऐलाह । ओहि समूहक लोक सब प्रसेन केँ नहि देखि बाजय लगलाह जे ई पापी कृष्ण मणिक लोभ सँ प्रसेन केँ मारि देलाह । एहि मिथ्या कलंक सँ कृष्ण व्यथित भऽ चुप्पहि प्रसेनक खोज मे जंगल गेलाह । ओतऽ देखलाह प्रदेन मरल छथि । आगू गेलाह तऽ देखलाह एकटा सिंह मरल अछि आगू गेलाह उत्तर एकटा वील देखलाह । ओहि वील मे प्रवेश केलाह । ओ वील अन्धकारमय छलैक । ओकर दूरी १०० योजन यानि ४०० मील छल । कृष्ण अपना तेज सँ अन्धकार के नाश कऽ जखन अंतिम स्थान पर पहुँचलाह तऽ देखैत छथि खूब मजबूत नीक खूब सुन्दर भवन अछि । ओहि मे खूब सुन्दर पालना पर एकटा बच्चा के दायि झुला रहल छैक बच्चा क आँखिक सामने ओ मणि लटकल छैक दायि गवैत छैक-
सिंहः प्रसेन भयधीत, सिंहो जाम्बवता हतः ।
सुकुमारक ! मा रोदीहि, तब ह्‌येषः स्यमन्तकः ॥
अर्थात्‌ सिंह प्रसेन केँ मारलाह, सिंह जाम्बवान्‌ सँ मारल गेल, ओ बौआ ! जूनि कानू अहींक ई स्यमन्तक मणि अछि । तखनेहि एक अपूर्व सुन्दरी विधाताक अनुपम सृष्टि युवती ओतऽ ऐलीह । ओ कृष्ण केँ देखि काम-ज्वर सँ व्याकुल भऽ गेलीह । ओ बजलीह-हे कमल नेत्र ! ई मणि अहाँ लियऽ आओर तुरत भागि जाउ । जा धरि हमर पिता जाम्बवान्‌ सुतल छथि । श्री कृष्ण प्रसन्‍न भऽ शंख बजा देलथिन्ह । जाम्बवान्‌ उठैत्मात्र युद्ध कर लगलाह । हुनका दुनुक भयंकर बाहु युद्ध २१ दिन तक चलैत रहलन्हि । एम्हर द्वारिका वासी सात दिन धरि कृष्णक प्रतीक्षा कऽ हुनक प्रेतक्रिया सेहो देलथिन्ह । बाइसम दिन जाम्बवान्‌ ई निश्‍चित कऽ कि ई मानव नहि भऽ सकैत छथि । ई अवश्य परमेश्‍वर छथि । ओ युद्ध छोरि हुनक प्रार्थना केलथिन्ह अ अपन कन्या जाम्बवती के अर्पण कऽ देलथिन्ह । भगवान श्री कृश्न मणि लऽ कऽ जाम्ब्वतीक स्म्ग सभा भवन मे आइव जनताक समक्ष सत्जीत के सादर समर्पित कैलाह । सतजीत प्रसन्‍न भऽ अपन पुत्री सत्यभामा कृष्ण केँ सेवा लेल अर्पण कऽ देलथिन्ह ।
किछुए दिन मे दुरात्मा शतधन्बा नामक एकटा यादव सत्ताजित केँ मारि ओ मणि लऽ लेलक । सत्यभामा सँ ई समाचार सूनि कृष्ण बलराम केँ कहलथिन्ह-हे भ्राता श्री ! ई मणि हमर योग्य अछि । एकर शतधन्वान लेऽ लेलक । ओकरा पकरु । शतधन्वा ई सूनि ओ मणि अक्रूर कें दऽ देलथिन्ह आओर रथ पर चढ़ि दक्षिण दिशा मे भऽ गेलाह । कृष्ण-बलराम १०० योजन धरि ओकर पांछा मारलाह । ओकरा संग मे मणि नहि देखि बलराम कृष्ण केँ फटकारऽ लगलाह, “हे कपटी कृष्ण ! अहाँ लोभी छी ।” कृष्ण केँ लाखों शपथ खेलोपरान्त ओ शान्त नहि भेलाह तथा विदर्भ देश चलि गेलाह । कृष्ण धूरि केँ जहन द्वारिका एलाह तँ लोक सभ फेर कलंक देबऽ लगलैन्ह । ई कृष्ण मणिक लोभ सँ बलराम एहन शुद्ध भाय के फेज छल द्वारिका सँ बाहर कऽ देलाह । अहि मिथ्या कलंक सँ कृष्ण संतप्त रहऽ लगलाह । अहि बीच नारद (ओहि समयक पत्रकार) त्रिभुवन मे घुमैत कृष्ण सँ मिलक लेल ऐलथिन्ह । चिन्तातुर उदास कृष्ण केँ देखि पुछथिन्ह “हे देवेश ! किएक उदास छी ?” कृष्ण कहलथिन्ह, ” हे नारद ! हम वेरि वेरि मिथ्यापवाद सँ पीड़ित भऽ रहल छी ।” नारद कहलथिन्ह, “हे देवेश ! अहाँ निश्‍चिते भादो मासक शुक्ल चतुर्थीक चन्द्र देखने होएव तेँ अपने केँ बेरिबेरि मिथ्या कलंक लगैछ । श्री कृष्ण नारद सँ पूछलथिन्ह, “चन्द्र दर्शन सँ किएक ई दोष लगै छैक ।
