बीआर अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम आब पूर्ण रूपेण वातानुकूलित बनत। एही लेल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विवि के पचास लाख रुपया देलक ये। अगला सप्ताह से ऑडिटोरियम के वातानुकूलित बनाबै के कार्य शुरू भए जाएत। आब एही में इको सिस्टम आऔर एकोस्टिक सिस्टम भी लागत। साउंड प्रूफ एही ऑडिटोरियम में आब ओ धूम-धड्क्का नै होएत मुदा सुमधुर आवाज गुंजत। संगही एही ऑडिटोरियम के सौंदर्यीकरण भी करल जाएत।
शनिवार, 28 मई 2011
बीआर अंबेदकर बिहार विश्वविद्यालय बनत वातानुकूलित
गुरुवार, 26 मई 2011
ग़ज़ल
दिल तोड़ि के जे ओ हँसल हम घबरा गेलों
फेर हँसि के जे ओ कानल हम घबरा गेलों
एकतरफा प्यार में पड़ल रही दुनु गोटे
जखन जानलों एही बात हम घबरा गेलों
प्यार में बिकल घर-बार ते कोनो चिन्ता नाञ
मुदा प्यारे जखन बिकल हम घबरा गेलों
मुखचन्द्र देखि के फुसलाबैत रही दिल के
ओ पराs गेल हमरा से ते हम घबरा गेलों
ग़ज़ल हम लिखय रही ओकरा बिसारि के
ओ याद जखन आएल ते हम घबरा गेलों
फेर हँसि के जे ओ कानल हम घबरा गेलों
एकतरफा प्यार में पड़ल रही दुनु गोटे
जखन जानलों एही बात हम घबरा गेलों
प्यार में बिकल घर-बार ते कोनो चिन्ता नाञ
मुदा प्यारे जखन बिकल हम घबरा गेलों
मुखचन्द्र देखि के फुसलाबैत रही दिल के
ओ पराs गेल हमरा से ते हम घबरा गेलों
ग़ज़ल हम लिखय रही ओकरा बिसारि के
ओ याद जखन आएल ते हम घबरा गेलों
आब लीअ लिच्ची से बनल रसगुल्ला के मज़ा..

एही रसगुल्ला के मांग एतय जबरदस्त ये की बनय से पहिने एकर बुकिंग भए जाय रहल ये। एही बेर एकर बाज़ार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, के संगे स्विट्जर्लैंड, इंगलैंड आ जर्मनी बाज़ार में भी खूब ये। एकर डिमांड के देखय के बाद बिहार के अलावा आऔर राज्य भी एकर ऊपर ध्यान दए रहल ये मुदा मुजफ्फरपुर के लीची के ते बाते जुदा अछि, पाहिले लिचिका इंटरनेशनल के जूस, आ प्लप के स्वाद ते लेते रही आब लीअ लिच्ची के रसगुल्ला के मज़ा.
बुधवार, 25 मई 2011
दू टा ग़ज़ल
(१)
हुनका सों हँसि के बाजलों ते हल्ला मचि गेल
हुनक मुँह दिस ताकलों तs हल्ला मचि गेल
रूपक चन्द्रमा के कारी अमावस केने रही
चमकैत पूर्णिमा के देलों तs हल्ला मचि गेल
ओ नैनक कटार से सबके ये घायल केने
हम नजैर से जे ताकलों तs हल्ला मचि गेल
हुनक रूपक लाइट भक्क-भक्क जरैत ये
सबहक डिबिया मिझेलों तs हल्ला मचि गेल
ओ आँखिक इशारा जे मारलक मुंडेर पर
हम फाँदि गेलों जे देबार तs हल्ला मचि गेल
अहों लिखूं ग़ज़ल ओ कहैत रहे सदिखन
करिया कलम जेs उठेलों तs हल्ला मचि गेल
हुनका सों हँसि के बाजलों ते हल्ला मचि गेल
हुनक मुँह दिस ताकलों तs हल्ला मचि गेल
रूपक चन्द्रमा के कारी अमावस केने रही
चमकैत पूर्णिमा के देलों तs हल्ला मचि गेल
ओ नैनक कटार से सबके ये घायल केने
हम नजैर से जे ताकलों तs हल्ला मचि गेल
हुनक रूपक लाइट भक्क-भक्क जरैत ये
सबहक डिबिया मिझेलों तs हल्ला मचि गेल
ओ आँखिक इशारा जे मारलक मुंडेर पर
हम फाँदि गेलों जे देबार तs हल्ला मचि गेल
अहों लिखूं ग़ज़ल ओ कहैत रहे सदिखन
करिया कलम जेs उठेलों तs हल्ला मचि गेल
(२)
चमरपट्टी में गाय मरल ते कोनो बात नै
बभनपट्टी में बेंग मरल हल्ला मचि गेल
हमर झोपड़ी खसाs के ओ महल बना लेलाs
फेर से दुछत्ती जे बनेलों ते हल्ला मचि गेल
ओ नोटक जोड़ पर बड़का नेता बनि गेल
हमर ईमान नै बिकल ते हल्ला मचि गेल
विदेशो में रहि, नै बिसरल अपन माँटि के
एता गामों में बाजलों मैथिली हल्ला मचि गेल
नै बिसरब अपन माँटि के करियों ई प्रण
जे सुनलक हमर ई गोप हल्ला मचि गेल
चमरपट्टी में गाय मरल ते कोनो बात नै
बभनपट्टी में बेंग मरल हल्ला मचि गेल
हमर झोपड़ी खसाs के ओ महल बना लेलाs
फेर से दुछत्ती जे बनेलों ते हल्ला मचि गेल
ओ नोटक जोड़ पर बड़का नेता बनि गेल
हमर ईमान नै बिकल ते हल्ला मचि गेल
विदेशो में रहि, नै बिसरल अपन माँटि के
एता गामों में बाजलों मैथिली हल्ला मचि गेल
नै बिसरब अपन माँटि के करियों ई प्रण
जे सुनलक हमर ई गोप हल्ला मचि गेल
मंगलवार, 24 मई 2011
बाढ़क समाधान लेल नितीश चललाह दिल्ली...
