शनिवार, 12 जनवरी 2013

युवा मैथिल भेल पृथक मिथिला राज्य के लेल आगू ( डेल्ही जंतर - मंतर -22 मार्च से 25 मार्च - 2013)


 युवा मैथिल भेल पृथक  मिथिला राज्य के  लेल  आगू ( डेल्ही जंतर - मंतर -22 मार्च से 25 मार्च - 2013)    
    प्रीय मैथिल,
मिथिला राज्यक लेल चारि दिनक अनशन एहि बातक घोतक अछि जे,सार्थक्ता आब एहि आंदोलन सँ जुड़ि रहल अछि। ई कोनो साधारण निर्णय नहि अछि अपितु,पांडित्य आ परीधीक आवरण तोरि आब आंदोलन अपन सार्वभौमिकताक दीश अग्रसर बुझना जाइत अछि।एहि मे कोनो शंका नहि अछि जे,दशियों सँ काबिल आ कर्मठ लोक मैथिली आ मिथिलाक आंदोलनक आधुनिक स्वरूप के संरक्षन दैत रहलाह मुदा आब एहि स्वरूप के परीधीक दायरा सँ बान्हल नहि राखल जा सकैत अछि आ तैं हम पुर्ण रूपें एहि अनशन के समर्थन करैत छी। इश्वर हुनका एहि कठिन निर्णयक काल मदद करैथि।प्रवीण जी, अहिंक पोस्ट सँ हमरा ई समाचारक ग्याँत भेल तैं हुनकर नाम जानबाक इक्षा हमरा जरूर अछि।
एहन बहुतो लोक छथि जे,सक्षम छथि मिथिलाक एतिहासिक दृष्टिपटल पर अवतरित होयबाक लेल।सूचना क्रांतिक एहि दौर मे हमरे अहाँ के हिनका आगू बढेबाक साधन तैयार करय पड़त आ तखने ओहि परीधी आ परिसीमा सँ हम एहि आंदोलन के बाहर निकालि सकैत छी।हमर मन्तव्य सँ ई तातपर्य नहि होयबाक चाही जे,कियो ओहि परीधीक निर्माणक दोषी छथि मुदा एहि काल मे सबहक सहभागिकताक जरूरत अछि आ एहि समय हम व्यापकतताक विरोधी नहि भय सकैत छी।
हम याद दियाबी जे,८ जनवरीक कमला नेहरू लाइब्रेरीक मिथिलांचल विकास सेनाक कार्यक्रम के ओहि ठामक मिडिया अधिक रास सराहना कैलन्हि अछि।ई खुशीक गप्प अछि जे मिडियो तत्पर छथि एहन तरहक आंदोलन के अमली जामा पहिरेवाक लेल। एहि मे रत्नेशवर झा जीक,मिथिला मुक्ति मोर्चाक सरोज झा जीक,प्रवीण जीक ओ सनेस जे आदित्य जीक माध्यम सँ प्रसारित भेल आ खास क हम सब सँ बेसी प्रभावित भेलहुँ आदित्य जीक नैन्ह कालक तेज आ कर्मठता सँ। आदित्य जी हमर बेटाक तुरिया छथि ओ १२वीं मे छथि मुदा हुनकर अदम्य शाहस आ विद्दुता समस्त मिथिलांचलक मष्तक के गौरवान्वित कय सकैत अछि। मुदा हमरो अहाँक कर्तव्य अछि जे एहि नव पौध के संरक्षण प्रदान करी।
हम समस्त मैथिल चाहे ओ कोनो संगठन वा संस्था सँ जुड़ल छी अपन मात्रीभूमिक रक्षार्थ आगू आयल छी। ककरो कम आ बेसी योगदान सँ जतेक एहि लड़ाई के नहि लड़ल जा सकैत अछि ताहि सँ बेसी समस्त मैथिलक समानैतिक सोच आ सम-भाव सँ। तैं हम समस्त मैथिल सँ आग्रह करब जे कवि एकांत जीक अनशन के समर्थन करी आ आदित्य जी सन मैथिल पुत्र के प्रतिभाक अवलोकन जरूर होयबाक चाही। हमरा गर्व अछि जे हम मैथिल छी आ माँ जानकी सँ ऎह कामना जे,हमर अनेको जन्म एहि मा्त्रीभूमिक सेवा मे समर्पित होयबाक प्रेरणा सँ ओत-प्रोत हो। जय मिथिला,जय मैथिली।



घर- घरमें चूल्हि जरय हर हाथके काज चाही
अप्पन सरकार हो, हमरा मिथिला राज चाही

डोम-चमार-पासवान,मुसहर-सोनार-मुसलमान
मैथिल- अभिमान युक्त सर्वहारा समाज चाही

धर्म कर्म मर्म ज्ञान , हम बांटि देलहुं दुनियाके
पूजा पाठ अजान संग तिरहुतिया नमाज चाही

पूरब पच्छिम दलान, उत्तर दक्खिन मचानसं
देश-संसदमें गूंज हो ,जोर मैथिल आवाज चाही

------------------भास्कर झा 



एक युवा मिथिला राज्यलेल कैल जा रहल माँग हेतु धरनामें तीन बेर सहभागी बनैत छथि आ हुनका हृदयमें जागृति जगैत अछि जे हमहुँ किछु करी - एवम् प्रकारेन ओ निर्णय करैत छथि जे ४ दिन के अनशन करब। कतेक पैघ बात भेलैक! एहि बात के लेल हुनका आशीर्वाद आ सहयोग के बात नहि कय हजारो तरहक प्रश्न सँ घेरघार कैल जाय, केओ अनुभवहीन कहि अपन अक्खडवादी विचार सँ बेधैथ तऽ केओ औकात सऽ बेसी खोंखी करैत कहैथ जे फल्लाँ रहता तऽ हम या हमर संस्था सहयोग नहि देत, आदि-आदि!

तहिना दोसर युवा जे देखैत छथि बदतर हालत आ दयनीय अवस्था सँ निकैल रहल मिथिला राज्य लेल धरना प्रदर्शन, लेकिन गप देखैत छथि गंभीरादेवी के जितैत तऽ हुनको मन में उद्वेग लैत छन्हि जे धू! ई किदैन-कहाँदैन भऽ रहल अछि आ वास्तविकत लडाई नहि बस सांकेतिक नाममात्र लेल आन्दोलन चलि रहल अछि। तऽ कि मिथिला राज्य सचमें चाही, आ कि बस धूरखेल भऽ रहल अछि? हिनकर जिग्यासा के सेहो शान्त करबाक लेल बेईमानी आ धूरखेल बन्द करैत एक गंभीर प्रयास के आवश्यकता छैक। कहियो युवावस्थामें शुरु कैल मिथिला-मैथिली लेल लडाई आब वृद्ध हड्डी बनि के रहि गेल छथि, लेकिन मिथिला राज्य के माँग कतेक दूर धरि सफलता पौलक तेकर कोनो लेखा-जोखा किनकहु लग नहि। बात बुझू! आम मैथिल तक कोनो आन्दोलन के चर्चो तक नहि पहुँचल। बहुत बात छैक। आत्ममंथन करय वाला बात थिकैक ई सभ। मिथिला राज्यके मजाक जुनि बनाउ। मिथिलाक अस्मिता के जोगेबाक लेल शीघ्रातिशीघ्र किछु करबाक बात टा करू। तकनीकी बात सभ अहाँ सभक मुँह सँ शोभा नहि पबैछ। दुनियामें जेकरा अपन इज्जत के खयाल छैक से संगठित भऽ के लडलकैक आ तदोपरान्त न्याय पेलकैक। अहुँ सभ न्याय लेल लडू। जनता नहि बुझि रहल अछि ताहि लेल जे मोन में अबैत अछि से कय लैत छी आ नाम दऽ दैत छियैक जे धरना केलहुँ..... से युवा में जे कर्मठ विचारधाराके अछि तेकरा सभके नीक नहि लगैत छैक। काज करय पडत। आब अहाँ सभ युवा के आगू राखि के काज करू आ देखियौक जे कतेक जल्दी मौसममें परिवर्तन अबैत छैक।

जखन ठानि लेलहुँ किछु खास करब
तऽ मानि जाउ किछु भऽ के रहत!
बड भेल धूरखेल सँकेत लडाइ
आब अन्तिम बेर कर जोडैत छी!
सहिष्णु मैथिल शान्तिक पूजारी
जुनि क्राँति शाँति सँ खूनी बनय!
चलय कलम सदिखन मानव
लेकिन मैथिलक पहचान बनय!
राज्य मिथिलाक बस एक उपाय
जे बनि के रहय, जे बनि के रहय!