नारद जी कहलथिन्ह, “जे अति प्राचीन काल मे चन्द्रमा गणेश जी सँ अभिशप्त भेलाह, अहाँक जे देखताह हुनको मिथ्या कलंक लगतैन्ह । कृष्ण पूछलथिन्ह, “हे मुनिवर ! गणेश जी किऐक चन्द्रमा केँ शाप देलथिन्ह ।” नारद जी कहलथिन्ह, “हे यदुनन्दन ! एक वेरि ब्रह्मा, विष्णु आओर महेश पत्नीक रुप मे अष्ट सिद्धि आओर नवनिधि के गनेश कें अर्पण कऽ प्रार्थना केयथिन्ह । गनेश प्रसन्न भऽ हुनका तीनू कें सृजन, पालन आओर संहार कार्य निर्विघ्न करु ई आशीर्वाद देलथिन्ह । ताहि काल मे सत्य लोक सँ चन्द्रमा धीरे-धीरे नीचाँ आबि अपन सौन्द्र्य मद सँ चूर भऽ गजवदन कें उपहाल केयथिन्ह । गणेश क्रुद्ध भऽ हुनका शाप देलथिन्ह, – “हे चन्द्र ! अहाँ अपन सुन्दरता सँ नितरा रहल छी । आई सँ जे अहाँ केँ देखताह, हुनका मिथ्या कलंक लगतैन्ह । चन्द्रमा कठोर शाप सँ मलीन भऽ जल मे प्रवेश कऽ गेलाह । देवता लोकनि मे हाहाकार भऽ गेल । ओ सब ब्रह्माक पास गेलथिन्ह । ब्रह्मा कहलथिन्ह अहाँ सब गणेशेक जा केँ विनति करु, उएह उपय वतौताह । सव देवता पूछलन्हि-गणेशक दर्शन कोना होयत । ब्रह्मा वजलाह चतुर्थी तिथि केँ गणेश जी के पूजा करु । सब देवता चन्द्रमा सँ कहलथिन्ह । चन्द्रमा चतुर्थीक गणेश पुजा केलाह । गणेश वाल रुप मे प्रकट भऽ दर्शन देलथिन्ह आओर कहलथिन्ह – चन्द्रमा हम प्रसन्‍न छी वरदान माँगू । चन्द्रमा प्रणाम करैत कहलथिन्ह हे सिद्धि विनायक हम शाप मुक्‍त होई, पाप मुक्‍त होई, सभ हमर दर्शन करैथ । गनेश थ बहलाघ हमर शाप व्यर्थ नहि जायत किन्तु शुक्ल पक्ष मे प्रथम उदित अहाँक दर्शन आओर नमन शुभकर रहत तथा भादोक शुक्ल पक्ष मे चतुर्थीक जे अहाँक दर्शन करताह हुनका लोक लान्छना लगतैह । किन्तु यदि ओ सिंहः प्रसेन भवधीत इत्यादि मन्त्र केँ पढ़ि दर्शन करताह तथा हमर पूजा करताह हुनका ओ दोष नहि लगतैन्ह । श्री कृष्ण नारद सँ प्रेरित भऽ एहिव्रतकेँ अनुष्ठान केलाह । तहन ओ लोक कलंक सँ मुक्‍त भेलाह ।
एहि चौठ तिथि आओर चौठ चन्द्र केँ जनमानस पर एहन प्रभाव पड़ल जे आइयो लोक चौठ तिथि केँ किछु नहि करऽ चाहैत छथि । कवि समाजो अपना काव्य मे चौठक चन्द्रमा नीक रुप मे वर्णन नहि करैत छथि । कवि शिरोमणि तुलसी मानसक सुन्दर काण्ड मे मन्दोदरी-रावण संवाद मे मन्दोदरीक मुख सँ अपन उदगार व्यक्‍त करैत छथि – “तजऊ चौथि के चन्द कि नाई” हे रावण । अहाँ सीता केँ चौठक चन्द्र जकाँ त्याग कऽ दियहु । नहि तो लोक निंदा करवैत अहाँक नाश कऽ देतीह ।
एतऽ ध्यान देवऽक बात इ अछि जे जाहि चन्द्र केँ हम सब आकाश मे घटैत बढ़ैत देखति छी ओ पुरुष रुप मे एक उत्तम दर्शन भाव लेने अछि । जे एहि लेखक विषय नहि अछि । हमर ऋषि मुनि आओर सभ्य समाजक ई ध्येय अछि, मानव जीवन सुखमय हो आओर हर्ष उल्लास मे हुनक जीवन व्यतीत होन्हि । एहि हेतु अनेक लोक पावनि अपनौलन्हि, जाहि मे आवाल वृद्ध प्रसन्‍न भवऽ केँ परिवार समाज राष्ट्र आओर विश्‍व एक आनन्द रुपी सूत्र मे पीरो अब फल जेकाँ रहथि ।
साभार : मिथिला अरिपन 
पुनः साभार - इसमाद 

मंगलवार, 30 अगस्त 2011

गवाह बनल श्रीराम सेंटर मैथिलीक एकटा अद्भुत रंगमंच क, मनाओल गेल "मुक्ति पर्व".