बाढ़ पीड़ित क्षेत्र कोशी आ नालंदा विश्विद्यालय के लेल मुख्यमंत्री नितीश जी कमर कसि लेलक ये एही बेर ओ अपन दिल्ली प्रवास में एही विषय पर विचार विमर्श करत।
ओ पटना में कैबिनेट के बैठक के बाद पत्रकार से संबोधित भेल रहे जाही ओ कहलक जे बिहार के शोक मानल जाय बला कोशी नदी पूरब दिस बांध के लोग आयब गेल ये। अगर समय रहत आपदा प्रबंधन के तैयारी नै काएल गेल ते फेर यहो बेर कोशी के काल में बहुत लोग चलि जेताह। अपन दिल्ली प्रवास में ओ ओही सब मुद्दा पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद से बात करत।
नितीश जी आय दिल्ली के लेल रवाना भए रहल ये। आशा ये की हुनकर इ यात्रा बिहार के लेल किछु नीक खबर आनत आ बिहार के बाढ़ से बचाबै में किछु मदद करत।
ओ पटना में कैबिनेट के बैठक के बाद पत्रकार से संबोधित भेल रहे जाही ओ कहलक जे बिहार के शोक मानल जाय बला कोशी नदी पूरब दिस बांध के लोग आयब गेल ये। अगर समय रहत आपदा प्रबंधन के तैयारी नै काएल गेल ते फेर यहो बेर कोशी के काल में बहुत लोग चलि जेताह। अपन दिल्ली प्रवास में ओ ओही सब मुद्दा पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद से बात करत।
नितीश जी आय दिल्ली के लेल रवाना भए रहल ये। आशा ये की हुनकर इ यात्रा बिहार के लेल किछु नीक खबर आनत आ बिहार के बाढ़ से बचाबै में किछु मदद करत।
रुबाइ
छौड़ा के फैशन कमाल केने छै
कान में बाली ठोर लाल केने छै
नटुआ ओ बनि गेल शहर में आबि के
छौड़ी के जेना ओ चाल केने छै
कान में बाली ठोर लाल केने छै
नटुआ ओ बनि गेल शहर में आबि के
छौड़ी के जेना ओ चाल केने छै
सोमवार, 23 मई 2011
गरीब रथ टकरायल बोलेरो से 19 टा के मौत...
मधुबनी जिले के राजनगर थाना के भरिया विशनपुर गाव के नजदीक रबि दिन17 नंबर मानवरहित गुमटी पे दिल्ली से जयनगर जा रहल गरीबरथ एक्सप्रेस बोलेरो से टकरा गेल, जाही में बोलेरो में सवार 19 टा लोग के मौत भए गेल। एही हादसा में ४ टा लोग जख्मी भए गेल। सब टा लोग विशनपुर टोला के रहे बला ये जे चुनाव में जीतला के बाद मुखिया प्रत्याशी के जीत के जश्न मनाबै के लेल राजनगर प्रखंड जाय रहल रहे। मृतक में नबका मुखिया जी के बेटी आ हुनकर एकलौता पुत्र भी शामिल ये।
एही मामला के जांच मुख्यमंत्री के आदेश पर अपर समाहर्ता राधा रमण झा करथिन। ओ कहलक जे मृतक के आश्रित के डेढ़-डेढ़ लाख रुपया आ घायल के सरकारी खर्च पर ईलाज के घोषणा करलखिन ये। जिला प्रशाशन भी एही घटना में मरल नौ टा महिला के घर बला के दस-दस हज़ार रुपया आ कबीर अंत्येष्ठी योजना से
पन्द्रह-पन्द्रह सौ रुपया दए के घोषणा करलखा। और एही क्षेत्र के ग्रामीण विकाश मंत्री नीतीश मिश्र के पहल पर रेलवे विभाग मृतक के परिजन के दू-दू लाख आ घायल के पचास-पचास हज़ार टका दए के घोषणा करलक ये।
एही घटना से सकरी-जयनगर रेल खंड पर ६ घंटा के लेल आवागमन बाधित रहल। गाम बला के मुताबिक एही घटना में चालक के गलती रहे। ओ बतेलक जे गाडी में सवार महिला सब गाडी के रोकय ले कही रहल रहे मुदा ओ सबके बात के अनसुना के के गाड़ी के पार करय के प्रयास केलखिन जाही से ई हादसा भेल।
एही मामला के जांच मुख्यमंत्री के आदेश पर अपर समाहर्ता राधा रमण झा करथिन। ओ कहलक जे मृतक के आश्रित के डेढ़-डेढ़ लाख रुपया आ घायल के सरकारी खर्च पर ईलाज के घोषणा करलखिन ये। जिला प्रशाशन भी एही घटना में मरल नौ टा महिला के घर बला के दस-दस हज़ार रुपया आ कबीर अंत्येष्ठी योजना से
पन्द्रह-पन्द्रह सौ रुपया दए के घोषणा करलखा। और एही क्षेत्र के ग्रामीण विकाश मंत्री नीतीश मिश्र के पहल पर रेलवे विभाग मृतक के परिजन के दू-दू लाख आ घायल के पचास-पचास हज़ार टका दए के घोषणा करलक ये।
एही घटना से सकरी-जयनगर रेल खंड पर ६ घंटा के लेल आवागमन बाधित रहल। गाम बला के मुताबिक एही घटना में चालक के गलती रहे। ओ बतेलक जे गाडी में सवार महिला सब गाडी के रोकय ले कही रहल रहे मुदा ओ सबके बात के अनसुना के के गाड़ी के पार करय के प्रयास केलखिन जाही से ई हादसा भेल।
रुबाइ
शहरक छौड़ी के आँगी छोट भए गेल
नागिन जोंका केश बाँबकट भए गेल
शहर के हवा कहु आ अमेरिका के रंग
छौड़ी के डिरेस पेंट शर्ट भए गेल
नागिन जोंका केश बाँबकट भए गेल
शहर के हवा कहु आ अमेरिका के रंग
छौड़ी के डिरेस पेंट शर्ट भए गेल
रुबाइ
शहर में छौड़ी के फुटी गेल करम
लाज के गठरी बनि गेल बेशरम
अमेरिका के हवा में रंग गेल ऐना
नै किछु ईमान बचल नै बचल धरम
लाज के गठरी बनि गेल बेशरम
अमेरिका के हवा में रंग गेल ऐना
नै किछु ईमान बचल नै बचल धरम
शुक्रवार, 20 मई 2011
बहुत याद आबय ये
बहुत याद आबय ये
कचका आमक फक्का
मालदह केर चभक्का
आ दलानक कक्का
बहुत याद आबय ये
माय के करेज
पुआरक सेज
आ बेटीक दहेज़
बहुत याद आबय ये
पुआरक गठरी
कनिया के फसरी
आ मुरही,कचरी
बहुत याद आबय ये
बाबाक सोंटा
फुलक लोटा
आ लिरियाबैत झोंटा
बहुत याद आबय ये
गोटपीस ताश
ईक्का से आश
आ दुग्गी से निराश
बहुत याद आबय ये
दुर्गा थानक मेला
नटुआ के झमेला
आ जिलेबी, केला
बहुत याद आबय ये
गामक ललमुनिया
छोटका छोटका अमीया
आ नबकी दुलहिनिया
बहुत याद आबय ये
जट्टा-जट्टिनक नाच
धधकैत चुल्हाक आँच
आ पोठीया माँछ
बहुत याद आबय ये
गामक होली
होलिबाक टोली
आ भाँगक गोली
बहुत याद आबय ये
गाय के लथाड़
नाव पतबार
आ हटिया बजार
बहुत याद आबय ये
तीसी के तेल
गरदा के खेल
आ लाठी के रेल
बहुत याद आबय ये
ओ कनही कुकुर
दीदी के ससुर
आ भाँगक सुरूर
बहुत याद आबय ये
मालदहक मज़ा
शिवालाक गाँजा
आ बाँसक बाज़ा
बहुत याद आबय ये
चक्का तिलकोर
आमक बौर
आ माछक झोर
बहुत याद आबय ये
उजरा रसगुल्ला
चौबटिया के हल्ला
आ टोला-मोहल्ला
बहुत याद आयब गेल
फेर कहब
आब विदा.