सोमवार, 31 दिसंबर 2012

मिथिला कऽ संस्कृति अनुपम : गृहमन्त्री – करुणा झा



मिथिला कऽ संस्कृति अनुपम : गृहमन्त्री  – करुणा झा

मिथिला कऽ संस्कृति जौ नई रहत तऽ नेपालक पहचान नई रहत, 
मिथला सँ मात्र अहि देश के पहचान अछि । आ विद्यापति पुरे राष्ट्रकारी छथि, एहन कहब अछि गृहमन्त्री आ उपप्रधानमन्त्रीको विजय गच्छेदार अपन प्रमुख अतिथी के आसन बाजैत विराटनगर में विद्यापति स्मृति पर्व के अवसर पर कहलनि ।

    मैथिली सेवा समिति, के आयोजना में विराटनगर में (१३–१४) यानी २८–२९ दिसम्बर के विद्यापति सृमति पर्व पुरे धूमधाम आ हर्षौल्लास के संग सम्पन्न भेल अछि । मैथिली सेवा समिति के अध्यक्ष शंभू नाथ झा के अध्यक्षता तथा नेपालक गृह एवं उपप्रधानमन्त्री विजय गच्छेदार के प्रमुख आतिथ्य मे पडोसी देश भारत के विभिन्न प्रान्तक के व्यक्तित्व लोकनि उपस्थित छल । फारविसगंज के सांसद सुखदेव पासवान अररिया के विधायक तथा पटना के मैथिली आकादमी के व्यक्ति लोकनि सब मिथिला राज्य दुनु देश में अपरिहार्य रहल बतौलनि । अई समारोह में मिथिला के कला संस्कृति सँ संबन्धित प्रदर्शनी सेहो लगायल गेल छल । मशहुर मिथिला चित्रकार एस.सी. सुमनद्वारा एकल मिथिला चित्रकला प्रदर्शनी लगाल छल । मैथिली साहित्य के पुस्तक सब सेहो छल ।

    कार्यक्रम क शुरुआत मिथिला के अहिबात पातिल में दीप जरा क प्रमुख अतिथी उद्घाटन केलनि आ मिथिलाञ्चल के मशहुर गायक विरेन्द्र झा, संजय यादव आ अनु चौधरी विद्यापति रचित गोसाउनी गीत सँ शुभारंभ केलनि ।

    अहि अवसर पर मैथिली सेवा समिति तथा दहेज मुक्त मथिला के तरफ सँ किछु विशिष्ट व्यक्ति सबके सम्मान सेहो कएल गेल । दहेज मुक्त मिथिला के दिस सँ विना दहेज के विआह केनिहार दु टा मैथिल वर के मिहर  झा आ चन्दन झा जी के सम्मान पत्र आ उपहार देल गेलनि । उद्घाटन सत्र में पटना के देवेन्द्र झा, राँची के सियराम “सरस” आ राजविराज सँ अमरकान्त झा, करुणा झा लोकनि अपन अपन मन्तव्य व्यक्त केने रहथि । सम्पूर्ण कार्यक्रम के संचालन मैथिली सेवा समिति के महासचिव प्रवीण नारायण चौधरी केलनि ।


मंगलवार, 27 नवंबर 2012

प्रेस विज्ञप्ति " मैलोरंग"

प्रेस विज्ञप्ति

आगामी 26 – 30 दिसम्बर, 2012 तक मलंगिया नाट्य महोत्सव; मैलोरंग, दिल्ली द्वारा स्थानीय श्रीराम सेंटर, मण्डी हाउस, नई दिल्ली – 01 मे प्रति दिन सायं 6.30 बजे स’ आयोजित कयल जायत.

मलंगिया नाट्य महोत्सवमे भारतक संग नेपालक कुल पाँचटा नाट्य संगठन नाटककार महेन्द्र मलंगिया लिखित विभिन्न नाटकक मंचन करत. मैथिली रंगमंचमे एहि प्रकारक ई पहिल आयोजन थिक जे कि कोनो एक नाटककार पर केन्द्रित होइ. एहि नाट्य महोत्सवमे नाटककार मलंगियाक चर्चित पाँच नाटक क्रमश: ओकरा आँगनक बारहमासा, गाम नै सुतैए, छुतहा घैल, जुआयल कनकनी आ ओरिजनल काम चयनित कयल गेल अछि.

- प्रकाश झा
महोत्सव प्रबंधक
निदेशक, मैलोरंग

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

की विलुप्त भ जाएत “मैथिली”

सुनील कुमार झा
सुनबा मे अजीब सन लागि सकैत अछि आओर शायद कनि कटू सेहो लागि सकैत अछि मुदा भारतीय जन भाषाई सर्वेक्षण क पहिल रिपोर्ट स त किछु एखने प्रतीत भ रहल अछि। करीब तीन सौ स बेसी भारतीय भाषा दम तोडि चुकल अछि। किछु भाषा आईसीयू मे पडल अपन अंतिम साँस गिन रहल अछि। मुदा मैथिली क स्थिति आन भाषा स विपरित अछि एकरा लगातार तोडल जा रहल अछि। एहि दिस मिडिया क ध्यान त नहिये अछि पश्चिमी सभ्यता क रंग मे रंगल समाज सेहो अनभिज्ञ भ गेल अछि। भाषा मानव संचार क मूल आधार अछि, मुदा फेर इ सेहो लगैत अछि जे एहि तरह क निर्मोही दृष्टि स जेना 2150 स बेसी समृद्ध भाषाई क्षेत्र वाला इ देश मे एकर कोनो महत्व नहि रहत।
आइ स किछु 80 वर्ष पहिने भारत क पहिल भाषाई सर्वेक्षण भेल छल। अंग्रेज अधिकारी जोर्ज ग्रियर्सन क अगुवाई मे भेल सर्वे क अनुसार मैथिली बिहार आओर आजुक झारखण्ड मे प्रमुखता स पसरल भाषा छल। जेकरा मानवी स्वार्थ आओर राजनैतिक कलह क कारण विभिन्न भाषा (जेकि क्षेत्र विशेष क आधार पर विकसित कैल गेल) मे बांटल जा रहल अछि। एकटा अखंड मैथिली तोडि-तोडि कए अंगिका, बज्जिका आओर न जानि की की बनेबाक प्रयास कैल गेल। ओना ग्रियर्सन क बाद एहि भाषा क सुध लेनिहार कियो नहि भेलाह, किछु छिटपुट काज भेल, मुदा राजनैतिक आस्थिरता आओर साहित्‍य मे कलह क कारण ओ कोनो प्रभाव नहि छोडि सकल। आब करीब आठ दशक बाद भारतीय जन भाषाई सर्वेक्षण ( पीपुल्स लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ़ इंडिया) भाषा पर एक बेर फेर गंभीर काज केलक अछि। इ छह खंड मे अपन पहिल रिपोर्ट प्रकाशित केलक अछि, जे कि भारतीय भाषा क किछु अनछुअल पहलु कए उजागर करैत अछि। सर्वे क अध्यक्ष गणेश देवी क अनुसार भारत क 20 प्रतिशत भाषा विलुप्त भ चुकल अछि। एखन धरि केवल ग्यारह राज्‍य मे भेल सर्वेक्षण क इ परिणाम अछि। एहन मे इ अपूर्ण रिपोर्ट कहैत अछि जे करीब 310 स बेसी भाषा विलुप्त भ चुकल अछि आ छह सौ स बेसी भाषा अपन अंतिम पड़ाव मे अछि। इ सब देख सुन कए लगैत अछि जे कहीं अगिला नंबर अपन त नहि? अटल सरकारक अथक प्रयास क फलस्वरूप मैथिली संविधान क आठम अनुसूची मे जगह त पाबि लेलक मुदा राज्‍य सरकारक बेरुखी आ मैथिली कए खंडित करबाक कुचक्रक मे भागीदार बनि कहीं हम एहि भाषा कए लुप्‍त करबाक काज त नहि करए जा रहल छी।
जनगणना क अनुसार सेहो भारतीय भाषा क ग्राफ देखब त ओ सेहो कम नहि चौकायत, 1961 क जनसँख्या क अनुसार 1652 मातृभाषा दर्ज कैल गेल अछि, जे 1971 क जनगणना तक केवल 109 रहि गेल। इ आंकडा शर्मनाक कहल जा सकैत अछि। मैथिल समाज मे पसरि रहल बहुभाषी संस्‍कृति क कारण बिहार-झारखण्ड सन गढ़ मे सेहो लोक अपन मातृभाषा हिंदी दर्ज करा रखने छथि, जखनकि मैथिली सूची स गायब करि देल गेल। आइ स्थिति इ भ चुकल अछि जे हमर बीच भाषाई अंतराल एतबा बढि गेल अछि जे हम कोनो भाषा (अपन मातृभाषा त कए) क एक वाक्य पूरा-पूरा आओर शुद्ध-शुद्ध लिख या बाजि नहि सकैत छी।
भाषा क सम्बन्ध मे भेट रहल लगातार जानकारी कही इ चेतावनी त नहि द रहल अछि जे अगिला नंबर हमरे छी। की मैथिली सेहो इतिहास बनि कए रहि जाएत, कही एहन त नहि जे मैथिली क संबंध मे कहल जाए जे इ लुप्‍त भ गेल जखन कि विभिन्‍न रूप मे इ समाज मे अपन यात्रा जारी रखने रहे। जाहि रूप मे मैथिली कए तोडल जा रहल अछि ओहि मे कोनो संदेह नहि जे मैथिली क अस्तित्‍व रहितो कहल जाए जे इ भाषा कहियो अस्तित्‍व, चर्चा आओर चलन मे मौजूद छल ! कनि सोचियउ…?

