बुधवार, 6 मार्च 2013

दरभंगा क होली ( आशीष झा )

साजिश रचलथि मुकुंद बाबू, महरानीजीक संग, महराजक गुलाल बिकायल, बांटल गेल सब रंग,,,योगिरा साराररररररररररररररररररर


कतए गेलहुं हउ ललित बाबू, देखू जग्‍गूक राज, अहिंक चिता पर बैस केलथि ओ कुकर्मी सब काज, जोगिरा सारारररररररररररररररररर

शुभू बाबू छलाह कुमार, दर्शन मे नहि छल व्‍यवधान, हुनकर बेटा सबस उपर, छथि द्वितियाक चान, जोगिरा साराररररररररररररररररर


सुमन जी संसद मे कविता लिखलथि अछि सदिखन, आ कीर्ति बाबू क टीवी पर संसद स बेसी दर्शन, जोगिरा सारारररररररररररररररर

घोंटू भांग हराही में आब, दिग्धि में घोलू आब रंग, लोकतंत्र छै दरभंगा में, करू खूब हुडदंग, जोगिरा सारारररररररररररररररररररररररर

नाली सबटा जाम करू, कहिं भांग बहा ल जाए, शहरक चिंता करब किया यउ, संजय हम्‍मर भाई,जोगिरा साराररररररररररररररररररर

शमसानो मे रामधुन आब सुनबा लेल अछि भीड, भांग धथूर ज्‍यों पीने रहितहुं फूटिते नहि तकदीर, जोगिरा सारारररररररररररररररररर

शोध पढाई छोडि करैत अछि सबटा देखू काज, विश्‍वविद्यालय भेटत एहन नहि, करू किया हम लाज, जोगिरा सारारररररररररररररररर

बेंटली गाडी खेत मे धंसल देखलहुं हम यउ यार, रमनजी कहलथि मामा किनलथि विदेश मे जगुआर, जोगिरा सारारररररररररररररररर

शैल्‍य चिकित्‍सा भेल जरूरी दरभंगा लेल भाई, रंगक लेप लगाउ तन पर, भांग पीयू खूब आई, जोगिरा साराररररररररररररररररररररर

वैशाली जा बसला कियो, कियो बसलाह गुडगांव, इटली वाला मामा कहलथि मोन पडैत अछि गांव, जोगिरा सारारररररररररररररररररर

अग्रवाल कए विद्यापति बनि तकैत छी हम आइ, उडन खटोला देखा गेलाह ओ कोना हम बिसरब भाई, जोगिरा साराररररररररररररररर

बिजली आउत हमर घर केना, भोर सांझ दुपहरिया कए, एहन प्रेम छल लालटेन स जे बिसरल शहर बेरौलिया कए, जोगिरा साराररररर

पीएम, सीएम सब जेबी मे, की कहू खुरखुर भाई, कहबा लेल रिपोर्टर छथि ओ बताह लगैत छथि आई, जोगिरा सारारररररररररररररर

फेसबुक पर खूब भेटैत अछि विद्वानक अज्ञान, धरती पर देखबा लेल चलू अपन मिथिला धाम, जोगिरा सारारररररररररररररररररररररर

गप कहता दरभंगा बचायब, दारू पीब बहेता नोर, कहबैन जे किछु करू यउ भाई, अउता बेच जमीन ओ थोड, जोगिरा साराररररररररररर

रमन, मदन, आशीष भ पागल, कुमुद, विकास, दीपेशक संग, सांझ पराती गाबि रहल छथि, बजाल रह मृदंग, जोगिरा साराररररररररर

भांग दिय हमरा आइ एतबा, नशा हुए कहियो नहि भंग, होश भेला पर देखि शहर कए नोर होएत बदरंग, जोगिरा सारारररररररररररररर

माइग्रेट हमहु भ गेलहुं, बदलि लेलहु हम मदरटंग, कियो नहि चिन्‍हे दरभंगाक छी, एतबा थोपू रंग, जोगिरा साराररररररररररररररररर

आशीष झा

4 टिप्‍पणियां:

अपन मोनक भावना के एते राखु