कचका आमक फक्का
मालदह केर चभक्का
आ दलानक कक्का
बहुत याद आबय ये
माय के करेज
पुआरक सेज
आ बेटीक दहेज़
बहुत याद आबय ये
पुआरक गठरी
कनिया के फसरी
आ मुरही,कचरी
बहुत याद आबय ये
बाबाक सोंटा
फुलक लोटा
आ लिरियाबैत झोंटा
बहुत याद आबय ये
गोटपीस ताश
ईक्का से आश
आ दुग्गी से निराश
बहुत याद आबय ये
दुर्गा थानक मेला
नटुआ के झमेला
आ जिलेबी, केला
बहुत याद आबय ये
गामक ललमुनिया
छोटका छोटका अमीया
आ नबकी दुलहिनिया
बहुत याद आबय ये
जट्टा-जट्टिनक नाच
धधकैत चुल्हाक आँच
आ पोठीया माँछ
बहुत याद आबय ये
गामक होली
होलिबाक टोली
आ भाँगक गोली
बहुत याद आबय ये
गाय के लथाड़
नाव पतबार
आ हटिया बजार
बहुत याद आबय ये
तीसी के तेल
गरदा के खेल
आ लाठी के रेल
बहुत याद आबय ये
ओ कनही कुकुर
दीदी के ससुर
आ भाँगक सुरूर
बहुत याद आबय ये
मालदहक मज़ा
शिवालाक गाँजा
आ बाँसक बाज़ा
बहुत याद आबय ये
चक्का तिलकोर
आमक बौर
आ माछक झोर
बहुत याद आबय ये
उजरा रसगुल्ला
चौबटिया के हल्ला
आ टोला-मोहल्ला
बहुत याद आयब गेल
फेर कहब
आब विदा.
हिमालय
आबू पर्वत सs किछु सिखी हम
आशमान म ऊँचा मस्तक चरण भूमि म गारल य !
भनs चारू दिशा य कारी स्याही अन्दर सs अजबारल य !
उत्तर के तेज हवा भी हुनका सs हारल य !
कियो कहै य हिमालय कियो कहै य सागरमाथा
भूमि के हम स्वर्ग छी, आ जटा शिव सौं सवारल य
शिव गौरी एते विराजs , धरा गंगा सs पखारल य !
आशमान म ऊँचा मस्तक चरण भूमि म गारल य !
भनs चारू दिशा य कारी स्याही अन्दर सs अजबारल य !
उत्तर के तेज हवा भी हुनका सs हारल य !
कियो कहै य हिमालय कियो कहै य सागरमाथा
भूमि के हम स्वर्ग छी, आ जटा शिव सौं सवारल य
शिव गौरी एते विराजs , धरा गंगा सs पखारल य !
जीवनधारा
सागर मs हम पलैत छी
सूर्यताप सs जलैत छी
सरिता बैन भूमि पर आs
बनि मेघ नभ म चलैत छी
पर्वत हम्मर बाधा यs
निर्मल निर्झर से बहैत छी
फेर सागर मs ही मिलैत छी
सूर्यताप सs जलैत छी
सरिता बैन भूमि पर आs
बनि मेघ नभ म चलैत छी
पर्वत हम्मर बाधा यs
निर्मल निर्झर से बहैत छी
फेर सागर मs ही मिलैत छी
शनिवार, 14 मई 2011
सौराठ सभा के पुनरुथान
हमरा की सूचित करैत अपर हर्ष भए रहल ये की मिथिलाक महान् पारंपरिक एवं वैधानिक महत्त्वके के लेल प्रशिद्ध एवं वैवाहिक सम्बन्ध संगहि मिथिलाके अनेको सम-सामयिक विषय ऊपर चर्चाके लेल सुप्रसिद्ध सौराठ सभा एहि बेर जून २०-२९, २०११ में अत्यन्त भव्यता एवं आधुनिकताके संग आयोजन कैल जा रहल अछि।
जाही में वर-वधु के परिचय संगे विवाहक कार्यक्रम सेहो होएत, मुदा एही के बेर सब गोटे मिल के मिथिला के दहेज़ मुक्त बनाबै के लेल संघर्ष रत छी। अतएव समस्त मैथिल बंधू से निवेदन ये की अपन लोग एही मुहिम में अपन योगदान दियो। जय मिथिला-जय मैथिली।
आयोजक:
सौराठ विकास समिति एव दहेज मुक्त मिथिला
पंजी भवन, सौराठ सभागाछी, मधुबनी, बिहार.
source - http://dahejmuktmithila.blogspot.com/
जाही में वर-वधु के परिचय संगे विवाहक कार्यक्रम सेहो होएत, मुदा एही के बेर सब गोटे मिल के मिथिला के दहेज़ मुक्त बनाबै के लेल संघर्ष रत छी। अतएव समस्त मैथिल बंधू से निवेदन ये की अपन लोग एही मुहिम में अपन योगदान दियो। जय मिथिला-जय मैथिली।
![]() |
आयोजक:
सौराठ विकास समिति एव दहेज मुक्त मिथिला
पंजी भवन, सौराठ सभागाछी, मधुबनी, बिहार.