“मैथिल भ कए जे नहि बजय मैथिली”
” मोन होइत अछि हुनकर कान पकडि कए अईंठ ली”

साभार - इसमाद  ( www.esamaad.com )

नायिका क बाट तकैत मैथिली रंग मंच

नीलू कुमारी / सुनील कुमार झा

मैथिली रंग-मंच पर महिलाक स्थिति पहिने से बेहतर भेल अछि, मुदा एखनो एकरा बेहतर नहि कहल जा सकैत अछि। मैथिली रंगमंच आइ अपन उन्‍नतिक बाट पर अछि। मैथिली नाटकक मंचन एकटा काल अंतराल मे देखबा लेल भेट रहल अछि। पुरान डीह जरूर नष्‍ट बा कमजोर भ गेल, मुदा नवका दलान अपन भूमिका स मैथिली नाटकक भविष्‍य कए प्रकाशवान केने अछि। एहन मे मैथिली नाटक मे महिला क भागीदारी आ योगदान पर चर्च आवश्‍यक भ गेल अछि। आइ जेना आन भाषाक नाटक मे महिला क भागीदारी देखबा मे भेट रहल अछि, ओहि अनुपात मे मैथिली मंच पर महिला क उपस्थिति एखनो बहुत कम अछि। किछु महिला जे मंच तक पहुंचलथि अछि ओ टीवी आ सिनेमा दिस बेसी सक्रिय भ गेल छथि। नव कलाकार कए सेहो टीवी चैनल बझेबा मे लागल रहैत अछि, एहन मे मैथिली नाटक नीक नवोदित कलाकार क सदिखन बाट तकैत आयल अछि आ एखनो ताकि रहल अछि।

किया नहि अछि नीक स्थिति :
महिलाक स्थिति त अन्यान्यभाषक रंगमंच पर सेहो नीक नहि अछि मुदा मैथिली सबस पाछु अछि। अन्यान्य भाषक महिलाकर्मी द्वेष भावना स ऊपर उठि समूह क संग काज करैत आगाँ बढैत रहलीह ताहि लेल हुनकर स्थिति मैथिली स नीक अछि। मिथिला मे जे महिला हिम्मत क कए एक्को डेग बढाबैत छथि त आन सब हुनका पकैड़ि कए दू डेग पांछा कए दैत अछि। समूह भावनाक सर्वथा आभाव त अछि संगहि सामाजिक प्रतारणा आ उलहन हुनकर मनोबल कए आर तोड़ि कए राखि दैत अछि। मैथिली रंगमंच पर महिला क उपस्थिति तखने बढत जखन महिला व्यक्तिगत स्वार्थ स ऊपर उठि समूह भावना मे काज करैत आ हुनकर घरक लोक सब आ समाज सेहो हुनकर एही काज कए सराहना करत।
नाटक मे मिथिलानी : मैथिली रंगमंच पर महिला क आधारित कतेको नाटक लिखल गेल आ मंचन कैल गेल मुदा महिलाक स्थिति मे कोनो सुधार नहि क सकल। फेर चाहे ओ 1905 मे जीवन झाक लिखल ‘सुन्दर संयोग’ हो वा गोविन्द झाक बसात, कनिया-पुतरा, मधुयामिनी या सातम चरित्र, ओ फेर जगदीश प्रसाद मंडलक लिखल ‘मिथिलाक बेटी’ हो वा झामेलियाक बियाह, बेचन ठाकुर क बेटीक अपमान वा छिनारदेवी हो, आनंद झाक धधायत नबकी कनियाक लहास, सबटा मे महिलाक चरित्र कए केंद्र मे रखाल गेल अछि। बहुत रास नाटक क मंचन सेहो भेल छल मुदा महिलाक कमी क कारण कतेक नाटक मे महिला कलाकार क भूमिका पुरुष केलथि। मुदा समय क संग किछु माहौल बदलल आ मैथिली रंगमंच पर महिलाक खगता कम होइत गेल।

निर्देशन मे सेहो :
मैथिली रंगमंच पर महिलाक निरंतरता लेल रंगमंचक निर्देशक सेहो महती भूमिका निभा रहल छथि। ओ नहि केवल महिलाक रंगमंचक सकारात्मक पक्ष स अवगत करा रहल छथि बल्कि हुनकर प्रतिभा कए बुझैत हुनकर भीतरक कलाकार कए सेहो जगा रहल छथि। ओना रंगमंच पर जे महिला स्थिति आइ सकारात्‍मक रूप स बढल अछि तहि मे सबस बेसी योगदान निर्देशक सब कए जाइत अछि। प्रकाश झा सन किछु निर्देशक समाज स लड़ि कए उलहन उपराग सुनि कए रंगमंच स महिला कए जोडि रहल छथि। एही कड़ी मे श्‍याम भाष्‍कर, संजयजी, अक्‍कू, बेचन ठाकुर आदि निर्देशक क नाम सेहो प्रमुखता स लेल जा सकैत अछि। इ सब नित-प्रतिदिन महिला कलाकार कए बढ़ावा द रहल छथि। आइ महिलाक रंगमंच स सिनेमा दिस झुकाव एहि निर्देशक सबहक सबस पैघ सफलता आ चिंता दूनू अछि।
मैथिली रंगमंच पर महिलाक : एहि संबंध मे एखन धरि कोनो तथ्य परक सूचना त नहि अछि मुदा वरीष्ठ रंगकर्मी आ साहित्यकार विभूति आनन्द लिखैत छथि जे हुनकर गाम शिवनगर, जिला मधुबनी मे पहिल बेर 25 अक्टूबर, 1956 मे एकटा मैथिली नाटक महाराणा प्रताप क मंचन भेल छल, जाही मे दूटा मैथिल महिला कलाकार मंच पर उतरल छलीह। सोनादाइ आ सुधा कण्ठ नामक महिला मैथिली रंगमंचक इतिहास कए एकटा नव आयाम देलथि। मैथिली रंगमंच पर महिलाक ई संभवत: पहिल पदार्पण छल। ओकर बाद 1958 मे सुभद्रा झा मैथिली रंगमंचक इतिहास मे एकटा सशक्त हस्ताक्षर भेलीह जे बाद मे जा कए मीलक पाथर साबित भेलीह। ओना त भंगिमा आ अरिपण आदि रंगमंच पर अनके महिला कलाकार उपस्थित भेलीह, जाही मे प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’ सर्वाधिक उल्लेखनीय छथि। कलकत्ता मे सेहो अनेक बेर कतेक महिला कलाकार एलीह, कतेको त मैथिल नहिंयो रहैत मैथिली सीखी रंगमंच पर एलीह आ हुनका देखि बहुतरास महिलाक झुकाव एही दिशा मे भेल आ हुनके सबहक प्रयास स एही शीर्ष पर पहुंचलनि। आइ मैथिली रंगमंच महिलाक उपस्थिति स भरल पुरल अछि आ दिन दूना राति चौगुना, उतरोत्तर वृद्धि कए रहल अछि।
सामाजिक परंपरा रोकि रहल अछि बाट : मिथिला मे महिलाक अर्थ होएत अछि एक हाथ घोघ दोसर हाथ बच्‍चाक आंगुर। एहन स्त्री जे उम्र धरि अपन घरक चौखट नहि नांघने होए। एक त मिथिला मे स्त्रीक लेल कतेक सामाजिक धारणा आ दोसर नारीक प्रति पूर्वाग्रह हुनका अपन चौखट स पार नहि आबी दैत छैक दोसर सामाजिक उलहन आ अनुराग स ग्रसित भ मन भेला पर सेहो नहि आबि सकैत अछि। अखनो कतेक रास मिथिलानी प्रतिभा रहितो जे अपन घरक चौखट नहि नांघि पबैत अछि तकर सबसे पैघ कारण अछि हमर संस्कार आ सामजिक बंधन क देखावा। मुदा तखनो बदलैत जमानाक संग मिथिला बदलि रहल अछि आ मिथिलानी आब सेहो सशक्त भ रहल छथि। आब ओ नहि खालि अपन घरक चौखट नांघि कए सार्वजानिक मंच पर आबि रहल छथि बल्कि मंच पर स्थापित सेहो भ रहल छथि।
की अछि संभावना : संभावना क सवाल पर ढेर रास मिथिलानी जे मैथिली रंगमंच स जुडल छथि एक स्वर मे कहैत छथि जे “मैथिली रंगमंचक पर महिलाक स्थिति आब सुदृढ़ अछि आ दिन प्रतिदिन एही मे उतरोत्तर विकास भ रहल अछि। मिथिलानी आब रंगमंच स ऊपर उठि सिनेमा मे सेहो अपन भविष्य बना रहल छथि। मुदा ई मैथिली रंगमंचक दुर्भाग्य अछि जे एखन धरि महिला कलाकार पूर्ण रूप स व्यावसायिक रंगमंच क हिस्‍सा नहि भ सकलथि अछि। जे हिनकर विकासक क्रम मे सबसे पैघ रोड़ा अछि। कोनो कलाकारक स्थिति तखने सुधरत जेखन ओ व्यावसायिक होएत। रंगमंच पर खाली फ़ोकट क मनोरंजन आ समय बितेबाक साधन मात्र बुझला स कलाकारक विकास कखनो नहि होएत। संगठन क संग निर्देशक सब कए सेहो एही मे सहयोग करबाक चाही। मैथिलानी तखने आन भाषा-भाषाई रंगमंच संग डेग स डेग मिला कए चलि सकतीह अछि जखन ओ व्यावसायीकरण क हिस्‍सा बनतीह।

