सोमवार, 28 मार्च 2011

मिथिला के बेटी एक बेर फेर करलखिन माँ मैथिलि के मान ऊँचा

मिथिला के नाम एक बेर फेर रोशन करलखीन हुनकर बेटी, मिथिला के नाम के एक बेर फेर पूरा भारत में ऊँचा कए के प्रतिभा जी साबित कए देलक की अखनो तक मिथिला में प्रतिभा के कमी नए येमधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के जरैल गाँव आ वर्तमान में स्थानीय बिनोदानंद झा कालोनी निवासी प्रतिभा कुमारी इग्नू द्वारा संचालित पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन रुरल डेवलपमेन्ट कोर्स में प्रतिशत 71.74 अंक प्राप्त कए के  गोल्ड मेडल प्राप्त केलखिन येदरभंगा प्रक्षेत्र में गोल्ड मेडल पाबय वाली ई पहिल छात्रा ये जिनका ३ अप्रेल के संचार केंद्र,इग्नू कैम्पस,न दिल्ली में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से हाथ सों गोल्ड मेडल आ प्रमाण पत्र देल जायत। शुरू से ही ओ बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहथिन एम काम के परीक्षा में ६३प्रतिशत अंक आ डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन के परीक्षा में ७० प्रतिशत अंक प्राप्त केलखिन ये
 
मिथिला के नाम एक बेर फेर रोशन करलखीन हुनकर बेटी, मिथिला के नाम के एक बेर फेर पूरा भारत में ऊँचा कए के प्रतिभा जी साबित कए देलक की अखनो तक मिथिला में प्रतिभा के कमी नए ये
एता अहाँ के ई बताय दी की प्रतिभा जी मधुबनी जिला के जानल-मानल डॉक्टर शैलेन्द्र नाथ झा के पुत्रवधू ये। अखन प्रतिभा जी मिथिला विश्वविद्यालय से कामर्स से पीएचडी का रहल ये ओ अपन ई सफलता पर बहुत खुश ये आ अपन सफलता के श्रेय अपन श्वसुर आ सास के देय छथिन
 प्रतिभा जी के प्रतिभा के देखयत ते याह कहल जाय सकय ये की आब लोग बाग़ ई नै समझै की बेटी के बियाहक बाद हुनकर काज खाली चूल्हा चौका ही रही जाय ये,मुदा आब चूल्हा चौका के साथ-साथ एतबा पैघ उपलब्धि अपना आप में एकटा उदाहरण ये।

शनिवार, 26 मार्च 2011

बुझियोक मिथिला छैक...

देहरी के टांट पर जौं पानक लत्ती होए
ते बुझियोक मिथिला छैक...
दलानक मचान पर जौं तिलकोकर छत्ती होए
ते बुझियोक  मिथिला छैक...


जतेय मैटक करेज सों वैदेही जनमैय ये
जतेय याज्ञवल्क्य  कमंडल से अमृत छाल्कैत ये,

पान-मखान से पाहुँनक स्वागत होए
ते बुझियोक मिथिला छैक...
गामक गोप से जौं  मधुर छलके
ते बुझियोक मिथिला छैक...

जतेय माछक झोर से सोजन लगय ये
जतेय चक्का,तिलकोर से भोजन सजय ये

पग-पग पर जौं पोखरी होए
ते बुझियोक मिथिला छैक ...
घोर-घोर में जौं चौखरी होए
ते बुझियोक मिथिला छैक ...

शुक्रवार, 25 मार्च 2011

एकटा पत्र छोटका भाय के नाम......

सुने रे रानू लिखेय छौ भानु
हमर हाल छौ उत्तम,
तोहर हाल के हम नै जानी
भला करउ पुरुषोत्तम।

अपन गाम में छुटी गेलों ये,
हमर एकटा अंगा
ओ अंगा के कका लगाय के,
पठा दिए दरभंगा।

बड़की भौजी से तू कहिये
याद बहुत आबय ये,
हुनकर चक्का,सैजमन, आ तिलकौर
बड़ा भावय ये।

माय  से कहिये कानय ले नै
पूरा हेतय ईक्षा,
जल्दी हमहूँ बीडीओ बनबइ
पास करय दे परीक्षा।

मिरिया माय के हाल तू हमरा
सेहो अलग से बतहिये,
कनकिरबा कतबा टा बढलों
फोटो कोनो पठियेह।

कालेज के भए गेलों समय ये
समय के छो कनी तंगी,
माँ-बाबु ले गोर लगय छियो
घोर
एबउ हम जल्दी

मंगलवार, 22 मार्च 2011

हम अनचिन्हार छि......

