| ओष के अन्हरियॉ में भॅ गेल मुलाकॉत बुचियाँसँ |
| नॅजॅर मिलल तॅ लागल सबटा गॅप भॅ गेल हुनकासँ |
| हुनका आँखी में छल एहन सुरमा कि हम कि कहू |
| हमर पुरा देह के रोंई क लेलक दिल्लगी हुनकासँ |
| वस्त्र छल किछु एहन ऊपर लिपिस्टिक के एहसास |
| आखिर धौला कुआं में क लेलो छेर-छार हुनकासँ |
| गाबैऽ लगलैन् हुनकर चुप्पी किछु सुन्दर गज़ल |
| समाँरल नै जै छलैन "मोहन जी" ख्याल हुनकासँ |
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अपन मोनक भावना के एते राखु