साभार - इसमाद (www.esamaad.com)

कतेक सत्य अछि मैथिली क ग्लोबलाइजेशन

भोजपुरी विकिपीडिया पर प्रमुखता स अपन जगह बना लेलक,मुदा मैथिली पछुआ गेल। इ मैथिल टेक-सेवी लेल चिंतन-मनन क विषय अछि संगहि सात करोड मैथिल क मुंह पर जबरदस्त थापर सेहो अछि जे एखनो धरि मैथिली कए आपसी द्वेष मतभेद स अंतरजाल पर जगह बनेबा स रोकि रहल छथि।
मैथिल एकरा लेल ओना सामूहिक प्रयास नहि करि सकलाह जेना भोजपुरी जगतक लोक केलक। अधिकतर मैथिल इन्टरनेटक प्रयोग मैथिली कए गरियेबा लेल आ क्षणभंगुर लोकप्रियता लेल करैत रहलाह अछि। एहन मे मैथिलीक ग्लोबलाइजेशन क सपना सपने रही सकैत अछि। किछु लोक जे एहि प्रयास मे छथि ओ सेहो थाकि हारि कए रहि जेताह। मैथिल क टांगघिच्चा प्रवृति स मैथिली क बंटाधार होइत आयल अछि आ इतिहास एक बेर फेर दोहरा गेल अछि।
इ’समाद किछु दिन पहिने राजेश रंजन, संगीता कुमारी आ हुनकर टीमक योगदान कए अहां सबहक समक्ष रखने छल। इ सब मैथिली मोजिल्ला क बीटा वर्जन बना इतिहास रचि देने छथि। राजेश रंजन सूचना प्रोद्यौगिकी मे मैथिली क स्थान क संबंध मे पूछला पर कहने छलाह जे मैथिली एप्लीकेशन क भविष्य एकर प्रयोक्ता पर निर्भर करैत अछि आओर प्रयोक्ता चाहत त एकर भविष्य उज्जवल आ अंधकारमय बना सकैत अछि। ओना गजेन्द्र ठाकुर सन प्रयोक्ता क योगदान कए सेहो उल्‍लेखनीय अछि, ओ लगातार विकिपीडिया स मैथिलीक विकासक लेल लडैत रहलाह अछि। मुदा एकटा सवाल अछि जे एना छिटपुट प्रयास स एतबा पैघ काज कोना भ सकत। आजुक समय मे ज्‍यों अंतरजाल पर एकटा सर्वे कराओल जाए जे कतेक प्रतिशत लोक अंतरजाल पर मैथिली एप्लीकेशन क प्रयोग करैत अछि त 70 प्रतिशत स बेसी क जवाब आउत “की मैथिली मे कोनो एप्लीकेशन छै?” प्रयोगक बात त छोडू। तिरहुत/मिथिलाक्षर क गप ज्‍यों छोडि दी तखनो देवनागिरी मे मैथिली लिखनिहार क प्रतिशत आंगुर पर गिनबा योग्य अछि। आब सवाल इ अछि जे हम एकर प्रचार-प्रसार पर ध्यान नहि द अनका गरियेबा मे किया लागल छी। अपन स्‍वार्थ लेल भाषाक उन्नति किया अवरुद्ध केने छी। साहित्य स ल कए सिनेमा तक, इतिहास स ल कए भूगोल तक, घर स ल कए बाजार तक आओर कलम स ल कए अंतरजाल तक मैथिली खाली अपन टांगघिच्चा प्रवृतिक शिकार भेल अछि। 2003 मे मैथिली कए संविधान क आठम अनुसूची मे शामिल कैल गेल, मुदा मैथिल एना चैन क निन्न सुतबा जेना लड़ाई ख़त्‍म भ गेल, जखन कि लडाई त शुरू भेल छल। लोक इ नहि बुझलक जे मैथिली एखन खाली अपन स्थान लेलक अछि, पहचान लेबा लेल बहुत काज बाकी अछि।
ओना कहबाक लेल त मैथिली, भोजपुरी स 800 साल पुराण अछि, हमर अपन लिपि अछि, साहित्य अछि, क्रमानुगत भाषाक विकास अछि आओर युग-युग स चलैत आबि रहल परम्परा अछि। मुदा जाहि प्रकार स हम चलि रहल छी की हम निरंतर रहि सकब, की हमर सतत यात्रा एहिना जारी रहत आकि हम मैथिली क टांगघिच्चा प्रवृति क शिकार भ बाट मे दम तोड़ी देब।
जाहि प्रकार स भोजपुरी दिन-दूना राति चौगुना तरक्की करि रहल अछि। फूहड़ गीत स एकटा वर्ग आ गंभीर लेखन स दोसर वर्ग मे पहुंच विश्व पटल पर छा रहल अछि, ओ करबा मे मैथिली पछुआ गेल अछि। मैथिली जतए गंभीर लेखन स अपना कए अलग करैत जा रहल अछि ओतहि तकनीकि रूप स सेहो काफी कमजोर भ रहल अछि। भोजपुरी गीत-संगीत आओर सिनेमा व्यवसायिकता क चरम पर अछि नित नब-नब चैनल, अखबार, पत्रिका आ वेबसाईट आबि रहल अछि आओर नब-नब प्रयोग क कए सबकए चौंका रहल अछि,मुदा मैथिली क गति बहुत धीमा अछि। मैथिलीक हाल एहन किया भेल। की हमर प्राचीन आ सुन्दर साहित्य खाली कागज क डिब्बा मे सिमैट कए रहि गेल अछि?
भिखारी ठाकुर क एकटा नाटक विदेसिया भारत क संगहि विदेश मे सेहो डंका बजा देलक, मुदा हम अखनो हरिनाथ झाक पाँच पत्र ल नेपाल स आगू नहि जा सकलहुं अछि। जखन कि मैथिल विश्व पटल पर छा गेल छथि। एकर एक मात्र कारण इ अछि जे हमर साहित्‍य स ल कए संगीत तक स्वार्थ सिद्ध करबाक साधन मात्र अछि। स्वार्थ सिद्ध लेल सब मैथिली क सेवक बनल छी।
आइ भोजपुरी विकिपीडिया पर प्रमुखता स आबि गेल, संविधान क आठम अनुसूची मे शामिल हेबा लेल प्रयासरत अछि , साहित्य आ संगीतक चर्चा अंतरराष्ट्रीय पटल पर भ रहल छै, किया त भोजपुरी अपना कए एकजुट रखने अछि। मैथिल मे प्रतियोगिता क बदला पर एक दोसर कए नीचा देखेबाक काज होइत अछि। भोजपुरी क एहि सफलता स उम्‍मीद कैल जाए जे सब नीक काज छोडि लोक कए गरियेबा मे लागल मैथिलक आंखि खुजत। कम स कम आब त अपन भाषाक सर्वांगीण विकासक गप सोचल जाएत। ओना ज्‍यों भाषा क विकास खाली कथा, कहानी, नाटक आ ग़ज़ल लिख देला स या साहित्य आकादमी स पुस्कार पाबि लेला स भ सकैत छल त बहुत भाषा संग मैथिली सेहो आइ आधुनिक भाषाक कतार मे देखाइत रहिते। भाषा क विकास तखने संभव अछि जखन हम अपन टांगघिच्चा प्रवृति कए छोडि, व्यक्तिगत स्वार्थ स ऊपर उठि, अपन भावी पीढ़ी लेल एकरा आधुनिक भाषा बनेबाक प्रयास करि। तखने मैथली ओ मुकाम पर पहुँचत जेकरा लेल ई वांछनीय छल।