source - http://dahejmuktmithila.blogspot.com/
रुबाइ
आँखिक नोर के पहिचान नै सकलो
ठोरक मुस्कान के जानि नै सकलो
बुझलो तखन हम चेहरा केर भाषा
दिलक नजैर से जों मुखड़ा कs ताकलो
ठोरक मुस्कान के जानि नै सकलो
बुझलो तखन हम चेहरा केर भाषा
दिलक नजैर से जों मुखड़ा कs ताकलो
रुबाइ
हुनकर आगु में ठमकै के दम नै भेल
छोडि देलक तइयो प्यार कम नै भेल
एकरा अहाँ प्रेम कहु आs थेथरपनी
करेजो टूटल तइयो हमरा गम नै भेल
छोडि देलक तइयो प्यार कम नै भेल
एकरा अहाँ प्रेम कहु आs थेथरपनी
करेजो टूटल तइयो हमरा गम नै भेल
गुरुवार, 12 मई 2011
आय छी सीता नवमी आउ मिल के मनाबी मिथिला के एही महान पर्व के
भारतीय गणराज्य क बिहार प्रान्त क उत्तरी सीमा पर बसल सीतामढ़ी। जिला मुख्यालय स पांच किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम मे पुनौरा नामक स्थान पर जगत जननी सीता क जन्म भेल अछि। आइ एहि ठाम छोटसन रामजानकी क भव्य मंदिर अछि।
बाल्मीकिक अनुसार सीतामढ़ी मिथिलाक राजा सीरध्वज (मिथिला क राजा कए जनक कहल जाइत अछि, राम ससुरक नाम सीरध्वज छल)क राज्य क हिस्सा छल। हुनकर राज काल मे मिथिला मे भयंकर सूखा पड़ल। तखन इ भविष्यवाणी भेल जे राज्य क पालनहार जनक यदि स्वयं हल चला खेत मे सीताक (हल स बनल कियारी) निर्माण करथि त बरखा संभव होएत।
ताटम मण्डलविभूषितगण्डभागां,
चूडामणिप्रभृतिमण्डनमण्डिताम्।
कौशेयवस्त्रमणिमौक्तिकहारयुक्तां,
ध्यायेद् विदेहतनयां शशिगौरवर्णाम्।।
जनकपुर मे पंडित जगहक निर्धारण केलथि, नरेश सीतामढ़ी एलाह। सीतामढी क पुनौरा मे जखने हल खेत मे जोतल गेल धरती मे गड़ल एकटा घड़ा निकलल। ओहि मे स लक्ष्मी अवतरीत भेलीह। जखने जनक हुनका गोद लेलथि, झमाझम बरखा शुरू भ गेल। जगत जननी कए बचेबा लेल जनक एक मड़ई (झोपड़ी) मे चल गेलाह। संगहि हल स बनल कियारी अर्थात सीता मे भेटल जगत जननी क नाम सीता राखल गेल। जे बाद मे वैदेही, जानकी आ मैथिली नाम स सेहो विख्यात भेलीह। ओ मड़ई एखनो सीतामड़ई क नाम स अवस्थित अछि। कहल जाइत अछि जे सीतामड़ई कालान्तर मे अपभ्रंश भ सीतामढ़ी भ गेल।
मिथिला मे सीताक जयंती उत्साह स नहि मनाउल जाइत अछि। ओना एहि दिन धार्मिक अनुष्ठान होइत आयल अछि।
मिथिलाक राजा सीरध्वज क बाद मिथिलाक जनक भेलाह औदास। ओ जानकी नवमी दिन कोनो क्षत्रिय आ ब्राह्मïण कए खेत मे हल चलेबा पर प्रतिबंध लगा देलथि। ओहि दिन स आंगन मे हलक पूजा होइत अछि संगहि कामना होइत अछि जे ककरो घर मे सीता सन कपार ल बेटी नहि जन्म लिए। मिथिला मे आइ सेहो सुहाग लेल गौरीक पूजा कैल जाइत अछि, जखन कि सीताक पूजा लक्ष्मीक मंत्र स होइत अछि। अर्थात मिथिला मे सीताक पूजा नहि होइत अछि।
आइ धरि अवधक परंपरा कए प्रचारित करबा मे लोक लागल रहल आ मिथिलाक परंपरा उपेक्षित रहल। जाहि स परंपरा खत्म भ रहल अछि। सीताक कारण अवध मे पुतहु कए लक्ष्मी कहल जाइत अछि, जखन कि मिथिला मे बेटी कए इ उपाधि अछि।
अपन बहिन उर्मिला क कष्ट देखि राजा औदास इ परंपरा चला देने रहथि जे एक घर मे तीन बहिनक विवाह नहि हुए। सीताकविवाहक दिन मिथिला मे विवाह सेहो मना छल, मुदा अतिउत्तम लग्न हेबाक कारण अवध संग आब मिथिला मे सेहो लोक विवाह लेल तैयार भ गेल अछि। एकर पाछु विद्वानक कहब अछि जे
सीताक पिता अपन बेटीक सुख लेल जे भ सकैत अछि केलाह, मुदा हुनक बेटी जीवन क हर दुख भोगलीह। एहन मे सीताक जीवन स जुड़ल कोनो प्रक्रिया कए दोहरेबा लेल मिथिलाक लोक तैयार नहि छल।
सीताक जन्म स एकटा आओर पक्ष सामने अबैत अछि जे मिथिलाक जमीन मे खुद लक्ष्मी बसल छथि।अर्थात मिथिला क उन्नति ओहि ठामक जमीन मे गड़ल अछि।
सोजन्य - इसमाद पहिल मैथिली इ-समाचार पत्र
बाल्मीकिक अनुसार सीतामढ़ी मिथिलाक राजा सीरध्वज (मिथिला क राजा कए जनक कहल जाइत अछि, राम ससुरक नाम सीरध्वज छल)क राज्य क हिस्सा छल। हुनकर राज काल मे मिथिला मे भयंकर सूखा पड़ल। तखन इ भविष्यवाणी भेल जे राज्य क पालनहार जनक यदि स्वयं हल चला खेत मे सीताक (हल स बनल कियारी) निर्माण करथि त बरखा संभव होएत।
ताटम मण्डलविभूषितगण्डभागां,
चूडामणिप्रभृतिमण्डनमण्डिताम्।
कौशेयवस्त्रमणिमौक्तिकहारयुक्तां,
ध्यायेद् विदेहतनयां शशिगौरवर्णाम्।।