काल्हि सोंसे श्रीराम सेंटर मिथिलाक रंग में डूबल छल, एहन लागि रहल जेना मिथिला आय दिल्ली म उतैरी गेल। मौका रहे मैथिली लोक रंग (मैलोरंग) क तत्वाधान म अविनाश चन्द्र मिश्रक नाटक 'मुक्ति पर्व' क। जेकर अनुवाद केलैथि अछि जीतेन्द्र झा आ निर्देशित केलैथि युवा निर्देशक प्रकाश झा।
साँझक ७ बजे जखन हॉल क परदा उठल आ हाथ में बांसक चंगेरा लेने मैथिली गीत गुनगुनायत मैथिली लोक रंगक दिग्गज कलकार मंच पर आयल त एक बेर एहन लागल जेना मिथिला एते उतैर गेल छल।
मिथिलाक पारंपरिक नटुआ नाच शैली में प्रस्तुत एही नाटक क मंचन अद्भुत छल। भाई बहिनक प्रेम स सरोबार एही नाटकक हरेक अभिनेता आ अभिनेत्री अपन अपन चरित्र संगे संपूर्ण रूप स न्याय केलक। शुरुआत म मंचक सूत्रधार क रूप म जखन निलेश जी आ विपटा क रूप में संतोष जी मंच पर आयल त सभगोटे के थपड़ी रुकय क नाम नै लए रहल रहे। फेर मंच पर आयल मुकेश झा जी जे चुड़क के चरित्र क जीवंत कए के एक बेर फेर अपन अभिनय क लोहा मनेलक। सामा क रूप में सपना आ साम्ब क रूप में अभिनेता अनिल सेहो अपन भूमिका क संग नीक जोंका न्याय केलक। कुल मिलाके दू घंटा क ई नाटक दर्शकक भरपूर मनोरंजन केलक आ दर्शक लोकैनि के थपड़ी क रोकि नै सकल।
मैलोरंगक ई शानदार प्रस्तुति म कनीटा कमी सेहो छल, उद्घोषिका क रूप म कुमकुम जीक उद्घोषणा दर्शक म जोश पैदा नै क सकल आ दर्शक लोगैन क जे आस अछि हुनका स ओ पूरा नै भ सकल, संगे कखनो कखनो बैकग्राउंड संगीत म भी कमी बुझा पड़ल अभिनेता आ अभिनेत्री क संग हुनकर तालमेल किछु कम लागल।
मुदा एही सभ कमी क मैलोरंगक मांजल आ कुशल अभिनेता आ अभिनेत्री क बीच किछु नै बुझायल आ जे मनोरंजन क दर्शक आशा करि रहल रहे ओ हुनका पूर्ण रूपेण भेटल।
एकटा आर गप जे सबसे बेसी जरुरी छल ओ ई जे मैथिली नाटकक इतिहास मे शायद इ पहिल बेर छल जे श्रीराम सेंटर सभागार व्‍यवसायिक रूप स खचाखच भरल छल। व्यवसायिक एही लेल कियाकि पहिल बेर मैलोरंग अपन नाटकक लेल सौ टकाक टिकट राखलक रहे। मुदा तखनो पूरा श्रीराम सेंटर खचाखच भरल छल।
 इ मैलोरंग क मेहनतक प्रति लोक क विश्‍वास आ मैथिली रंगमंच क व्‍यावसायिक भविष्‍य कए रेखांकित करैत अछि।
सभागार मे दर्शक क रूप मे विहार विधान सभाक सदस्‍य बिनोद नारायण झा, इसमाद क संपादक कुमुद सिंह, मोहल्ला लाइव क संपादक अविनाश दास, हेल्लो मिथिलाक हितेंद्र जी, मैथिली नाटकक लोग किसलय कृष्ण संगे  कईटा विशिष्‍ट लोक उपस्थित छलथि। नाटकक बाद युवा निर्देशक आ मैलोरंग संस्‍थाक संस्‍थापक निदेशक प्रकाश झा उपस्थित दर्शक लोकनि और कलाकार कए धन्‍यवाद ज्ञापित केलथि आ कर्यक्रम समाप्ति क घोषणा केलक।