साभार - इसमाद (www.esamaad.com) 

सोमवार, 13 अगस्त 2012

शिक्षा क मजबूत व्‍यवस्‍था आ डराइत सत्‍ता

उच्च शिक्षा लेल जाहि प्रकार स बिहार मे हंगामा मचल अछि आ केंद्रीय विश्वविद्यालय लेल जाहि प्रकार स राज्‍य आ केंद्र मे तनाव देखल जा रहल अछि, इ सब सोचबा लेल मजबूर क रहल अछि जे की सही मे बिहार कहियो शिक्षा क केंद्र छल आ की बिहार फेर शिक्षाक केंद्र भ सकैत अछि? की नालंदा स जे यात्रा शुरू भेल छल ओ यात्रा नालंदा पर जा कए रूकत या आगू बढत। की ‘बेरोजगार पैदा करबाक क फैक्ट्री’ क नाम स मशहूर भ चुकल बिहारक विश्वविद्यालय रोजगार क बाट देखेबा मे कामयाब होएत। फेर स ओहि मुकाम तक पहुचबा लेल इ बुझब बेसी जरूरी अछि जे हम ओहि मुकाम स नीचा कोना आबि गेलहुं। की बिना ओ कारण बुझने बिहार मे शिक्षा क विकास क नारा देनिहार शिक्षा क क्षेत्र मे बिहार कए फेर स अगिला पांति मे ढार क सकताह। किछु एहने सवालक उत्‍तर तकैत हमर (सुनील कुमार झा क ) इ शोधपरक आलेख अछि जे इ बुझबा मे मददगार होएत जे बिहार मे कोना कालखंड क संग शिक्षा क स्‍तर खंडित होइत गेल।…. मोडरेटर
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बिहार, ओ जमीन जाहि ठाम सत्‍ता अस्‍त्र-शस्‍त्र स बेसी ज्ञान स बदलैत रहल अछि। चाणक्‍य होइत बा महेश ठाकुर एहि जमीन पर कईटा एहन उदाहरण अछि जाहि स इ प्रमाणित होइत अछि जे सत्‍ता हथियार स नहि ज्ञान स पाउल जाइत अछि। एहन मे समाज मे ज्ञान क प्रसार सत्‍ता लेल हरदम खतराक कारण रहैत अछि। बहुत लोकक मानब अछि जे मगध कए मूर्ख बना ओकरा पर राज करबाक नीतिक तहत सन् 1123 मे बख्तियार खिलीजी नालंदा विश्वविद्यालय कए बर्बाद क बिहार क शिक्षा क संस्कृति कए तबाह करि देने छल। मुगल हुए बा अंग्रेज या फेर आजाद भारत मे लोकतांत्रिक नेता सब शिक्षा कए केवल गर्त मे ल जेबाक काज केलथि। अंगुरी पर गिनबा योग्‍य नाम भेटत जे बिहार मे शिक्षा लेल किछु केलथि बा करबाक प्रयास केलथि।
बख्तियार खिलीजी क इ नीति एतबा कारगर साबित भेल जे बंगाल जीतलाक बाद अंग्रेज सेहो एहि इलाका पर ओकर नीति कए जारी रखलक। बागी बिहार मे शिक्षा क विकास काफी कम गति स भेल जाहि स बिहार देशक आन हिस्‍सा स पाछु होइत गेल। 1608 मे जखन ईस्ट इन्डिया कम्पनी क फरमान लकए अंग्रेज हाकिन्स भारत आयल छल तखने ओकरा एहि जमीनक इतिहास बता देल गेल छल। 1813 मे जारी कंपनी चार्टर क अनुसार देशज भाषा आ विज्ञान क विकास लेल पैघ राशि जारी भेल, मुदा बिहार क राशि कए कलकत्‍ता, बांम्बे आ मद्रास रेजिडेंसी कए देल गेल। यूरोपिय ज्ञान आ अंग्रेजी पढाई लेल बिहार मे केवल एकटा स्‍कूल क चयन भेल, जे भागलपुर स्‍कूल छल।
1835 मे राजा राम मोहन राय आओर लॉर्ड मैकाले स प्रभावित भ लॉर्ड बेंटिक बिहार मे अंग्रेजी शिक्षा कए बढाबा देबा लेल प्रयास केलथि। बिहारशरीफ आ पूर्णिया मे अंग्रेज़ी शिक्षा केन्द्र क स्थापना भेल। अंग्रेजी कए बढाबा देबा लेल एकर जानकार कए सरकारी नौकरी मे राखए जा लागल। 1854 मे बिहार मे शिक्षा क प्रगति लेल अंग्रेज एकटा कमेटी गठित केलक जाहि स शिक्षा क उन्नति पर कार्य हेबाक छल, मुदा एकरा दुर्भाग्य कहल जाए या किछु आओर 1857 क क्रांति क बाद फेर ओ कमेटी दिस ककरो ध्‍यान नहि गेल। लोक लड़ाई क बीच पढाई कए बिसरैत गेल।
ओना दरभंगा महाराज उत्‍तर बिहार लेल अपन स्‍तर स अंग्रेजी स्‍कूल खोलबाक योजना तैयार केलथि। जेकर बावजूद 1899-1900 क दौरान बिहार मे अवर प्राथमिक स्‍कूलक संख्‍या महज 8978 छल। पटना विश्‍वविद्यालय सेहो 1917 मे जा कए स्‍थापित भ सकल।
आजादीक बाद राजनेता सेहो अंग्रेज क राखल नीव पर महल ढार करबाक स पाछु नहि रलाह। उपर स राजनैतिक अराजकता आ मुख्‍यमंत्री क आवाजाही क सबस बेसी असर शिक्षा पर देखल गेल। शिक्षाक स्‍तर मे समतलीकरण एहन भेल जे पटना विश्वविद्यालय जे देशक सातम पुरान विश्वविद्यालय छी, ओकर गरिमा तक ख़त्म भ गेल। आजादीक बाद बिहार मे शिक्षा पर पहिल पैघ चोट भेल केबी सहाय युग मे। 1967 मे केबी सहाय शिक्षा लेल ‘’सब धन 22 पसेरी’’ क फार्मूला अपनेलथि। सहाय बिहार क प्राथमिक स ल कए उच्‍च शिक्षा तक कए तहस-नहस क देलथि। इ बिहार मे आजादी क बाद शिक्षा लेल सबस खराब समय कहल जा सकैत अछि। ओ राज्‍य मे नव विश्‍वविद्यालय खोलबाक संगहि ओकरा लेल निजी कालेज कए आंखि मूंदि कए सरकारी मान्यता दैत गेलाह। एहि प्रकार स ओ कॉलेजक प्रतिष्‍ठा कए गर्त मे खसा देलथि। हुनक एहि नीति कए बाद मे जगन्‍नाथ मिश्र अंतिम मुकाम तक ल गेलाह। ज्ञात हुए जे केबी सहाय क कार्यकाल स पहिने बिहार मे केवल दूटा यूनिवर्सिटी छल। हुनक कार्यकाल मे भागलपुर, रांची आ मगध यूनिवर्सिटी बनल। एहि विश्‍वविद्यालय लेल ओ निजी कॉलेज सब कए एक दिस स सरकारी मान्यता दैत गेलाह, जाहि स कॉलेज क बीच अंतर मिटाइत गेल आ नीक कॉलेज सबक स्थिति सेहो दोयम दर्जा क होइत गेल।
कॉलेज आ विश्‍वविद्यालय मे अराजकता आ गुंडागर्दी संयुक्त विधायक दल सरकार आ बिहार आन्दोलन क दौरान शुरू भेल। 1969 मे परीक्षा क दैरान चोरी करबाक मांग करि रहल छात्र कए जिगर क टूकडा कहि सत्‍ता पर पहुंचल महामाया प्रसाद बिहार मे पहिल बेर गैर कांग्रेसी सरकार क मुखिया भेलाह। हुनक मंत्रिमंडल मे समाजवादी पार्टी क नेता कर्पूरी ठाकुर शिक्षा मंत्री बनलाह। ओ एकटा अजीब सन आदेश पारित केलथि जेकर नासूर एखन धरि बिहार कए कना रहल अछि। ओहि आदेशक अनुसार मैट्रिक मे पास करबा लेल अंग्रेजी अनिवार्य विषय नहि रहल। ताहि समय मे लोक “पास विदाउट इंगलिश” कए कर्पूरी डिविजन नाम देलक फलतः शिक्षा मे अंग्रेजी क स्तर एतबा खसल जे आइ धरि बिहारक छवि ओहि स अपना कए दूर नहि क सकल अछि।
ओना 1972 मे जखन कांग्रेस क केदार पाण्डेय क सरकार बनल त ओ शिक्षा क स्‍तर उठेबाक प्रयास केलथि आ महामाया बाबूक जिगर क टुकडा सब कए सुधारबाक लेल किछु कठोर निर्णय लेलथि। पांडेय सरकार विश्वविद्यालय क जिम्मा अपन हस्तगत कैल आ सख्त आईएएस अधिकारी कए कुलपति आ रजिस्टार क पद पर बहाल केलक। एकर असर सेहो भेल। विश्वविद्यालय स गुंडाराज खत्म भेल। परीक्षा आ कक्षा बंदूक क साया मे सही मुदा सुचारू भेल। बिहार मे शिक्षा क संस्कृति पटरी पर लौट रहल छल, तखने केंद्र राजनीतिक मजबूरी मे केदार पांडेय कए मुख्‍यमंत्री पद स हटा देलक। एकर बाद संपूर्ण क्रांति क दौर आबि गेल आ विश्‍वविद्यालय अध्‍ययन स बेसी राजनीतिक मंच भ गेल। शिक्षा क सबटा व्यवस्था संपूर्ण क्रांति मे ध्‍वस्‍त भ गेल।
बिहार मे अगर शिक्षा क समाधी बनेबाक श्रेय ककरो देल जा सकैत अछि त ओ जगन्नाथ मिश्र क नाम होएत। जगन्नाथ मिश्र कहबा लेल कनिक कनिक दिन लेल तीन बेर मुख्‍यमंत्री भेलाह, मुदा हुनक नीति पीढी क पीढी प्रभावित करबा योग्‍य रहल। ओ केबी सहाय क नीति कए आगू बढबैत जाहि कॉलेज लग भवन तक नहि छल तेहन कॉलेज सब कए सरकारी घोषित क विश्‍वविद्यालय पर बोझ बढा देलथि। संगहि नीक आ अधलाह मे अंतर एतबा मिटा देलथि जे कोनो कॉलेज अपना कए कम आंकबा लेल तैयार नहि रहल। उपर स उर्दू कए दोसर राजभाषा क दर्जा द भाषाई शिक्षा कए राजनीतिक रंग सेहो प्रदान क देलथि। बिहार देश क पहिल राज्य भ गेल जाहि ठाम दोसर राजभाषा कए मान्‍याता भेटल।