अनकर मचान पर, मिथिला के दालान पर,
मिथिला के शान पर लिखय लए तैयार छि.
हम अनचिन्हार छि......

गामक गोप के, गामक लोग लए,

गामक भाषा में,परसय लए तैयार छि
हम अनचिन्हार छि......

मिथिला के रंग के, मैथिल के ढंग के,

मिथिला के मंच पे आनय लए तैयार छि,
हम अनचिन्हार छि......

मिथिला के गोप से, मैथिल के ढ़ोब से,

हम नै अनचिन्हार छि,
हम मैथिल राजकुमार छि.
हम 'झा' सुनील कुमार छि...

सोमवार, 21 मार्च 2011

काल भए जायत बिहार के ९९वर्ष आऊ मनाबी मिल के बिहार दिवस के लोकपर्व

होली के खुमार एखन उतरल नै हायत की एक बेर फेर बिहार मस्ती के रंग में रंगाबे लागत जी हाँ हम गोप कए रहल अछि बिहारक जन्मदिन के मंगल के दिन बिहार के ९९बर्ष पूरा भए जायत। शनि-रवि के लोग बाग होली के मस्ती में मस्त रहे आ सोम के दिन बांकी के पुआ पूरी सठेता की मंगल से फेर एकटा उत्सव के रंग में रंगेय ले तैयार भए जेता।

मंगल दिन २२तारीख के अपन बिहार पूरा २२ साल के भए जायत आ हम प्रवेश कए जायब बिहार के १००वां साल में। ई अवसर पर बिहार में तीन दिन तलक उत्सव के मनाबै के घोषणा माननीय मुख्यमंत्री जी केलखिन ये जाही में कईक तरहक कार्यक्रम सेहों होयत रहत

एते अहाँ सब के बता दी की अंग्रेजक जमाना में बिहार पाहिले बंगाल के हिस्सा रहे आ काल्ह की ही दिन यानी २२मार्च १९१२ के अपन बिहार बंगाल से अलग भए के अपन बिहार बनल एही दिन से हरेक साल २२ मार्च के बिहार दिवस के रूप में मनाओल जाय ये।ई बेर उत्सव मानबाई के लेल सब टा जिला के तीन-तीन लाख रुपया सेहों देल गेल ये। एतबे टा नै बिहार के गौरव के ई उत्सव के लेल देश आ विदेश में रहेय वला बिहारी आ बिहार
फाउंडेशन सेहो बिहार उत्सव के लेल कमर कैस लेले ये

मुख्य कार्यक्रम पटना के गाँधी मैदान में आयोजित हेताह आ जेकरा लेल बहुत दिने से सब गोटा तैयारी में लागल रहे।गीत-नाद के कार्यक्रम के साथै-साथ मनोरंजन के खूब निक जोंका व्यवस्था अछि जाही के साथ बिहारक लोग बिहार के भांति-भांति के व्यंजन के भी मजा लए सके छै।

ई मस्ती आ मज़ा पूरा तीन दिन तलक चलत। उत्सव के तैयारी के जोर शोर याह बात से पता लगाय ये की एकर तैयारी साल भैर पाहिले से शुरू भाय गेल रहे, तैयारी के देखेत एकटा बात ते साफ़ ये ई बेर होली के खुमार एतबा जल्दी नै उतरत।

शरीर से निकलय ये सूइयां !