जनकपुर मे पंडित जगहक निर्धारण केलथि, नरेश सीतामढ़ी एलाह। सीतामढी क पुनौरा मे जखने हल खेत मे जोतल गेल धरती मे गड़ल एकटा घड़ा निकलल। ओहि मे स लक्ष्मी अवतरीत भेलीह। जखने जनक हुनका गोद लेलथि, झमाझम बरखा शुरू भ गेल। जगत जननी कए बचेबा लेल जनक एक मड़ई (झोपड़ी) मे चल गेलाह। संगहि हल स बनल कियारी अर्थात सीता मे भेटल जगत जननी क नाम सीता राखल गेल। जे बाद मे वैदेही, जानकी आ मैथिली नाम स सेहो विख्यात भेलीह। ओ मड़ई एखनो सीतामड़ई क नाम स अवस्थित अछि। कहल जाइत अछि जे सीतामड़ई कालान्तर मे अपभ्रंश भ सीतामढ़ी भ गेल।
मिथिला मे सीताक जयंती उत्साह स नहि मनाउल जाइत अछि। ओना एहि दिन धार्मिक अनुष्ठान होइत आयल अछि।
मिथिलाक राजा सीरध्वज क बाद मिथिलाक जनक भेलाह औदास। ओ जानकी नवमी दिन कोनो क्षत्रिय आ ब्राह्मïण कए खेत मे हल चलेबा पर प्रतिबंध लगा देलथि। ओहि दिन स आंगन मे हलक पूजा होइत अछि संगहि कामना होइत अछि जे ककरो घर मे सीता सन कपार ल बेटी नहि जन्म लिए। मिथिला मे आइ सेहो सुहाग लेल गौरीक पूजा कैल जाइत अछि, जखन कि सीताक पूजा लक्ष्मीक मंत्र स होइत अछि। अर्थात मिथिला मे सीताक पूजा नहि होइत अछि।
आइ धरि अवधक परंपरा कए प्रचारित करबा मे लोक लागल रहल आ मिथिलाक परंपरा उपेक्षित रहल। जाहि स परंपरा खत्म भ रहल अछि। सीताक कारण अवध मे पुतहु कए लक्ष्मी कहल जाइत अछि, जखन कि मिथिला मे बेटी कए इ उपाधि अछि।
अपन बहिन उर्मिला क कष्ट देखि राजा औदास इ परंपरा चला देने रहथि जे एक घर मे तीन बहिनक विवाह नहि हुए। सीताकविवाहक दिन मिथिला मे विवाह सेहो मना छल, मुदा अतिउत्तम लग्न हेबाक कारण अवध संग आब मिथिला मे सेहो लोक विवाह लेल तैयार भ गेल अछि। एकर पाछु विद्वानक कहब अछि जे
सीताक पिता अपन बेटीक सुख लेल जे भ सकैत अछि केलाह, मुदा हुनक बेटी जीवन क हर दुख भोगलीह। एहन मे सीताक जीवन स जुड़ल कोनो प्रक्रिया कए दोहरेबा लेल मिथिलाक लोक तैयार नहि छल।
सीताक जन्म स एकटा आओर पक्ष सामने अबैत अछि जे मिथिलाक जमीन मे खुद लक्ष्मी बसल छथि।अर्थात मिथिला क उन्नति ओहि ठामक जमीन मे गड़ल अछि।
सोजन्य - इसमाद पहिल मैथिली इ-समाचार पत्र
बुधवार, 11 मई 2011
हकार दैत छी - सीता नवमी पूजनोत्सव २०११ - १२ मई बृहस्पति दिन के

आजुक दिन में समस्त त्यौहार आ पर्वक सरकार आ समाज मान्यता देने अछि मुदा सीता नवमी के समस्त मैथिल समाजो नहीं मनबैत छैथ. जरूरी अछि जे एक्कर पूर्ण मान्यता होई आ लोक बुझैत जे सीता नवमी मिथिलाक राष्ट्रिय त्यौहार अछि. बहुत पहिने सं बड्ड रस संस्था सव सीता नवमी के राष्ट्रीय स्तर पर मनाबय के कोशिश में लागल छैथ. नुदा बिभिन्न कारने ई निरंतर नहीं भ पायल अछि.
वास्तव में सरकार सेहो जानकी नवमी के राष्ट्रिय त्यौहार मानय में कान में तेल ल सुतल अछि. अहि के कारण अछि जे स्वयं हम मैथिल सव सीता नवमीके प्रति ओतेक जागरूक नहीं छी . आई हम सव पश्चिमी पर्व जेना कि प्रेम दिवस , क्रिसम्स आदि मनबैत छी मुदा ओही ठाम बहुते रास मैथिल के इहो नई बुझल होयत जे सीता नवमी कोन महिनामे परैत अछि.
अतएब, इएह बिभिन्न कारक तत्वके निर्मूल क’ सीता नवमीके राष्ट्रिय धरोहरके रूपें स्थापित करयके हेतु हम सव हर साल सीता नवमीके आयोजन करव.
कार्यक्रम रुपरेखा
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अंत मे |
सौजन्य यूथ ऑफ़ मिथिला
मंगलवार, 10 मई 2011
चलल चलु
बढ्नैय यs तs बढ़ल चलु
गर छुनै यs उचाई त चढ़ल चलु
हर मंजर हर तूफ़ान सs लड़ल चलु
कोनों मोती कोनो हीरा अहाँ तेज मs अप्पन जरल चलु !
हर पत्थर हर कांटा हर पीर बिन बाँटल चलल चलु
कखनो शीश नवाबू कखनो शीश झुकाबू
कखनो शीश काटनs ....... .. चलल चलु
मंजिल य सीधा पर पथ संकीर्णता स भरल परल,
य टेढ़ा- मेढ़ा, बिना मुरल चलल चलु !
गति हवा के सुगंध छटा के
घनघोर घटा के गाथा कोनो गढ़ल चलु !
लाख विघ्न हुअ लाख रूकावट
बिन माथा टेकनs चलल चलु !
राह स अपन टलू नै, भीषण ताप स जलु नै
जे पीघैल गेल से पैन छि जे नै पिघलल उ चन्दन ,
निर्मल निर्झर पर निर्जल इ निश्चल
पथ पर अहाँ निश्छल चलल चलु !
हिंदी डूबल
हिंदी डुबल हिन्दू डूबल
डुइब रहल ये हिंदुस्तान !
मुट्ठी भर बालु समझै छि जेकरा
बहुत बड़ा ये ई रेगिस्तान !!