डॉ साहेब स प्रसिद्ध जगन्‍नाथ मिश्र अपन तीनू कार्यकाल मे शिक्षा विभाग कए अपन राजनीति स्‍वार्थ क पूर्ति लेल उपयोग केलथि। हुनकर कार्यकाल मे शिक्षण संस्‍थान राजनीतिक अखाडा भ गेल। डा मिश्र टूटपुन्जिया कालेज सब कए विस्वविद्यालय क मान्यता दिया ओकर शिक्षक सब कए मनचाहा नीक कॉलेज मे पदसथापित करा देलथि। जाहि स प्रतिष्ठित कॉलेजक पढाई प्रभावित भेल। दोसर यूनिवर्सिटी बिल मे संसोधन करि कए बिहार क युनिवेर्सिटी सबहक पहचान ख़त्म क देलथि। नवका यूनिवर्सिटी बिल मे कोनो यूनिवर्सिटी क कर्मचारी कोनो यूनिवर्सिटी मे अपन स्थानांतरण करवा सकैत अछि। जग्ग्न्नाथ मिश्र अपने सबस पहिने एहि बिल क फायदा उठेलाह। ओ बिहार विश्‍वविद्यालयक एलएस कॉलेज स अपन तबादला पटना विश्‍वविद्यालयक बीएन कॉलेज मे करा लेलथि। एकर संगहि अपन किछु खास लोकक तबादला सेहो मनपसंद कॉलेज मे करबा देलथि। एहि संशोधन स छोट कॉलेजक शिक्षक पैघ कॉलेज मे चल गेल, मुदा ओहि स बेसी खतरनाक इ रहल जे बहुत अयोग्‍य शिक्षक बढिया कॉलेज मे जा ओकर प्रतिष्‍ठा कए खत्‍म क देलथि। एहन बहुत शिक्षक नीक कॉलेज पहुंच गेलाह जे कहियो न कक्षा लेने छलाह आ नहि प्रयोगशाला गेल छलाह। एहि स योग्‍य शिक्षक सब मे तनाव बढ़ब शुरू भेल आ ओ पढेनाई कम करैत गेलाह। जगन्‍नाथ मिश्र क कार्यकाल कुर्सी तबादला लेल सेहो प्रसिद्ध अछि। हुनकर कार्यकाल मे जखन कोनो नीक कॉलेज मे शिक्षक लेल जगह नहि रहैत छल त आन कॉलेज लेल आवंटित शिखक कोटा मे स एकटा पद ओहि प्रसिद्ध कॉलेज कए द देल जाइत छल। एहन उदाहरण देशक कोनो आन राज्‍य मे भेटब मुश्किल अछि।
1969 स 1990 तक बिहार मे शिक्षा एतबा गर्त मे पहुंच गेल छल जे लालू लेल बहुत किछु करबाक स्‍कोप नहि रहल। ओ चरवाहा विद्यालय क रूप मे दलित समाज क लोक कए आगू उठेबाक काज केलथि, हुनक नारा छल- घोंघा चुनने वालों, मूसा पकड़ने वालों, गाय-भैंस चराने वालों, शिक्षा प्राप्त करो । मुदा हुनकर इ योजना सेहो राजनैतिक अस्थिरता आ सत्ता परिवर्तन क कारण खटाई मे चल गेल। शिक्षा क हालत बद स बदतर होइत गेल। लालूक राज मे विद्यार्थी पलायन एकटा नव शब्‍द आयल। उदारवाद क बाद रोजगारपरक शिक्षा लेल बिहारक छात्र आन राज्‍य लेल पलायन शुरू केलक, जाहि स बिहार कए पैघ आर्थिक क्षति सेहो भेल।
2005 मे नीतीश राज आयल। विकास क नाम पर भेटल वोट स नीतीश सब क्षेत्र मे विकासक गप केलथि। उम्‍मीद जगल जे शिक्षा क क्षेत्र मे सेहो विकास होएत। मुदा पिछला सात मे शिक्षा क क्षेत्र मे कोनो खास काज नहि देखा रहल अछि। शिक्षकक नियुक्ति त भ रहल अछि, मुदा शिक्षाक स्‍तर नहि सुधरि रहल अछि, बल्कि एकटा एहन शिक्षित जमात पैदा भ रहल अछि जे मूर्ख होएत।
कुल मिलाकए महामाया प्रसाद स ल कए नीतीश कुमार तक पालतुकरण क नीति अपनाकए विश्वविद्यालय कए अपन राजनैतिक चारागाह बना रखने छथि। आंकडा पर गौर करि त 1970 स ल कए 1980 क बीच बिहार मे शिक्षा लेल सबस बेसी नीतिगत फैसला लेल गेल। एहि दौरान राज्‍य मे आठ टा सरकार बनल आ सात टा राज्‍यपाल बदलल गेल। चारि बेर राजभवन स सत्‍ता क केंद्र बनल। एहि कालखंड मे केवल पटना विश्‍वविद्यालय मे 11टा कुलपति नियुक्‍त कैल गेलाह। कुल मिला कए कियो स्थिर रूप स कतहु नहि काज क सकल। एहि दौरान शिक्षा मे व्याप्त राजनीति आ गुंडाराज कए देख कए जानल मानल शिक्षाविद डॉ वीएस झा एतबा धरि कहला अछि जे बिहार मे महाविद्यालय स्थापित करब एकटा लाभप्रद धंधा अछि बशर्ते संस्थापक राजनैतिक बॉस हुए या जनता क नज़र मे ओकर छवि एकटा दबंग क रहए।
बिहार मे वर्तमान शिक्षा : 25 हजार करोड स बेसी जा रहल दोसर राज्‍य
वर्तमान शिक्षा क अगर गप करि त उच्च शिक्षा लेल बिहार भारत मे एकटा एहन राज्‍यक रूप मे जानल जाइत अछि जाहि ठामक विद्यार्थी पर बाहरी राज्‍यक गैर सरकारी संस्थान अपन गिद्ध दृष्टि जमौने रहैत अछि। एकटा अध्यन मे इ दावा कैल गेल अछि जे सब साल बिहार स लगभग 25 हजार करोड टका बाहर जा रहल अछि। अध्‍ययन क मुताबिक उच्च शिक्षा लेल प्रतिवर्ष एक लाख छात्र बिहार स बाहर जाइत छथि। महाराष्ट्र, राजस्थान आ कर्नाटक सन राज्‍यक आर्थिक मजबूती मे बिहार स गैल टका एकटा महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बनि चुकल अछि। इ स्थिति तखन अछि जखन भारत क दसटा प्राचीन विश्वविद्यालय मे स तीनटा बिहार मे खंडहर बनल अछि। अध्‍ययन क अनुसार रहब, खाइब, पहिब आ अन्‍य मूलभूत सुविधा पर आन राज्‍य मे भ रहल खर्च कए छोडि दी त प्रति छात्र 70,000 टका सालाना ( जे कि किछु राज्‍य क इंजीनियरिंग मे प्रवेश लेल सरकारी फीस अछि) क हिसाब स 700 करोड़ होइत अछि (ज्ञात हुए जे एकर अलावा संस्थान डोनेशन क नाम पर सेहो काफी चंदा वसूल लैत अछि) बिहार स बाहर चल जाइत अछि। एकर अलावा प्रवेश दियेबाक नाम पर शिक्षा क दलाल क उगाही अलग अछि। बिहार स किछु एतबे राशि कोचिंग, गैर सरकारी संस्थान आ पब्लिक स्कूल क लेल सेहो बाहर जा रहल अछि। ओना आंकडा बता रहल अछि जे एखन धरि ए‍ि कोचिंग संस्थान मे ( एकाध कए छोडि दी त) कोनो छात्र राष्ट्रिय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोनो प्रतियोगिता मे अव्‍वल नहि आबि सकलाह अछि। सरकारी संस्थान क अगर गप करि त एहि मे स ज्यादातर भगवान् भरोसे अछि। किछु मे त व्यवस्था नहि त किछु मे शिक्षक नहि। राज्य क कईटा कॉलेज मे चलि रहल बीसीए पाठ्यक्रम लेल कंप्यूटर विभाग क अपन लैब तक नहि अछि। कईटा विभाग मे लैब अछि मुदा ओ बस नाम लेबा लेल, ओहि मे कोनो सामान नहि अछि। किछु एहने हाल पुस्तकालय सबहक अछि। बिहार क सब विश्वविद्यालय कए अपन पुस्तकालय रहबाक गौरव त अछि मुदा ओकर हालत बद स बदतर भ चुकल अछि। हवादार कोठली क त गप छोडू धुल धूसरित आलमारी सब स पुस्‍तक निकालबाक प्रयास करब कठिन अछि। कईटा किताब फाटल अछि त कईटा पढबा योग्‍य नहि रहल। नव किताब क खरीद क त गप जुनि करू। किछु सोधार्थी आ दान क फलस्वरूप किछु पुसतक नव भेट सकैत अछि। उच्‍च शिक्षा क प्रसारक हालत इ अछि जे मिथिला विश्‍वविद्यालय क बंटवारा भेलाक बावजूद आलम इ अछि जे मधेपुरा जिले मे स्थापित बी.एन. मंडल यूनिवर्सिटी असगर पाँचटा जिला कए बोझ उठेने अछि।
एक दिस देश क तकनिकी आओर उच्च शिक्षा क हजारटा संस्थान मे ओम्बुड्समैन क नियुक्ति हेबाक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री क घोषणा एखन मूर्त रूप नहि ल सकल अछि। जे शिकायत क निपटारा आ भ्रष्‍टाचार कए रोकबा मे मदद करत आ दोसर दिस केंद्रीय विश्वविद्यालय आ आईआईटी कए ल कए ओ राजनीति सेहो क रहल छथि जाहि कारण स एहि मे देरी भ रहल अछि जे चिंता क विषय अछि। एहन में केंद्र आ राज्‍य सरकार कए बिहार मे शिक्षा पर ध्यान देबाक चाही वर्ना बिहार मे विकास क रफ़्तार जाहि तेजी स बढि रहल अछि ताहि स कदमताल अगर शिक्षा क विकास नहि करत त इ विकास कखनो औंधे मुँह खसि सकैत अछि।