ज्योतिष आ अन्धविश्वास दोनों के लिए ई ये एकटा अनबुझ पहेली, कियो नै पता लगाय पाय रहल ये की कोनाके सुई निकलय ये ज्योति के सरीर से
मोकामा के शिवनार गाँव के ज्योति कुमारी के घोरवाला आ डाक्टर के नज़र में ई कोनो अजूबा सब कम नै ये की एकटा सुई निकालय के बाद दोसर, आ दोसर निकालय के बाद तेसर सुई कोना हुनकर देह में आयब जाय छै।शरीर से निकलती हैं सूइयां!
अखन तक ज्योति के शारीर से दू टा सुइया निकायल जाय चुकल ये आर एक्स-रे रिपोर्ट में तेसर सुई के कंधा के पास हुए के पुष्टि भेल ये।डाक्टर सब हैरान छथिन कियाके ई हुनकर नज़र में कोनो बीमारी नै अछि। मुदा सवाल ई ये की अगर ई बीमारी नै अछि ते कोना के ज्योति के शरीर में सुइया आयब जाय ये।जाकर जवाब ककरो पास नै ये। ओ पिछला आठ महिना से ई असहनीय दर्द से गुजैर रहल ये आ ओकरा पते नै लाऐग रहल ये ई छिए की।

कैइकटा डॉक्टर हुनकर ईलाज केलखिन मुदा कोनो फायदा नै भेल. आब ते डाक्टर के दर्द के गोली भी कोनो असर नै करय ये. ज्योति के पिता अशोक मोची के ओ हालत नै ये की ओ ईलाज के ई खर्च के निक जोंका उठाय सके तखनो भी ओ यथसंभव कोशिश काय रहल ये।हुनकर परिजन भी ई कष्ट के देख के लाचार ये आ ओ भी ज्योति के कोनो मदद करय में अक्षम ये।

डाक्टर के दवाई से कोनो फायदा नै होइत देख ओ सब आब एकरा डायन के करतूत माने लागल ये. हुनकर सब के कहने ये की अगर गाम के भगत जी डायन के नाम बताय देताह ते डायन के जिन्दा नै रहेय ले देब. ज्योति के बहिन मधुमाला साफ़ कही रहल ये की हमर बहिन जे दर्द से गुजैर रहल ये हुनको याह सजा मिलतैय।

आब देखनाय ई ये की अगर हुनका निक चिकित्सा नै भेटथीन ते गामक लोग जरुर एकरा अंधविश्वास बूझे लागत आ ओ समय अगर सचमुच में भगत जी किनकरो नाम बताय देताह तो बेचारी के जान ते जरुरे ई सब गोटा मिल के लाय लेत. आब सरकार के चाही की ओ एकरा लेल अपन स्तर पर पहल कैर के ज्योति के निक चिकित्सा के व्यवस्था करे जाही सों गाम में अंधविश्वास के बढ़ावा नै मिल पाबय।

शनिवार, 19 मार्च 2011

होली के हार्दिक सुभकामनाये!


अहाँ सब ब्लॉग प्रेमी के हमर तरफ से होली के हार्दिक सुभकामनामाँ भगवती से प्रार्थना अछि की होली अहाँ समस्त लोगेन के जीवन में सुख आ समृधि के रंग भरय।

की अहाँ के पता ये........

आय जब समूचा देश होली के तैयारी में व्यस्त अछि ओही ठाम बहुते कम लोग जानेत ये हेबेय की बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी प्रखंड के सिकलिगढ़ में अखनो तक ओ स्थान सुरक्षित ये जतय होलिका प्रहलाद के आपन गोद में बैसाय के जड़ेत चिता में बैस गेल रहे आ तखने ओतय भगवन नरसिंह के अवतार भेल रहे। जाही के बाद ओ हिरण्यकश्यप के संहार करलखिन रहे।

प्राचीन कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप के महल में भक्त प्रहलाद के रक्षा के लेल एकटा खम्भा से भगवान नरसिंह प्रकट भेलखिन रहे। भगवान नरसिंह के अवतार से जुडल ओ खंभा [माणिक्य स्तम्भ] आयों ओतेय मौजूद ये। कहल जाय ये जे ई स्तंभ के कएक बेर तोड़ए के कोशिश करल गेल मुदा ई झुक ते गेल लेकिन टूट नै सकल।

हिन्दू के धार्मिक पत्रिका 'कल्याण' के ३१वें वर्षक संस्करण में सिकलिगढ़ के विशेष रूप से विवरण देल गेल ये आ बतायल गेल ये की ई भागन नरसिंह के अवतार स्थल अछि।एतय अहाँ के बतेय दी की याह जगह से हिरन नामक नदी बहय ये। आ माणिक्य स्तंभ में जे छेद ये ओय में एकटा कंकर डालने से ओ ई हिरन नदी में आयब के गिरय ये।याह जगह पर भीमेश्वर महादेव के विशाल मंदिर ये। मानल जाय छै की हिरन्यकश्यप एतय बैस के पूजा करेत रहे।