सुपर-30 के आनंद के एकटा आऔर पुरस्कार

आयोजन समिति के पर्मुख शकील ककवी कहैत ये जे हमरा आनंद कए सम्मानित करय में बड़ ख़ुशी भए रहल ये। आनंद सोंसे विश्व में युवा के लेल रोल मोडल ये जे बिहार के लेल गौरव के गोप ये।
एही पुरस्कारक सम्बन्ध में आनंद कहैत ये ई हिनकर वास्तविक हकदार हुनकर टीम आ ओ बच्चा सब ये जे सफलता के मोकाम पर पहुचें ले अपन पूरा ताकत लगाय दए ये। ओ कहलखिन जे हमर सपना ये की कियो अगर पढय ले चाहे ते खाली पैसा के लेल हुनकर पढाई नै रुके। एकरा से पहिने 'टाइम' पत्रिका भी सुपर-30 कए द बेस्ट ऑफ एशिया 2010' बतेलक रहे ओही ठाम न्यूज वीक ते सुपर-30 को दुनिया के सबसे चार प्रयोगधर्मी स्कूलों की सूची में शामिल करलक रहे। अंत में आनंद के हमरा आ समस्त मिथिला,आ बिहार के तरफ से बहुत बहुत शुभकामना। मिथिला-प्रणाम पटना में खेत से भेटल तीस टा बम
पटना के रूपसपुर थाना क्षेत्र में एकटा खेत से पुलिस मंगल दिन भोरे-भोर तीस टा बम खोजलक ये। एही मामला में अखैन धैर कोनो गिरफ्तारी नै भेल ये। मुदा जांच पड़ताल भए रहल ये।
पुलिस के मुताबिक दानापुर क्षेत्र के चुलाहीचक गाम के लोग सब पुलिस के सुचना देलक की एकटा खेत में तीस टा बम पड़ल ये, जाहि के बाद पुलिस मौका पर पहुचल ये तखन से बम के निष्क्रिय करय के प्रयास करल जाय रहल ये।
पुलिस के आशंका ये की पंचायत चुनाव में गड़बड़ी फैलाबै के लेल एही बम के प्रयोग करल जेतिये। पुलिस एही घटना के लेल खोजबीन कए रहल ये।मुदा अखनो धैर कियो गिरफ्तार नै भेल ये।
पुलिस के मुताबिक दानापुर क्षेत्र के चुलाहीचक गाम के लोग सब पुलिस के सुचना देलक की एकटा खेत में तीस टा बम पड़ल ये, जाहि के बाद पुलिस मौका पर पहुचल ये तखन से बम के निष्क्रिय करय के प्रयास करल जाय रहल ये।
पुलिस के आशंका ये की पंचायत चुनाव में गड़बड़ी फैलाबै के लेल एही बम के प्रयोग करल जेतिये। पुलिस एही घटना के लेल खोजबीन कए रहल ये।मुदा अखनो धैर कियो गिरफ्तार नै भेल ये।
रुबाइ
नै कुनू बात आs गोप नीक लागय ये
नै कुनू ग़ज़ल नै गीत हमरा भावय ये
जहिया से भेल हमरा हुनका सों पियार
नै हुनकर सिवा दोसर नजर आबय ये
नै कुनू ग़ज़ल नै गीत हमरा भावय ये
जहिया से भेल हमरा हुनका सों पियार
नै हुनकर सिवा दोसर नजर आबय ये
रुबाइ
देखते जों मोन में टीस उठि जाय
दूनू टा आँखी में नोर भरि जाय
ते बुझियो ई छौड़ा के टूटल ये दिल
गबरू जबान जों बताह बनी जाय
दूनू टा आँखी में नोर भरि जाय
ते बुझियो ई छौड़ा के टूटल ये दिल
गबरू जबान जों बताह बनी जाय
ग़ज़ल
आब मनुखे मनुखक की देत
जे दए बला ये ओ गोसाँय देत
सुनबै ते सुनु सच के बोल केहन होए ये
झूठो को ई गोप लजाs देत
लोग से देखियो जिनगी के रंग की होए ये
हिनकर रूप अहाँक कनाय देत
नै पुछू हमरा से पियार की होए ये
दुश्मनों के ई गोप हिलाs देत
टूटल करेज सs आवाज़ नै होए ये
एही बात अहाँक बुझाय देत
ग़ज़ल के लेल कोनो साज नै होए ये
बिना आवाजो के ई मज़ाs देत
सुदर्शन फकीर के ग़ज़ल आदमी आदमी को क्या देगा का मैथिल अनुवाद
जे दए बला ये ओ गोसाँय देत
सुनबै ते सुनु सच के बोल केहन होए ये
झूठो को ई गोप लजाs देत
लोग से देखियो जिनगी के रंग की होए ये
हिनकर रूप अहाँक कनाय देत
नै पुछू हमरा से पियार की होए ये
दुश्मनों के ई गोप हिलाs देत
टूटल करेज सs आवाज़ नै होए ये
एही बात अहाँक बुझाय देत
ग़ज़ल के लेल कोनो साज नै होए ये
बिना आवाजो के ई मज़ाs देत
सुदर्शन फकीर के ग़ज़ल आदमी आदमी को क्या देगा का मैथिल अनुवाद
शनिवार, 7 मई 2011
रुबाइ
मदर डे स्पेशल -:
तरक्कीयो से हमरा ख़ुशी नै भेटल
नौकरीयो हमरा परदेश मs भेटल
जिनकर कृपा से पहुंचलों ये एता
ओ माय से मिलय के छुट्टी नै भेटल
रुबाइ
सटल ठोर ते सिसकारी परबे करत
कटल मोंछ ते टिटकारी परबे करत
गाम जाय रही मोंछ पर ताव देने
छुटल ट्रेन ते लिलकारी परबे करत
कटल मोंछ ते टिटकारी परबे करत
गाम जाय रही मोंछ पर ताव देने
छुटल ट्रेन ते लिलकारी परबे करत
शुक्रवार, 6 मई 2011
रुबाइ
मल्लाहक भाग से माँछ नै मरय ये
घोर-चौबटिया पर लहास नै जरय ये
कतनो देखाय लीया पोथी आ पतरा
गिध्धक शाराप से गाय नै मरय ये
घोर-चौबटिया पर लहास नै जरय ये
कतनो देखाय लीया पोथी आ पतरा
गिध्धक शाराप से गाय नै मरय ये
रुबाइ
जिबए ले दुनिया में किछु ख़ास नै ये
सब कुछ ये पासे मुदाs पास नै ये
तोड्लक जे हमर करेज ओ छौड़ी
अछैत जिनगी, जिबए के आस नै ये
सब कुछ ये पासे मुदाs पास नै ये
तोड्लक जे हमर करेज ओ छौड़ी
अछैत जिनगी, जिबए के आस नै ये
झाजी के बी-टेक
पहिलुक बेर कॉलेज में एही तरह के घटना भेल
गाम से बी-टेक करय ले झाजी जखन पटना गेल
मुश्किल भेल बहुतहीं मुदा अंत में कॉलेज भेट गेल
एड्मीसन लेनाय रहे तेs झट से अन्दर घुसि गेल
मुंह से झाजी के बोल नै फूटल आब कोना दी उत्तर
गेट पर ठार छौडी जे कहलक अन्दर आउ ने सर
गेट पर ठार छौडी जे कहलक अन्दर आउ ने सर
ओ छौडी के अंग्रेजी से झाजी अपन बेहाल भेल
कंठ सुखैत, आंखि मुंदैत,पसीना से बुरा हाल भेल
कॉलेज के पहिल दिन से झाजी अनजान रहे
मोंछ पर ताव आs दिल में बड़ अरमान रहे
मुदा कॉलेज के दामाद से कए बचि सकल ये
पहिलुके बेर में टीक गेल आ मोंछो नै बचल ये
एक साल तलक झाजी के कॉलेज में एही हाल रहल
कखनो मुजरा के छौडी ते कखनो मुरगा बनल रहल
दोसर साल से झाजी के सबटा अभिलाष पूरा भेल
कुलानंद मिश्रा से ओ कॉलेज के 'कूल मेक' बनी गेल
गुरुवार, 5 मई 2011
ऑफिस के बाबू ...