साभार - इसमाद.कॉम

बुधवार, 1 अगस्त 2012

पहिल विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान- श्री नवेन्दु कुमार झा केँ


विदेह सम्मान
- श्री नवेन्दु कुमार झा केँ पहिल "विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान



"पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल समदिया http://esamaad.blogspot.in/  अगस्त २०११ सँ सभ मास "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" सम्मानक घोषणा कएल जा रहल अछि। -समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा।

- सालक अन्तमे सर्वश्रेष्ठ मैथिली पत्रकारिता लेल ऐ १२ टा देल सम्मानमे सँ सर्वश्रेष्ठ श्री नवेन्दु कुमार झा केँ पहिल "विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान" देल जएबाक घोषणा भेल।

-दोसर चक्रक लेल अगस्त २०१२ सँ सभ मास "ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" सम्मानक घोषणा कएल जाएत।  अगस्त २०१३ मे हएत दोसर "विदेह पत्रकारिता सम्मान"क घोषणा।



"ऐ मासक सभसँ नीक समदिया" 


जुलाइ २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री   सुजीत कुमार झा  - जुलाइ २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री     सुजीत कुमार झा  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/07/blog-post_6412.html लेल देल गेल अछि ।

जून २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री   रूपेश कुमार झा "त्योँथ" -  जून २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री    रूपेश कुमार झा "त्योँथ"  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/06/blog-post_04.html लेल देल गेल अछि ।


मइ २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री  अमरनाथ झा -  मइ २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री   अमरनाथ  झा   केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/05/blog-post_21.html लेल देल गेल अछि ।


अप्रैल २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री  नवेन्दु कुमार झा -  अप्रैल  २०१२  क सभसँ नीक समदिया श्री  नवेन्दु कुमार झा   केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/04/blog-post_389.html लेल देल गेल अछि ।


मार्च २०१२ क सभसँ नीक समदिया - श्री आशीष अनचिन्हार -  मार्च २०१२  क सभसँ नीक समदिया-  मार्च २०१२   क सभसँ नीक समदिया  श्री आशीष अनचिन्हार  केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/03/blog-post_8433.html लेल देल गेल अछि ।


फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया श्री सरफराज सिद्दीक पप्पू फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया- फरबरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया श्री सरफराज सिद्दीक पप्पूकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_05.html लेल देल गेल अछि।

जनवरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया नवेन्दु कुमार झा
जनवरी २०१२ क सभसँ नीक समदिया-  नवेन्दु कुमार झा केँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.in/2012/01/blog-post_3943.html लेल देल गेल अछि।


दिसम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया राम भरोस कापड़ि भ्रमर
दिसम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया- राम भरोस कापड़ि भ्रमरकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.com/2011/12/blog-post_4671.html लेल देल गेल अछि।


नवम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया विनीत उत्पल
नवम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया- विनीत उत्पलकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट http://esamaad.blogspot.com/2011/11/vinit-utpals-rti-application-dated.html लेल देल गेल अछि।



अक्टूबर २०११ क सभसँ नीक समदिया एक बेर फेरसँ नवेन्दु कुमार झा
अक्टूबर  २०११ क सभसँ नीक समदिया- एक बेर फेरसँ नवेन्दु कुमार झाकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट  http://esamaad.blogspot.com/2011/10/blog-post_14.html लेल देल गेल अछि।