प्रहलाद स्तंभ सेवा के लेल बनायल गेल प्रहलाद स्तंभ विकाश ट्रस्ट के अध्यक्ष बद्री प्रसाद शाह बताबय ये जे ई स्तंभ के जिक्र भगवत पुराण में भी ये।ई जगह के खाश विशेषता ई ये की एतय राख आ मिटटी से होली खेलल जाय ये कियाकि जखन होलिका जैर गेल रहे आ प्रहलाद चिता से सकुशल वापस आयब गेल रहे तखन सब लोग राख आ मिटटी एक दोसरा के लगाय के ख़ुशी मनोलक रहे तखने से होली के उत्सव प्रारंभ भेल।

ट्रस्ट के सचिव संजीव जे कहैत ये जे होलिका दहन के समय ४० से ५० हजार लोग एतय जमा होए ये आ जमके राख आ मैट से होली खेलेय ये। अखनो तक मिथिला में लोग रंग के साथ साथ मैट से होली खेलय ये।एतय पर महान संत मेंही दास के पैतृक निवास स्थान भी ये।

शुक्रवार, 18 मार्च 2011

होली पर शीला आ मुन्नी के गीत से पटल अछि बिहार...

फगुआ के रंग में रंगल ये सोंसे बिहार। ई बेर फगुआ में बिहार के जोश के की कही जिधर देखियो रंग,पिचकारी के दोकान आ होली के गीत से बाज़ार लकदक करए ये। जेम्हर देखियो उम्हरे सब होली के गीत में मस्त नज़र आयब रहल ये। खास कए के ई बेर शीला आ मुन्नी के गीत ते बाज़ार में खास कए के बवाल मचोने ये। ई गीत एतय फूहड़ आ अश्लील ये की किछ कहल नै जाय .............
कनी गीत के बोल पर ध्यान दियो...
१) शीला की जवानी - पप्पू है रंगीला, प्रेमी नीला पिला...........
२) मुन्नी बदनाम हुई - होली में लाल हुई ओ सैयां तेरे लिए-3,बालम खेले होली करे ठिठोली भींगी चोली रे........
३) टिंकू जिया - गरमा गरम रंग डाले पिया हा लल्लू पिया,लाज बदन मेरा जड़ सा दिया........

एकर कारोबार एतय बढल जाय रहल अछि की कहनाय मुहाल ये लेकिन एकटा सत्य इहो ये की जा तक कीने वला के हाथ नै रुकते एकर कारोबार एहना चलैत रहते।एहनो नै ये की सभ्य समाज एकरा से वंचित ये छुप-छुप के ओ सब भी ई गीतक मज़ा लए से नै चुकै ये मुदा आमना सामना नै होए ये किछु समाज में अपन रुतबा आ किछु इज्ज़त के ख्याल कए के..........

सूरीनाम'आयल बिहार, निवेशक के खोज में...........

बिहार के लोगेन के लेल एकटा निक खबर ये।करैबियाई देश सूरीनाम के भारत में राजदूत किशनदत्त बैजनाथ गुरवार के पटना आयल रहे।ओ आपन देश में निवेश करय के लेल बिहारी नेवेशक के आमंत्रित करय ले आयल रहें।

ओ बिहार
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सेमिनार हॉल में पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से बिहार के निवेशक के अपन देश में निवेश करय के लेल आमंत्रित करलकई प्रजेंटेशन में ओ अपन देश के उधोग,पर्यटन आओर संस्कृति के बारे में बतेलक।आ बिहारी सब से आग्रह केलक जे विश्व के मानचित्र पर एक बेर सूरीनाम के तरफ भी ध्यान दियो।

भारत आ सूरीनाम से अपन रिश्ता के बारे में ओ बतेलक जी हमहूँ बिहारी मूल के छि आ बिहार से हमार बहुतेक याद जुडल ये।ई मौका पर बिहार
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र पी.सिन्हा, सुभाष कुमार पटवारी, सुबोध कुमार के साथै पैघ संख्या में उधमी मौजूद रहें