ऑफिस के बाबू
ऑफिस के एकटा बाबू मरल
सीधे जाय के नरक में गिरल
नै कोनो दुःख भेल
नै कोनो कष्ट
उलटे खुश भेल
भए गेल मस्त
खुश भए के नाचे लागल
नरक के देवता के गुण गाबए लागल
कहलक एताs हम कतेक शान ये
नरक के बनाबै बला कतेकs महान ये
गोस्सायल,तमसायल प्रकट यमराज भेल
पुछलक ई दुःख में अहाँक कोन सुख भेट गेल
कहल ओ ऑफिस के बाबु
अहाँक नै बुझायल छि
हम एताs सीधा
हिन्दुस्तान से आयल छि
सुरेश उपाध्याय के कविता दफ्तर के बाबु के मैथिल अनुवाद
ऑफिस के एकटा बाबू मरल
सीधे जाय के नरक में गिरल
नै कोनो दुःख भेल
नै कोनो कष्ट
उलटे खुश भेल
भए गेल मस्त
खुश भए के नाचे लागल
नरक के देवता के गुण गाबए लागल
कहलक एताs हम कतेक शान ये
नरक के बनाबै बला कतेकs महान ये
गोस्सायल,तमसायल प्रकट यमराज भेल
पुछलक ई दुःख में अहाँक कोन सुख भेट गेल
कहल ओ ऑफिस के बाबु
अहाँक नै बुझायल छि
हम एताs सीधा
हिन्दुस्तान से आयल छि
सुरेश उपाध्याय के कविता दफ्तर के बाबु के मैथिल अनुवाद
तेलिबाक तेल...
भोलुआ तेली गाँव में करैत तेल के सेल
गली मोहल्ला घूमी रहल तेल लियो यो तेल
तेल लियो यो तेल कड़कल एहन बोली
लागय तड़कल बिजली आ की छुटल गोली
कहलक खट्टर कक्का किछु दिन शांति छाएल
भोलुआ तेली एक साल नै गाम आयल
अन्झक्के में भेटल एक दिन मरियल रहल चाल
देह सुखि के कांटा बन गेल पिचकल दोनों गाल
पिचकल गाल से गाम-घोर में धक्का खाएत
ले हो बाबू तेल बकरी जेना मिमियाबैत
पुछलक खट्टर कक्का झट से एहन कोना हाल भेल
मिमियाबैत,पछ्ताबैत कहलक कक्का हमार बियाह भs गेल
काका हाथरसी की रचना तेली के ब्याह का मैथिल अनुवाद...
गली मोहल्ला घूमी रहल तेल लियो यो तेल
तेल लियो यो तेल कड़कल एहन बोली
लागय तड़कल बिजली आ की छुटल गोली
कहलक खट्टर कक्का किछु दिन शांति छाएल
भोलुआ तेली एक साल नै गाम आयल
अन्झक्के में भेटल एक दिन मरियल रहल चाल
देह सुखि के कांटा बन गेल पिचकल दोनों गाल
पिचकल गाल से गाम-घोर में धक्का खाएत
ले हो बाबू तेल बकरी जेना मिमियाबैत
पुछलक खट्टर कक्का झट से एहन कोना हाल भेल
मिमियाबैत,पछ्ताबैत कहलक कक्का हमार बियाह भs गेल
काका हाथरसी की रचना तेली के ब्याह का मैथिल अनुवाद...
हुंकार भरू
जुठ्का रोटी के तिरस्कार करू
अनकर खेत में चलेलौं बड़ कौदाइर
आब अपनों डिहक जोगार करू
संस्कारक साथ ये लाखो माथ ये
आब नै डरु आगू बढ़ू
अतीत कए आधार करू तीत कए बिसैर धरु
विघ्न पर प्रहार करू
अपनों बिहार आगू बढ़त
बस एक बेर हुंकार भरू
बस एक बेर हुंकार भरू
रुबाइ
चक्का तिलकोर से अघाय गेलों हम
माछक-झोर, घी में नहाय गेलों हम
ई नै ये कोनो गामक भोज केर किस्सा
पहिलुक बेर नबका जमाय भेलों हम
माछक-झोर, घी में नहाय गेलों हम
ई नै ये कोनो गामक भोज केर किस्सा
पहिलुक बेर नबका जमाय भेलों हम
बताह
नाज रहे जे हमरा अपन चतुराई पर
अब बात बात पर फसई छि
अब बात बात पर फसई छि
मारे लाज के गर्दन भर धसए छि
की कहूँ लोक बताह समझै ये
जहिया से हुनका सों प्रेम भेल
असगरो में हम हँसय छि
असगरो में हम हँसय छि
हमर बिहार...
प्रत्यक्ष क प्रमाण के की आवश्यकता ---- देखि नै रहल छियै ई 10 सालक मs बिहार मs जे आश्चर्यजनक परिवर्तन भेल आओर भs रहल य तकरा मुदा इ नै बुझबई जे कोनो नितिशेजी टा एही परिवर्तन आनलक य अपितु बिहार के चौमुखी विकाश क लालायित युवाबर्ग के हाथे हुनकर चुनाव एही बातक एकटा प्रमाण छि। अगर कियो इ कहए ये की बिहार कs खाली सत्ता परिवर्तन के इच्छा रहे त ओ गलत कहै छैथ. सनद रहे की हमर बिहार क सिर्फ विकाश आ प्रोंनात्ति के आवश्यता ये नै की अंधी शहरीकरण के दौर में साथ अबैए बला कुविचार आ बुराई सब जे की आजुकाल इ मेट्रो शहर म देखल जानय आम बात ये. त चलु बिहार के स्वक्ष आ मेट्रो के दुर्गुण रहित विकाश के लेल कटिबद्ध होई। जय बिहार- जय मिथिला
रुबाइ
पुछलक कियो हमरा, किया कानय छि
विधना केर रीत ये ,किया नै मानय छि
कोनाक कही हम ओ निर्लज्जी के किस्सा
टूटल जे दिल ते मोने-मोन कानय छि
विधना केर रीत ये ,किया नै मानय छि
कोनाक कही हम ओ निर्लज्जी के किस्सा
टूटल जे दिल ते मोने-मोन कानय छि
बुधवार, 4 मई 2011
मैथिली चेतना परिषद की बैठक
सहरसा में रबि दिन डा. मायानंद मिश्र के अध्यक्षता में मैथिली चेतना परिषद के बैठक भेल जाहि में परिषद के अधुरा काज के आगाँ बढ़ाबय के संकल्प लेल गेल।
एही बैठक में स्व. डा. मनोरंजन झा के श्रधांजलि अर्पित करल गेल आ मैथिलि चेतना परिषद् के भव्य समारोह आयोजित करय पर विचार करल गेल। एही मौका पर पूर्व विधायक संजीव कुमार झा, डा. विद्यानंद मिश्र, सुरेन्द्रनाथ झा गोपाल, प्रो. अरविन्द नीरज, डा. महेन्द्र झाद्व डा. वेदानंद झा, डा. भवानंद मिश्र, सत्यप्रकाश, रामपुकार सिंह, निशिकांत झा, नरनाथ ठाकुर सहित और सब सदस्य उपस्थित रहे।
मंगलवार, 3 मई 2011
मुख्यमंत्री चलल भूटान...