सितम्बर २०११ क सभसँ नीक समदिया-नवेन्दु कुमार झा
सितम्बर  २०११ क सभसँ नीक समदिया- नवेन्दु कुमार झाकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर पोस्ट  http://esamaad.blogspot.com/2011/09/blog-post_01.html लेल देल गेल अछि।



अगस्त २०११ क सभसँ नीक समदिया- उदय चटर्जी
अगस्त २०११ क सभसँ नीक समदिया- उदय चटर्जीकेँ चुनल गेल छन्हि। हुनका ई सम्मान हुनकर मिथिलाक विकाससँ सम्बन्धित समाद http://esamaad.blogspot.com/2011/08/blog-post_26.html लेल देल गेल छन्हि।



विदेह सम्मान
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान सेहो हएत विदेह सम्मानक घोषणा द्वारा

-ई घोषणा दिसम्बरक अन्त वा जनवरी २०१३ मे हएत
-मैथिली नाटक/ संगीत/ कला/ मूर्तिकला/ फिल्मक समानान्तर दुनियाँक अभिलेखन आ सम्मान कएल जाएत
-विदेह नाट्य उत्सव २०१३ क अवसरपर प्रदान कएल जाएत ई सम्मान।"



विदेह सम्मान
समदिया- पूनम मंडल आ प्रियंका झाक मैथिली न्यूज पोर्टल।विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक-सूचना-सम्पर्क-समाद पूनम मंडल आ प्रियंका झा।

अपन इलाकाक कोनो समाचार ऐ अन्तर्जाल (http://esamaad.blogspot.com/)पर देबा लेल , समाचार poonamberma@gmail.com वा priyanka.rachna.jha@gmail.com पर पठाउ वा एतए http://www.facebook.com/groups/samadiya/ फेसबुकपर राखू।"]

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव



फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ

साझा पुरस्कार (नेपालक साझा संस्थानक पुरस्कार) साझा लोकसंस्कृति पुरस्कार
-वि.सं. २०६७ प्राज्ञ रामभरोस कापड़ि भ्रमर

विद्यापति पुरस्कार कोषक पुरस्कार- मैथिली भाषा, साहित्य, कला संस्कृतिक लेल नेपाल सरकार द्वारा स्थापित नेपालमे सभसँ बड़का राशिक पुरस्कार। 

विद्यापति पुरस्कार कोषक लेल विभिन्न पाँच विद्यामे २०१२ (

२०६८ कातिक १८ गते नेपाल सरकार एक करोड रुपैयाक विद्यापति पुरस्कार कोषक स्थापना कएने छल, तकरा बाद र्इ पुरस्कार पहिल वेर देल जा रहल अछि।)
दु लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली भाषा साहित्य पुरस्कार मैथिलीक वरिष्ठ साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमलकेँ।
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली कला संस्कृति पुरस्कार शहीद रंजु झाकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली अनुसन्धान पुरस्कार डा. रामावतार यादवकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली पाण्डुलिपी पुरस्कार साहित्यकार परमेश्वर कापडिकेँ
एक लाखक नेपाल विद्यापति मैथिली अनुबाद पुरस्कार डा. रामदयाल राकेशकेँ


साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।


           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।



साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र


साहित्य अकादेमीक टैगोर साहित्य पुरस्कार

२०११- जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, लघु कथा संग्रह)


साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)

१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)

१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)

१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)

१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)

१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)

१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)

१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)

१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)

१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)

१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)

१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)

१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)

१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)

१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)

१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)

१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)

१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)

१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)

१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)

१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)

१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)

१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)

१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)

१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)

१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)

१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)

१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)

१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)

१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)

१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)

२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)

२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)

२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)

२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)

२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)

२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)

२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)

२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)

२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)

२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)

२०११- श्री उदयचन्द्र झा "विनोद" (अपक्ष, कविता संग्रह)


साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार


१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)

१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)

१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)

१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)

१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)

१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)

१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)

१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)

२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)

२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)

२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)

२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)

२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)

२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)

२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)

२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)

२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)

२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)

२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)
२०११- श्री खुशीलाल झा (उपरवास कथात्रयी, रघुवीर चौधरीक गुजराती उपन्यास)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार


२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल

साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार

२०११- श्री आनन्द कुमार झा (हठात परिवर्तन, नाटक)

प्रबोध सम्मान


प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )

प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )

प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )

प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )

प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )

प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )

प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )

प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )

प्रबोध सम्मान 2012- श्री चन्द्रभानु सिंह (१९२२- )

                                  श्री रामलोचन ठाकुर (१९४९- )

यात्री-चेतना पुरस्कार



२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;

२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;

२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;

२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;

२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;

२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;

२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;

२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;

२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी

२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा

२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

२०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)


भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता

युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।


भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।



नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा



विदेह सम्मान

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)
२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 

२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मानदीक माझी, बांग्ला- मानिक बंद्योपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)


विदेह भाषा सम्मान २०१२-१३ (वैकल्पिक साहित्य अकादेमी पुरस्कारक रूपमे प्रसिद्ध)

बाल साहित्य पुरस्कार २०१२- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल केँ “तरेगन” बाल प्रेरक विहनि कथा संग्रह


नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ क घोषणा

अभि‍नय- मुख्य अभिनय ,

सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा

श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो,

हास्‍य-अभिनय

सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह

श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर

नृत्‍य

सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव

श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत

चि‍त्रकला
श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना
श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल

संगीत (हारमोनियम)

श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर

संगीत (ढोलक)

श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत

संगीत (रसनचौकी)

   श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम

शिल्पी-वस्तुकला

    श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज

मूर्ति-मृत्तिका कला

श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त


काष्ठ-कला

श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना


किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति

श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा

विदेह मैथिली पत्रकारिता सम्मान


-२०१२ श्री नवेन्दु कुमार झा

गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान


अनचिन्हार आखर ( http://anchinharakharkolkata.blogspot.com ) द्वारा प्रायोजित "गजल कमला-कोसी-बगमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2011 लेल ओस्ताद सदरे आलम गौहर जीकेँ प्रदान कएल गेलैन्ह। एहि बेरुक मुख्यचयनकर्ता ओस्ताद सियाराम झा"सरस" छलखिन्ह।..

रविवार, 15 जुलाई 2012

७६म सगर राति दीप जरय चेन्नै मे १४ जुलाइ २०१२क साँझसँ १५ जुलाइ २०१२क भोर धरि सम्पन्न (चित्र साभार विभा रानी आ अभिजीत चन्द्र) -रिपोर्ट पूनम मण्डल)

मैथिली कथा गोष्ठी ७६म सगर राति दीप जरय "कथा कावेरी" चेन्नै मे १४ जुलाइ २०१२क साँझसँ १५ जुलाइ २०१२क भोर धरि सम्पन्न (चित्र साभार विभा रानी आ अभिजीत चन्द्र) स्थान- बिहार असोसिएशन भवन,(स्टेला मारिस कॉलेज क सोझाँमे), दामोदरन स्ट्रीट, गोपलपुरम, चेन्नै- 600034 आयोजक: अवतिको (विभा रानी), ई पहिल बेर अछि जे सगर राति दीप जरय एकटा महिला द्वारा आयोजित भेल अछि। ७५म सगर राति दीप जरय पटनामे भेल रहए। ७४म सगर राति दीप जरय श्रीमति (आब स्व.) आरती कुमारीक संयोजकत्वमे भागलपुरमे होएब निर्धारित छल मुदा हुनकासँ राजनीतिक अन्तर्गत ओ छीनि कऽ हजारीबागमे कएल गेल, ऐ शर्तपर जे ७५म सगर राति दीप जरयक आयोजनक मौका हुनका देल जएतन्हि। मुदा ७५म सगर राति दीप जरय राजनीतिक अन्तर्गत पटनामे भेल। तकर बाद श्रीमति आरती कुमारीक कैन्सरसँ भागलपुरमे मृत्यु भऽ गेलन्हि आ ओ सगर राति दीप जरयक पहिल महिला आयोजिका नै भऽ सकली। विगत किछु दिनसँ सगर राति दीप जरयमे कथाकार छोड़ि सभक उपस्थितिपर साहित्य जगतमे आक्रोश अछि। घुसपैठिया सभक कारण कथाकार अपनाकेँ राजनीतिक पर्याय बनल जा रहल सगर राति दीप जरय सँ दूर केने जा रहल छथि।

अगिला सगरि राति दीप जरय लेल कियो माला नै उठा सकला।
अगिला सगरि राति दीप जरय कतए हएत से अखन धरि अनिश्चित अछि।