अपन सुशासन बाबु बुध दिन से तीन दिनक भूटान यात्रा पे जाए रहल ये। मुख्यमंत्री जी भूटान जाए के सबसे पैघ कारण ये बिहार के लेल पनबिजली के क्षेत्र में किछु संभावाना तलासल जाय।
नितीश जी बुध दिन पटना से भूटान के लेल निकलत आ आठ मई के फेर पटना वापस आयब जायत। जाहि में ओ भूटान के प्रधानमंत्री से सेहो भेंट करथिन। एही यात्रा से दोसर उद्देश्य ई ये कि भूटान के पर्यटक के बिहार के तरफ आकर्षित कए सकी। जकरा लेल ओ बिहार पर्यटन निगम के तरफ से ओतय शिविर भी लागायल जाएत। ओ कहलखिन जे भारत के तरफ से भूटान में कएकटा पनबिजली परियोजना चलि रहल ये, हम एही परियोजना के बारे में जानकारी ले जाय रहल छि। एही सरकारी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री जी ' ग्रास नेशनल हेप्पीनेस मॉडल' (सकल राष्ट्रीय खुशी प्रारूप) के भी जानकारी लेत।
मुख्यमंत्री संगे राज्य के अधिकारी के एकटा दल भूटान जाएत। जाही में पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अजय नायक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव राजेश भूषण समेत कएकटा अधिकारी शामिल ये।
नितीश जी बुध दिन पटना से भूटान के लेल निकलत आ आठ मई के फेर पटना वापस आयब जायत। जाहि में ओ भूटान के प्रधानमंत्री से सेहो भेंट करथिन। एही यात्रा से दोसर उद्देश्य ई ये कि भूटान के पर्यटक के बिहार के तरफ आकर्षित कए सकी। जकरा लेल ओ बिहार पर्यटन निगम के तरफ से ओतय शिविर भी लागायल जाएत। ओ कहलखिन जे भारत के तरफ से भूटान में कएकटा पनबिजली परियोजना चलि रहल ये, हम एही परियोजना के बारे में जानकारी ले जाय रहल छि। एही सरकारी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री जी ' ग्रास नेशनल हेप्पीनेस मॉडल' (सकल राष्ट्रीय खुशी प्रारूप) के भी जानकारी लेत।
मुख्यमंत्री संगे राज्य के अधिकारी के एकटा दल भूटान जाएत। जाही में पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव अजय नायक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के प्रधान सचिव राजेश भूषण समेत कएकटा अधिकारी शामिल ये।
आब देखनाय ई ये कि सही में मुख्यमंत्री जी भूटान से कोनो उपाय आनत जे बिहार में बिजली परियोजना में किछु मदद करत आ कि सरकारी टका के दुरूपयोग से विदेश भ्रमण हेता...इ ते समय बतायत। जय मिथिला, जय मैथिलि।
रुबाइ
अपन सपना अपने मेटाs लेलों हम
अपन भागक दीपक मेझा लेलों हम
ओ कहलक कनिकटा इजोत कs दियो
अपना घरक फक्क से जला लेलों हम
अपन भागक दीपक मेझा लेलों हम
ओ कहलक कनिकटा इजोत कs दियो
अपना घरक फक्क से जला लेलों हम
रुबाइ
मेकअप के जरुरत नै चाँद कs पड़त
अहाँक रूप ये चाँद सन मानय पड़त
चक्क से जे चमकल मुखड़ा अहाँक
तोड़ी लेलक सब कियो चौठक बरत
अहाँक रूप ये चाँद सन मानय पड़त
चक्क से जे चमकल मुखड़ा अहाँक
तोड़ी लेलक सब कियो चौठक बरत
सोमवार, 2 मई 2011
ग़ज़ल
बिना माछक झोर के सचार नै होए ये
बिना ढोलिबाक ढोल के त्यौहार नै होए ये
कतनो सजाय लिया नबकी दुलहिनिया
बिना सिंदूर के श्रींगार पटार नै होए ये
छौंक लगाय लियो कतनो जीरा जमैन से
बिना तेलीबाक तेल के आचार नै होए ये
नोट के जोड़ पर बनि गेल नेता
बिना जनता के एता सरकार नै होए ये
कतनो गुनगुनाय लिए अपन गीत-ग़ज़ल के
बिना गुरुदेव केर आशीर्वाद के गजलकार नै होए ये
बिना ढोलिबाक ढोल के त्यौहार नै होए ये
कतनो सजाय लिया नबकी दुलहिनिया
बिना सिंदूर के श्रींगार पटार नै होए ये
छौंक लगाय लियो कतनो जीरा जमैन से
बिना तेलीबाक तेल के आचार नै होए ये
नोट के जोड़ पर बनि गेल नेता
बिना जनता के एता सरकार नै होए ये
कतनो गुनगुनाय लिए अपन गीत-ग़ज़ल के
बिना गुरुदेव केर आशीर्वाद के गजलकार नै होए ये
ग़ज़ल
भैया खुश ये, बहिना खुश ये
नबका सासुर, पहुँना खुश ये
सिरको में ओ काँपैत रहला
गरीब बिना ओछोना खुश ये
तोशको ग़द्दा नींद नै लाबेए
गरीब बिना बिछोना खुश ये
सुनिलक ग़ज़ल रास नै आबए
तइयो जहिना-तहिना खुश ये
नबका सासुर, पहुँना खुश ये
सिरको में ओ काँपैत रहला
गरीब बिना ओछोना खुश ये
तोशको ग़द्दा नींद नै लाबेए
गरीब बिना बिछोना खुश ये
सुनिलक ग़ज़ल रास नै आबए
तइयो जहिना-तहिना खुश ये
रुबाइ
कनिया के सासुर में लिबय परत
शौरी घोरक दरद के बुझय परत
कतनो दुलारि छि नैहरा में ओ
हुनका टेमी के फोंका सहय परत
शौरी घोरक दरद के बुझय परत
कतनो दुलारि छि नैहरा में ओ
हुनका टेमी के फोंका सहय परत
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